अतिरिक्त आमदनी का जरिया ‘खीरा’
भूमि की तैयारी – खीरे के लिए कोई खास तैयारी नहीं करनी पड़ती क्योंकि तैयारी भूमि की किस्म के ऊपर निर्भर होती है। बलुई भूमि के लिये अधिक जुताई की आवश्यकता नहीं होती। इसलिये 2-3 जुताई करनी चाहिए तथा पाटा
फसल की खेती (Crop Cultivation) से जुड़ी संपूर्ण जानकारी प्राप्त करें। गेहूं, धान, सोयाबीन, मक्का, चना, सरसों, कपास, दालों और तिलहनी फसलों की उन्नत खेती, बुवाई, सिंचाई, पोषण प्रबंधन, रोग एवं कीट नियंत्रण के विशेषज्ञ सुझाव पढ़ें।
भूमि की तैयारी – खीरे के लिए कोई खास तैयारी नहीं करनी पड़ती क्योंकि तैयारी भूमि की किस्म के ऊपर निर्भर होती है। बलुई भूमि के लिये अधिक जुताई की आवश्यकता नहीं होती। इसलिये 2-3 जुताई करनी चाहिए तथा पाटा
इन्दौर। सोयाबीन की खेती में साल दर साल समस्याएं बढ़ती जा रही हैं। जैसे बीज व भूमिजनित बीमारियां जो फफूंदियों द्वारा उत्पन्न होती हैं, जिसके कारण अंकुरण में भारी कमी आ जाती है, इससे किसान बीज की मात्रा बढ़ाकर बोवनी
राघव जैसवाल, बदनावर समाधान- आपका प्रश्न सामयिक है. सोयाबीन लगाने का समय आ रहा है. जातियों का चयन तथा प्राप्ति स्थल जानना जरूरी है तो जानिये इन पंक्तियों से- जातियों में जे.एस. 335, जे.एस. 80-21, जे.एस. 71-05, जे.एस. 90-41, अहिल्या-1,
बीज क्या है, व्यवसायिक दृष्टि से बीज की परिभाषा के अंतर्गत लैंगिक जनन द्वारा उत्पन्न बीज के साथ-साथ फल, तना, जड़ व अन्य प्रवर्धन सामग्री से है जो अनुकूल वातावरणीय परिस्थितियों – नमी, ताप, वायु व प्रकाश की सुलभता और
बीज की विशेषताएं : अनुवांशिक रूप से शुद्ध होता है। भौतिक रूप से शुद्ध होता है। बीज का आकार, आकृति व रंग में समानता होती है। निर्धारित मानकों के अनुरूप अंकुरण क्षमता व नमी का होना। यह बीज जनित रोग
खाद्यान्न फसलों में धान-गेहूं भारत का एक प्रमुख फसल प्रणाली है। यह फसल प्रणाली देश की खाद्यान्न सुरक्षा के लिए रीढ़ की हड्डी है। हमारे देश के उत्तर-पश्चिम और उत्तर-पूर्व में लगभग 12.3 मिलियन हेक्टेयर क्षेत्र धान-गेहूं फसल चक्र के
खाद निर्माण हेतु आवश्यक सामग्री खाद उत्तम प्रकार से पक सके तथा खेत में पोषक तत्व एवं वायु का संचार कर सके इस हेतु निम्नलिखित सामग्री का उपयोग करें: गोबर, हरा मुलायम चारा अथवा घास जो बिना फूल और बीज
भोपाल। देश की प्रतिष्ठित संस्था रिलांयस फाऊंडेशन जो विगत तीन वर्षों से प्रदेश के विभिन्न जिलों में किसानों को विभिन्न गतिविधियों के माध्यम से जैविक खेती के लिए जागरूक करने का कार्य कर रही है। इन प्रयासों के सकारात्मक परिणाम
भूमि एवं जलवायु – इसकी खेती के लिये गहरी उपजाऊ व अच्छे पानी के निकास वाली दोमट मिट्टी उपयुक्त रहती हैं। उपयुक्त किस्में – बी-250 तथा बी-260, पंचमुखी, सतमुखी, सीओ-1, श्री किरन, श्री पल्लवी, श्री रश्मी अरबी की उपयुक्त किस्में
भोपाल। महुआ की गुल्ली और फूल अब 30 रूपये प्रति किलो खरीदा जायेगा। अभी लगभग 15 रूपये किलो के भाव से बिकता है। मुख्यमंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान ने यह घोषणा उमरिया उत्सव में की। श्री चौहान ने अधिक से