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  • शीशपाल चौधरी द्य ओमप्रकाश चौधरी
    वरिष्ठ अनुसंधान अध्येता, पशुधन उत्पादन प्रबंधन विभाग
    श्री कर्ण नरेंद्र कृषि महाविद्यालय, जोबनेर

9 अप्रैल 2021, भोपाल । पशुओं के लिए संतुलित आहार – वैज्ञानिक दृष्टि से दुधारू पशुओं के शरीर के भार के अनुसार उसकी आवश्यकताओं जैसे जीवन निर्वाह, विकास तथा उत्पादन आदि के लिए भोजन के विभिन्न तत्व जैसे प्रोटीन, कार्बोहायडे्रट्स, वसा, खनिज, विटामिन तथा पानी की आवश्यकता होती है। पशु को 24 घण्टों में खिलाया जाने वाला आहार (दाना व चारा) जिसमें उनकी आवश्यकताओं की पूर्ति हेतू भोज्य तत्व मौजूद हों, पशु आहार कहते हैं। जिस आहार में पशु के आवश्यक पोषक तत्व उचित अनुपात तथा मात्रा में उपलब्ध हों, उसे संतुलित आहार कहते हैं।

पशुओं में आहार की मात्रा उसकी उत्पादकता तथा प्रजनन की अवस्था पर निर्भर करती है। पशु को कुल आहार का 2/3 भाग मोटे चारे से तथा 1/3 भाग दाने के मिश्रण द्वारा मिलना चाहिए। मोटे चारे में दलहनी तथा गैर दलहनी चारे का मिश्रण दिया जा सकता है। दलहनी चारे की मात्रा आहार में बढने से काफी हद तक दाने की मात्रा कम किया जा सकता है।

संतुलित पशु आहार का महत्व

देश के अधिकतर पशुओं को उनकी आवश्यकता के अनुसार पौष्टिक आहार नहीं मिल पाता हैं। देश मे आहार की कमी के साथ-साथ इसकी गुणवता में भी कमी हैं। पशुओं को खिलाने के लिए अधिकतर किसान सूखे चारे का प्रयोग करते हैं जिससे प्रोटीन, ऊर्जा प्रदान करने वाले तत्व, खनिज पदार्थ व विटामिन की कमी होती हैं। ऐसे आहार पर पाले पशुओं में कई तत्वों की कमी के कारण वृद्धि दर में कमी, परिपक्वता में देरी, गर्मी में समय पर न आना, दो ब्यातों के बीच अधिक अंतर, प्रजनन में कमी आदि समस्याओं का सामना करना पड़ता हैेै। इन सभी समस्याओं का निर्वाण हेतु पशुओं को ऐसा स्ंातुलित पशु आहार खिलाना चाहिए जिसमे सभी पोषक तत्व उचित मात्रा व अनुपात में हो और उनकी निर्वाह आवश्यकता से 25-30 प्रतिशत अतिरिक्त राशन दें।

संतुलित पशु आहार कैसा हो
  • संतुलित पशु आहार रूचिकर होना चाहिए।
  • पेट भरने की क्षमता रखता हो।
  • सस्ता, गुणकारी, उत्पादक तथा बदबू और फफूंद रहित होना चाहिए।
  • वह आफरा ना करता हो, दस्तावार भी न हो
  • आहार में हरे चारे का समावेश हो।

दुधारू पशुओं के आहार का वर्गीकरण
जीवन निर्वाह के लिए आहार:-

यह आहार की वह मात्रा है जिसे पशु को अपने शरीर को स्वस्थ रखने के लिए दिया जाता है। इसे पशु अपने शरीर के तापमान को उचित सीमा में बनाए रखने, शरीर की आवश्यक क्रियायें जैसे पाचन क्रिया, रक्त परिवहन, श्वसन, उत्सर्जन, उपापचय आदि के लिए काम में लाता है। इससे उसके शरीर का वजन भी एक सीमा में स्थिर बना रहता है। चाहे पशुु उत्पादन में हो या न हो इस आहार को उसे देना ही पड़ता है इसके आभाव में पशुु कमजोर होने लगता है जिसका असर उसकी उत्पादकता तथा प्रजनन क्षमता पर पड़ता है। इस में देसी गाय के लिए तुड़ी अथवा सूखे घास की मात्रा 4 किलो तथा संकर गाय, शुद्ध नस्ल के लिए यह मात्रा 4 से 6 किलो तक होती है। इसके साथ पशु को दाने का मिश्रण भी दिया जाता है जिसकी मात्रा स्थानीय देसी गाय के लिए 1 से 1.25 किलो तथा संकर गाय शुद्ध नस्ल की देशी गाय के लिए इसकी मात्रा 2.0 किलो रखी जाती है।
इस विधि द्वारा पशु को खिलाने के लिए दाने का मिश्रण उचित अवयवों को ठीक अनुपात में मिलाकर बना होना आवश्यक है। इसके लिए निम्नलिखित घटकों को दिए हुए अनुपात में मिलाकर सन्तोषजनक पशु दाना बना सकते हैं।

गर्भवस्था के लिए आहार:-

पशु गर्भवस्था में उसे 5 वें महीने से अतिरिक्त आहार दिया जाता है क्योंकि इस अवधि के बाद गर्भ में पल रहे बच्चे की वृद्धि बहुत तेजी के साथ होने लगती है। अत: गर्भ में पल रहे बच्चे की उचित वृद्धि व विकास के लिए तथा गाय के अगले ब्यांत में सही दुग्ध उत्पादन के लिए इस आहार का देना नितान्त आवश्यक है। इसमें स्थानीय गायों के लिए 1.25 किलो तथा संकर नस्ल की गायों व भैंसों के लिए 1.75 किलो अतिरिक्त दाना दिया जाना चाहिए। अधिक दूध देने वाले पशुओं को गर्भवस्था में 8वें माह से अथवा ब्याने के 6 सप्ताह पहले उनकी दुग्ध ग्रंथियों के पुर्ण विकास के लिए इच्छानुसार दाने की मात्रा बढ़ा देनी चाहिए। इस के लिए देशी नस्ल के पशुओं में 3 किलो तथा संकर गायों व भैसों में 4-5 किलो दाने की मात्रा पशु की निर्वाह आवश्यकता के अतिरिक्त दिया जाना चाहिए। इससे पशु अलगे ब्यांत में अपनी क्षमता के अनुसार अधिकतम दुग्धोत्पादन कर सकते हैं।

दूध उत्पादन के लिए आहार:-

दूध उत्पादन आहार पशुु की वह मात्रा है जिसे कि पशु को जीवन निर्वाह के लिए दिए जाने वाले आहार के अतिरिक्त उसके दूध उत्पादन के लिए दिया जाता है। इसमें स्थानीय गाय के लिए प्रति 2.5 किलो दूध के उत्पादन के लिए जीवन निर्वाह आहार के अतिरिक्त 1 किलो दाना देना चाहिए जबकि संकर/देशी दुधारू गायों/भैंसों के लिए यह मात्रा प्रति 2 किलो दूध के लिए दी जाती है। यदि हरा चारा पर्याप्त मात्रा में उपलब्ध है तो हर 10 किलो अच्छे किस्म के हरे चारे को देकर 1 किलो दाना कम किया जा सकता है। इससे पशु आहार की कीमत कम हो जाएगी और उत्पादन भी ठीक बना रहेगा। पशु को दुग्ध उत्पादन तथा आजीवन निर्वाह के लिए साफ पानी दिन में कम से कम तीन बार जरूर पिलाना चाहिए।

पशुओं का आहार तैयार करते समय निम्न बातों का ध्यान रखें:-
  • पशु की अवस्था के आधार पर शुष्क पदार्थ, प्रोटीन व कुल पाच्य तत्वों का निर्धारण करें।
  • शुष्क पदार्थ के आधार पर विभिन आहारिक पदार्थ जैसे दाना, हरा चारा, सूखा चारा आदि की मात्रा निर्धारित करें।
  • आहार रूचिकर होना चाहिए जिससे पशु आसानी से खा सके।
  • पशु के आवश्यक पोषक तत्व उचित अनुपात तथा मात्रा में उपलब्ध हों।
अवययों का नाम प्रतिशत

खलियां
(मूगंफली, सरसों, तिल, 25-35
बनौला, अलसी आदि की खलें)
मोटे अनाज
(गेहूं, जौ, मक्की, ज्वार आदि) 25-35
अनाज के बाई प्रोडक्ट्स
(चोकर, चून्नी, चावल की फक 10-30
आदि)
खनिज मिश्रण 1
आयोडीन युक्त नमक 2
विटामिन्स ए, डी.-3 का मिश्रण 20-30
ग्रा.प्रति
100 कि.

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