यूरोपीय संघ के देशों ने लगाया हानिकारक कीटनाशकों पर प्रतिबंध

Share this

तितलियों, मधुमक्खियों पर संकट से होगा परागण का अभाव

बर्लिन। भारत में जहां कीटनाशकों का प्रयोग धड़ल्ले से होता है वहीं यूरोपीय देशों में तितलियों, मधुमक्खियों और भौरों की आबादी पर संकट मंडराते ही यूरोपीय संघ (ईयू) से जुड़े 28 देशों ने बहुमत से हानिकारक कीटनाशकों पर प्रतिबंध लगाने का फैसला किया है। ईयू में हुई इस मतदान के बाद 2018 के अंत से यूरोपीय देशों में कीटनाशकों का इस्तेमाल बंद कर दिया जाएगा।

पिछले कुछ वर्षों में दुनिया भर के भीतर तितलियों, भौंरों और मधुमक्खियों की आबादी चिंताजनक ढंग से कम हुई है। यह विनाश का संकेत है, क्योंकि इसका सीधा असर फसलों और फलों के सामान्य उत्पादन पर पड़ा है। चूंकि तितलियां, भौंरे या मधुमक्खियां परागण का काम करते हैं और यही काम रुक रहा था, जबकि उपज पैदा करने वाले पेड़-पौधों की मात्रा पर्याप्त पाई गई। ससेक्स यूनिवर्सिटी में बायोलॉजी के प्रोफेसर डेव गालसन ने कहा, लैब और खेतों पर शोधों से ऐसे ढेरों सबूत मिले हैं जो साबित करते हैं कि नियोनिकोटिनॉयड्स तितलियों, एक्वेटिक कीटों और कीट खाने वाले पक्षियों की घटती संख्या उपज का उत्पादन रोक रही है। उन्होंने कहा कि यूरोपीय संघ का फैसला तार्किक है।

2013 में उपज बढ़ाने में मददगार कीटों को मारने वाले कीटनाशकों पर आंशिक प्रतिबंध लगाया जा चुका है, लेकिन पहली बार 28 देशों ने पूर्ण प्रतिबंध लगाया है। यूरोपीय संघ के इस प्रतिबंध से स्विटजरलैंड की बड़ी एग्रो कंपनी सिंजेंटा ने निराशा जताई, लेकिन ईयू ने वैज्ञानिक तथ्यों को आधार मानते हुए बहुमत से फैसला लिया। यूरोप के वैज्ञानिकों ने अपनी समीक्षा के बाद पाया था कि तितलियों, भौंरों, मधुमक्खियों या अन्य कीटों की घटती आबादी के लिए कीटनाशक जिम्मेदार हैं और यदि जल्द कदम नहीं उठाए गए तो परागण के अभाव में खाद्य संकट खड़ा हो सकता है। मतदान के बाद यूरोपीय कमीशन आगामी सप्ताहों में इस फैसले को अमल में लाएगा। प्रतिबंधित कीटनाशकों का इस्तेमाल केवल ग्रीनहाऊस या पॉलीहाऊस फार्मों के भीतर ही किया जा सकेगा जहां मक्खियां नहीं होती हैं। इस मुद्दे को लेकर यूरोप में एवाज समूह ने बड़ा अभियान छेड़ा था, जिसकी पदाधिकारी एंटोनिया स्टाट्स ने प्रतिबंध के फैसले को एक बड़ी कामयाबी बताया और कहा कि आखिरकर हमारी सरकारें सुन रही हैं।

Share this
Advertisements

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

9 − 9 =

Open chat
1
आपको यह खबर अपने किसान मित्रों के साथ साझा करनी चाहिए। ऊपर दिए गए 'शेयर' बटन पर क्लिक करें।