तो ऐसे करें लाख की खेती
लाख फसल तो ऐसे करें लाख की खेती – भारत में कुसमी और रंगीनी दो प्रकार की लाख फसल होती है। कुसमी लाख कुसुम के पौधों पर होती है जबकि रंगीनी लाख मुख्यत: पलाश बेर के पौधे पर पाले जाते
आगे पढ़ने के लिए क्लिक करेंफसल उत्पादन (Crop Cultivation) उन्नत तकनीकें
नवीनतम फसल खेती जानकारी यहाँ उपलब्ध है। आधुनिक कृषि पद्धतियां और Crop Cultivation नवाचार अपनाएं। बुआई समय तथा वैज्ञानिक बीज उपचार तकनीकें उपज बढ़ाती हैं। खरपतवार नियंत्रण, रोग प्रबंधन और कीट सुरक्षा उपाय फसल पैदावार हेतु आवश्यक हैं।
यह खंड गेहूं उत्पादन, चना खेती, मूंग, सोयाबीन, धान तथा मक्का जैसी अनाज फसलों पर केंद्रित है। आलू, कपास, जीरा, प्याज और टमाटर की नई किस्में यहाँ देखें। फसल कीट नियंत्रण और रोग नियंत्रण विशेषज्ञ सलाह यहाँ प्राप्त करें। Crop Cultivation प्रक्रिया में सोयाबीन, गेहूं और धान बीज उपचार अनिवार्य है।
मशरूम खेती, जिमीकंद और औषधीय फसल उत्पादन जानकारी यहाँ संकलित है। जुकिनी, ड्रैगन फ्रूट, बैंगन तथा टमाटर खेती के वैज्ञानिक गुर सीखें। आम, नींबू, अमरूद, पपीता और लहसुन खेती की हर बारीकी यहाँ उपलब्ध है। पूसा अरहर-16 तथा सरसों उन्नत किस्में (स्टार एग्रीसीड्स) अधिक लाभ देती हैं। अफीम खेती कानूनी प्रक्रिया और लाइसेंस जानकारी इस Crop Cultivation गाइड में समाहित है।
लाख फसल तो ऐसे करें लाख की खेती – भारत में कुसमी और रंगीनी दो प्रकार की लाख फसल होती है। कुसमी लाख कुसुम के पौधों पर होती है जबकि रंगीनी लाख मुख्यत: पलाश बेर के पौधे पर पाले जाते
आगे पढ़ने के लिए क्लिक करेंदेशी वनस्पतियां औषधीय गुणों से भरपूर – वर्तमान समय में कोरोना जैसी महामारियों के दौर को देखते हुए राजस्थान के शुष्क क्षेत्रों में आसानी से पाए जाने वाले औषधीय पादपों एवं उनके उपयोग के बारे में जानकारी होना अत्यंत आवश्यक
आगे पढ़ने के लिए क्लिक करेंरबी फसलों के विषाणु जनित रोग व उनका समेकित नियंत्रण – विषाणु अति सूक्ष्मदर्शी अविकल्पी परजीवी होते हैं जो कि अत्यधिक संक्रामक एवं परपोषी विशिष्ट होते हैं। फसलों में विषाणु रोगों के प्रकोप से काफी नुकसान होता है। विषाणु रोगों
आगे पढ़ने के लिए क्लिक करेंक्षेत्रीय केंद्र इंदौर की गेहूं किसानों को सलाह 5 जनवरी 2021, इंदौर। गेहूं में जरूरत से ज्यादा सिंचाई न करें – भा.कृ.अनु.परिषद,भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान, क्षेत्रीय केंद्र इंदौर द्वारा गेहूं उत्पादक किसानों को सिंचाई, खाद, खरपतवार नियंत्रण एवं कीट नियंत्रण
आगे पढ़ने के लिए क्लिक करेंयूं करें गन्ने से आय में बढ़ौत्री – भारत में कृषि मे लाभ की कमी के कारण कृषि में युवाओं की रूचि में लगातार कमी देखी जा रही है। ऐसी स्तिथि में किसानों को अपनी कृषि पद्धति में आधुनिक तकनीकी
आगे पढ़ने के लिए क्लिक करेंसर्दी और पाले से फसलों को बचायें – किसानों को बढ़ती सर्दी से चिंता सताने लगी है कि फसलों को कैसे बचाये जल्द ही शीतलहर और पाले का प्रकोप दिखाई देने लगेगा। जब सर्दी चरम पर होती है तो उस
आगे पढ़ने के लिए क्लिक करेंपर्ण सुरंगक (लीफ माइनर) पहचान एवं क्षति के लक्षण:- प्रौढ़ मक्खी चमकीली, गहरे, हरे रंग या काली होती है। इसका वक्ष काले रंग का होता है तथा किनारों पर पीले निशान होते है। अगले पंख पारदर्शक होते है। पिछले पंख
आगे पढ़ने के लिए क्लिक करेंपोषकीय सुरक्षा हेतु खाद्य फसलों का बायो फोर्टिफिकेशन – आहार में सूक्ष्म पोषक तत्वों की कमी या असंतुलित अनुपात शरीर को विभिन्न तरीकों से प्रभावित करती है जिसे दूसरे शब्दों में कुपोषण भी कहते हैं जो कि दैनिक आहार में
आगे पढ़ने के लिए क्लिक करेंरोग को कैसे पहचानें? – रोग के लक्षण तना, पत्तियों व फलियों पर देखे जा सकते हैं। लक्षण के आधार पर इसे तना गलन, श्वेत अंगमारी, तना कैंकर इत्यादि नाम दिये गये हैं। रोग के आरम्भिक लक्षण पौधे के तना
आगे पढ़ने के लिए क्लिक करेंजैविक खेती जमीन और जीवन दोनों की जरूरत – खेती महंगी हो गयी है। कृषि उपकरण, बीज, खाद, पानी और मजदूर सब महंगे हो गये हैं। सरकार लाख दावा कर ले, रिजर्व बैंक की रिपोर्ट यह सच सामने लाती है
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