सोयाबीन को जीवनदान
मध्य प्रदेश में खरीफ की प्रमुख फसल सोयाबीन को दूसरे दौर की वर्षा प्रारंभ होने से नया जीवनदान मिल गया है। किसानों की चिंताएं कुछ कम हुई है। पूर्व में शुरूआती मानसून के बाद लबे सन्नाटे के कारण राज्य के
फसल की खेती (Crop Cultivation) से जुड़ी संपूर्ण जानकारी प्राप्त करें। गेहूं, धान, सोयाबीन, मक्का, चना, सरसों, कपास, दालों और तिलहनी फसलों की उन्नत खेती, बुवाई, सिंचाई, पोषण प्रबंधन, रोग एवं कीट नियंत्रण के विशेषज्ञ सुझाव पढ़ें।
मध्य प्रदेश में खरीफ की प्रमुख फसल सोयाबीन को दूसरे दौर की वर्षा प्रारंभ होने से नया जीवनदान मिल गया है। किसानों की चिंताएं कुछ कम हुई है। पूर्व में शुरूआती मानसून के बाद लबे सन्नाटे के कारण राज्य के
बाजार में अच्छे दाम किसान भाईयों के लिए एक अतिरिक्त आय का साधन भी होता है। वर्तमान समय में जब खेख्सा का फल बाजार में आता है तो उसका मूल्य रूपये 90 से 100 रूपये तक प्रति किग्रा तक मिलती
उम्मीद से बेहतर मानसून ने किसानों को खुश कर दिया है तो उनकी जवाबदारी भी बढ़ा दी है। किसानों ने खरीफ फसलों की लगभग बुवाई कर दी है। किसान के लिए फसल अपने बच्चे की तरह होती है। कोई भी
सोयाबीन भारतवर्ष की एक महत्वपूर्ण तिलहनी फसल सोयाबीन भारतवर्ष की एक महत्वपूर्ण तिलहनी फसल है देश में इसकी खेती लगभग 65 लाख हेक्टेयर क्षेत्रफल में की जाती है। जिससे प्रतिवर्ष लगभग 78 लाख टन उत्पादन प्राप्त होता है सोयाबीन उगाने
भारतीय बीज कंपनियों के शीर्ष संगठन नेशनल सीड एसोसिएशन ऑफ इंडिया (एनएसए) के अध्यक्ष श्री मांडव प्रभाकर राव के मुताबिक बाजार कारकों के असर और मानसून की अनिश्चितताओं से आगामी खरीफ सीजन में फसलों के पैटर्न में बड़ा बदलाव आएगा
भिन्न-भिन्न ऊंचाई एवं भिन्न-भिन्न रंगों के कारण लेण्ड स्केप की खूबसूरती बढ़ाने के भी काम आता है। यह क्यारियों में तथा हरबेसियस बॉर्डर के रूप में आसानी से उगाया जाने वाला पौधा है। इसके साथ सबसे महत्वपूर्ण एवं फायदेमंद बात
वर्ष 2015 का खरीफ शुरू होने को है। खरीफ का महत्व क्षेत्रफल तथा फसल विविधता की दृष्टि से विशेष है। खरीफ में पैदा किये जाने वाली प्रमुख फसलें धान, सोयाबीन, मूंगफली, मूंग, उड़द तथा अरहर है जिनमें से सबसे अधिक
पोषक मूल्य पोष्टिकता की दृष्टि से यह विटामिन एवं खनिज लवणों का स्त्रोत है। इसके फल विटामिन ए व सी से भरपूर होते हैं। मिर्च का तीखापन उसमें उपस्थित एल्कालॉयड कैपसाइसिन के कारण होता है। जलवायु निमाड़ की जलवायु मिर्च
मिट्टी की जांच क्यों आवश्यक है:1. मिट्टी की उर्वराशक्ति एवं पोषक तत्वों की उपलब्धता ज्ञात करने के लिये।2. परीक्षण के आधार पर फसल की आवश्यकतानुसार उर्वरकों की मात्रा निर्धारित करने के लिए।3. ऐसी भूमि जहां उर्वरकों की आवश्यकता नहीं है,
बढ़ती जनसंख्या के भरण-पोषण के लिये प्रति इकाई उत्पादकता बढ़ाने के प्रयास में अंधाधुंध सिंचाई, असंतुलित उर्वरक उपयोग कृषि में होने के कारण भूमि के स्वास्थ्य पर विपरीत असर देखे जाने लगे जो वर्तमान में एक चुनौती बनकर उभरे हैं।