ड्रिप सिंचाई से कम पानी में हो रही फसल की अधिक पैदावार

Share

पन्ना। कृषि को लाभ का धन्धा बनाने के लिए शासन द्वारा विभिन्न योजनाएं चलाई जा रही हैं। जिनमें से एक उद्यानिकी विभाग अन्तर्गत संचालित ड्रिप सिंचाई योजना है। ड्रिप (टपक) सिंचाई पद्धति द्वारा खेती करने पर कम पानी में भी फसल की अधिक पैदावार प्राप्त की जा सकती है। खेती के लिए जल बहुत ही महत्वपूर्ण है। खेतों एवं बाग बगीचों में सीधे पानी लगाने याने सतही सिंचाई विधि से बहुमूल्य पानी का 60 प्रतिशत भाग किसी न किसी कारण से बरबाद हो जाता है। वही टपक सिंचाई को अपनाने से उत्पादन में डेढ गुना वृद्धि होने के साथ-साथ 70 प्रतिशत पानी की बचत भी होती है। इस पद्धति से सिंचाई करने से पानी केवल पौधों की जड़ों में ही पहुंचता है।
ऐसे ही कृषक श्री अजेन्द्र सिंह निवासी ग्राम मुराछ विकासखण्ड पन्ना बताते हैं कि उन्होंने अपनी जमीन के 2 हेक्टेयर में वर्ष 2014-15 में उद्यान विभाग की फल क्षेत्र विस्तार योजना के तहत आम का बगीचा लगवाया था। जिसमें उन्होंने आम की विभिन्न किस्मों जैसे दशहरी, सुंदरजा, आम्रपाली एवं लंगड़ा आमों के पेड़ लगाए थे। लगाए गए सभी पेड़ जीवित हैं। अब पेड़ काफी बड़े हो गए हैं और अच्छे फलन की ओर हैं। इसके अलावा कृषक अजेन्द्र ने 0.50 हेक्टेयर में केला टिशू कल्चर एवं 0.30 हेक्टेयर में पपीते की अन्तरवर्तीय खेती की है। इन्होंने वर्ष 2017-18 में प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना (पर ड्रॉप, मोर क्रॉप) अन्तर्गत उद्यानिकी विभाग से ड्रिप लगवाकर अपने आम के बगीचों और केले एवं पपीते के पौधों की सिंचाई कर रहे हैं।

Share
Advertisements

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *