बैतूल जिले की पड़त भूमि के लिए उपयुक्त फसल है काजू

काजू के बगीचे लगाने हेतु आवेदन करें किसान बैतूल जिले की पड़त भूमि के लिए उपयुक्त फसल है काजू – बैतूल मध्यप्रदेश का पहला जिला है जहाँ वर्ष 2018-19 से काजू की व्यवसायिक खेती प्रारंभ की गयी है। भारत सरकार

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चने की प्रमुख बीमारियां एवं रोकथाम

बीमारियाँ :- चने की उकठा रोग :- यह एक मृदोढ़ व बीजोढ रोग है, जो कि फ्यूजेरियम आक्सीस्पोरम नामक फफूंद से होती है। संक्रमण :- रोगजनक फसल के अवशेषों व बीजों में 3-5 साल तक जीवित रहते हैं तथा बुवाई

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सब्जियों में सिंचाई जल की आवश्यकता एवं प्रबंधन

सिंचाई जल असमानता होने पर सब्जियों में प्रभाव: सब्जियों में सिंचाई जल की आवश्यकता एवं प्रबंधन – अधिक उत्पादन हेतु कृत्रिम ढंग से पानी देने की क्रिया को सिंचाई कहते हैं। बढ़ती हुई आबादी के दबाव से अतिरिक्त भोज्य पदार्थों

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मध्य भारत में गेहूं की वैज्ञानिक खेती कैसे करें

मध्य भारत में गेहूं की वैज्ञानिक खेती कैसे करें – मध्य क्षेत्र के अंतर्गत मध्य प्रदेश, गुजरात, छत्तीसगढ़, उत्तर प्रदेश का बुंदेलखण्ड एवं दक्षिणी राजस्थान सम्मिलित हैं। मध्य भारत का गेहूं गुणवत्ता में पूरे देश में अग्रणी है। मध्य क्षेत्र,

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तुलसी की खेती मुनाफा देती

औषधीय फसलों की कॉन्ट्रेक्ट फार्मिंग 31 अक्टूबर 2020, देवास। तुलसी की खेती मुनाफा देती – भारतीय हिंदू परिवारों विशेषकर ग्रामीण क्षेत्रों में प्राय: हर घर आंगन में तुलसी का बिरवा होता है, जिसकी सुबह शाम पूजा की जाती है। कभी-कभी

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सुवा की खेती से अधिक कमाई

सुवा की खेती से अधिक कमाई – सुवा या सोवा एक गौण बीजीय मसाला है। इसके पौधे का प्रत्येक भाग औषधीय गुण रखता है। सुवा के साबुत या पीसे हुए दानों के रूप में सूप, सलाद, सॉस एवं अचार आदि

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गेहूं की उन्नत खेती सीमित सिंचाई से संभव

गेहूं की उन्नत खेती सीमित सिंचाई से संभव – आजकल गेहूं की खेती वर्षा आधारित एवं सीमित सिचंाई करके की जा रही है कम पानी की उपलब्धता होने पर गेहूं की कम पानी की आवश्यकता वाली प्रजातियों का चुनाव कर

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ऐसे करें हरी-भरी मटर की खेती

ऐसे करें हरी-भरी मटर की खेती – मटर एक महत्वपूर्ण दलहनी फसल है। जो हमारे भोजन में एक महत्वपूर्ण स्थान रखती है। इसका उपयोग दाल के रुप में, कच्चे दाने एवं भूनकर किया जाता है। महत्वपूर्ण खबर : ऐसे करें

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ऐसे करें मसूर की खेती

ऐसे करें मसूर की खेती – भूमि एवं तैयारी : दोमट से भारी भूमि मसूर के लिए उपयुक्त होती है। खरीफ फसल की कटाई के बाद 2-3 हल्की जुताई कर नमी संचय के लिए पाटा लगाना चाहिए। मसूर के लिए

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धनिया से बनें धनवान

भूमि : अच्छे जल निकास वाली रेतीली दोमट या मटियार दुमट भूमि जिसकी उर्वराशक्ति अच्छी हो उपयुक्त रहती है। क्षारीय एवं अम्लीय भूमि में उपज अच्छी प्राप्त नहीं होती। असिंचित क्षेत्रों के लिये भारी किस्म की भूमि जिसमें जलधारण क्षमता

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