किसानों की जीवन रेखा है जैविक खेती

खरगोन। जैविक खेती मोठापुरा के किसानों की जीवन रेखा है। रसायन छोड़ जैविक खेती अपनाने से जहां कृषि उत्पादन में आशातीत वृद्धि हुई, वहीं आर्थिक सम्पन्नता आने से किसान खुशहाल बने। खरगोन से 25 किमी दूर कृषि बाहुल्य मोठापुरा में

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हरी खाद से मिट्टी की सेहत सुधारी

जबलपुर। इफको जबलपुर कार्यालय ने मंडला, बालाघाट, सागर, सिवनी एवं नरसिंहपुर के खेतों की मिट्टी का खरीफ पर्व परीक्षण करवाया। मृदा परीक्षण से यह ज्ञात हुआ कि इन जिलों के खेतों की मिट्टियों में जीवांश की कमी है। जीवांश को

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प्रमुख फसलों के विषाणु रोग – नियंत्रण

फसलों में विषाणु रोगों के प्रकोप से काफी नुकसान होता है। विषाणु रोगों का महत्व इसलिये भी अधिक है क्योंकि इनके रोगकारक विषाणु का दायरा विस्तृत होता है तथा कई फसलों पर रोग उत्पन्न करते है। साथ ही इनका प्रसारण

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बीज किस्म ही दोषी क्यों ?

कपास उत्पादन एवं किस्म बीटी कपास से कपास उत्पादन में क्रांति आई है। कपास के कीट नियंत्रण मेें सरकार किसान, कीटनाशी कम्पनियां वर्ष 2001-02 या इससे पूर्व ‘किम् कत्र्तव्य विमूढ की स्थिति में आने पर भारत में खरीफ 2002 में

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सब्जी उत्पादन में समन्वित कीट प्रबंधन

एकीकृत नाशीजीव प्रबंधन के तरीकों की सफलता मुख्यतया हानिकारक कीट एवं मित्र कीटों की निगरानी के आधार पर कीट प्रबंधन के विभिन्न घटकों के एकीकरण कर सही निर्णय को लागू करने के ऊपर निर्भर है। फसल चक्रअपनाकर कीट नियंत्रण- किसी

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आमदनी का एक जरिया तुलसी

भारतीय संस्कृति में तुलसी के पौधे का धार्मिक एवं औषधीय महत्व है। तुलसी की जातियां ओसिमस बेसिलीकम, ओसिमस ग्रेटिसिमम, ओसिमस सेंक्टम, ओसिसम मिनीमम, ओसिमम अमेरिकेनम। भौगोलिक विवरण तुलसी भारत के सभी राज्यों में पाया जाने वाला पौधा है। तुलसी का

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एम.पी. एग्रो, उद्यानिकी हुआ डिजीटल

भोपाल। एम.पी. स्टेट एग्रो इण्डस्ट्रीज डेव्लपमेंट कार्पोरेशन लि. एवं उद्यानिकी विभाग ने डिजीटल दुनिया में प्रवेश किया है। मध्य प्रदेश में अब किसानों को शासन की योजनाओं का लाभ ऑनलाइन प्राप्त होगा। पारदर्शी प्रक्रिया से किसानों का चयन इलेक्ट्रॅानिक माध्यम

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सोयाबीन की उन्नत उत्पादन तकनीक

सोयाबीन की उन्नत उत्पादन तकनीक बुवाई के समय किये जाने वाले कार्य:- सोयाबीन  बीज- विभिन्न जातियों के बीज आकार के हिसाब से उपयोग करना चाहिये। छोटे दाने वाले सोयाबीन  की किस्मों (जे. एस. 97-52) की बीजदर 60-70 कि.ग्रा., मध्यम दाने वाली

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तिल उत्पादन की उन्नत कृषि तकनीक

तिलहनी फसलों में तिल का प्रमुख स्थान है इसकी खेती खरीफ एवं रबी मौसम में की जाती है। भूमि का चुनाव – खेती अच्छे जल निकास वाली सभी प्रकार की भूमि में की जा सकती है रेतीली, दोमट भूमि अधिक

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‘कदूदगांव’ पहुंची केन्द्र सरकार

धार। भारत सरकार के ग्रामीण विकास विभाग के सचिव श्री जे.के मोहपात्रा तथा अतिरिक्त सचिव श्री अमरजीत सिन्हा नालछा विकासखण्ड के ग्राम सुलीबयड़ी, आंवलिया, भीलबरखेड़ा व जीरापुरा में पहुँचे तथा केन्द्र सरकार द्वारा संचालित ग्रामीण विकास संबंधी योजनाओं का अवलोकन

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