मत्स्य पालन हो सकता है आमदनी बढ़ाने का जरिया

व्हाट्सएप या फेसबुक पर शेयर करने के लिए नीचे क्लिक करें

किसानों की आय बढ़ाने में मत्स्य पालन अपना विशेष योगदान दे सकता है। मत्स्य पालन में भारत चीन के बाद विश्व का दूसरा सबसे बड़ा उत्पादक देश है। देश में वर्ष 2015-16 में 107.9 लाख टन मत्स्य का उत्पादन हुआ जिसमें से 72.1 लाख टन अन्तरिक श्रोतों से हुआ तथा 35.8 लाख टन समुद्र से उत्पादित हुआ। यह विश्व के कुल उत्पादन का लगभग 6.3 प्रतिशत है। वर्ष 1990-91 में यह उत्पादन मात्र 38.4 लाख टन था। पिछले 15-16 वर्षों में इसमें लगभग 2.8 गुना वृद्धि हुई है। वर्ष 1980 में जहां कुल मत्स्य उत्पादन का मात्र 34 प्रतिशत आन्तरिक मीठे पानी के श्रोतों से लिया जाता था वह अब इन श्रोतों से कुल उत्पादन का 80 प्रतिशत तक पहुंच गया है। आन्तरिक श्रोतों में बांधों का 31.5 लाख हेक्टेयर, पोखरों व तालाबों का 23.6 लाख हेक्टेयर, खारे पानी का 12.4 लाख हेक्टेयर तथा नदियों व नहरों का 1.9 लाख हेक्टेयर क्षेत्र सम्मिलित है। देश में समुद्र से मत्स्य उत्पादन के लिए 8118 किलोमीटर तटीय क्षेत्र उपलब्ध है जिसके 20.2 लाख वर्ग किलोमीटर क्षेत्र से मछली पकड़ी जाती है। इस तटीय क्षेत्र में 1537 मत्स्य केन्द्र हैं और 3432 गांवों में मछुवारे बसते हैं। देश में मत्स्य उत्पादन क्षेत्र में एक करोड़ पैंतालीस लाख लोग लगे हुए हैं। वर्ष 2015-16 में मत्स्य के निर्यात से देश को 30420.83 करोड़ रुपये की विदेशी मुद्रा प्राप्त हुई। मत्स्य पालन देश की कृषि की कुल आमदनी का 5.34 प्रतिशत योगदान देता है।
मध्य प्रदेश में पानी के श्रोतों के रूप में 3.56 लाख हेक्टेयर क्षेत्र उपलब्ध है। मध्यप्रदेश में जहां वर्ष 2007-08 में मत्स्य उत्पादन 63.89 हजार टन था वह वर्ष 2016-17 में बढ़कर मात्र 115.01 हजार टन तक ही पहुंच पाया। राजस्थान में जहां मत्स्य पालन की कम सम्भावना है वहां मत्स्य उत्पादन 25.70 हजार टन (2007-08) से बढ़कर 2016-17 में 42.46 हजार टन ही पहुंच पाया। इस क्षेत्र के तीन राज्यों में मत्स्य पालन में छत्तीसगढ़ की प्रगति सबसे सराहनीय रही। छत्तीसगढ़ में वर्ष 2007-08 में मत्स्य उत्पादन जहां 139.37 हजार टन था पिछले दस वर्षों में बढ़कर यह वर्ष 2016-17 में 342.29 हजार टन तक पहुंच गया। पिछले 10 वर्षों में इसमें 2.45 गुना वृद्धि हुई है, जबकि मध्य प्रदेश में यह 1.64 गुना व राजस्थान में 1.65 गुना ही रही जबकि देश का इन वर्षों का औसत मात्र 1.50 गुना ही रहा।
मध्य प्रदेश, राजस्थान में किसानों के पास अपने स्वयं के पानी के श्रोत नगण्य हैं जहां वह मत्स्य उत्पादन कर सकें। परन्तु लगभग प्रत्येक गांव में सामूहिक पोखर, तालाब उपलब्ध हैं जहां सामूहिक रुप से किसान मत्स्य उत्पादन कर सकते हैं। इसके लिए प्रयास किये जाने चाहिए जिससे किसान की आमदनी बढ़ सके। सरकार के अगले पांच साल में किसान की आमदनी दुगनी करने के प्रयासों में मत्स्य पालन अपना योगदान दे सकता है।

व्हाट्सएप या फेसबुक पर शेयर करने के लिए नीचे क्लिक करें
Advertisements

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

two × 5 =

Open chat
1
आपको यह खबर अपने किसान मित्रों के साथ साझा करनी चाहिए। ऊपर दिए गए 'शेयर' बटन पर क्लिक करें।