सरसों में रोगों की रोकथाम कैसे करें।
समाधान सरसों में प्रमुख रूप से काले धब्बे वाला रोग, सफेद रतुआ, डाऊनी मिल्ड्यू तथा तना गलन प्रमुख हैं। फसल पर काला धब्बा, सफेद रतुआ या डाऊनी मिल्डयू रोग दिखते ही, डाइथेन एम-45 के 0.2 प्रतिशत घोल का छिड़काव करना
सरसों की खेती से जुड़ी ताज़ा खबरें, उन्नत एवं अधिक उपज देने वाली किस्में, बुआई का समय, बीज दर, सिंचाई, उर्वरक प्रबंधन, कीट एवं रोग नियंत्रण, कटाई, भंडारण और उत्पादन बढ़ाने की आधुनिक तकनीकों की जानकारी यहां प्राप्त करें। सरसों की खेती के लिए विशेषज्ञ सलाह और नवीनतम कृषि अपडेट भी पढ़ें।
समाधान सरसों में प्रमुख रूप से काले धब्बे वाला रोग, सफेद रतुआ, डाऊनी मिल्ड्यू तथा तना गलन प्रमुख हैं। फसल पर काला धब्बा, सफेद रतुआ या डाऊनी मिल्डयू रोग दिखते ही, डाइथेन एम-45 के 0.2 प्रतिशत घोल का छिड़काव करना
समाधान– राई भी सरसों की तरह तिलहनी फसल है आमतौर पर लोग गेहूं के साथ इसके दाने फेंक देते हैं या गेहूं के साथ मिले दाने स्वयं ऊग जाते हैं। आप राई निम्न तरीके से लगायें। भूमि की तैयारी अन्य
समाधान – वर्तमान में वर्षा की स्थिति को देखते हुए और भूमि में नमी के समाप्त होने के डर से कृषकों के मन मेें विचार आना स्वाभाविक ही है कि रबी की कुछ फसलें जल्दी ही लगा ली जायें परंतु
माहो – सरसों का माहू या चैंपा, लिपेफिस इरिसामी: यह कीट छोटा, कोमल, सफेद, हरे रंग का होता है। इस कीट के शिशुु एवं प्रौढ़ दोनों पौधे के विभिन्न भाग से रस चूसते है। यह प्राय: दिसंबर के अंत से
भारत एक जादू के लिए तैयार है-निम्न स्तर के गुणसूत्रीय बदलाव वाली जीएम मस्टर्ड (सरसों) से पैदावार बढ़ोत्तरी का जादू। शायद भारतीय वैज्ञानिकों का ये कोई रोप ट्रिक यानि रस्सी वाला जादू है। मैंने दुनिया में कहीं भी बदतर किस्म
– मनमोहन मौर्य, बम्होरी समाधान– सरसों की फसल वर्तमान में फूल-फली की अवस्था में चल रही है इस मौके पर कीट/रोग के आक्रमण पर निरीक्षण और उपाय तत्परता से किया जाना जरूरी होगा। आप निम्न बातों पर ध्यान दें। निचली
माहू या चैंपा, लिपेफिस इरिसामी: यह कीट छोटा, कोमल,सफेद, हरे रंग का होता है। इस कीट के शिशु एवं प्रौढ़ दोनों पौधे के विभिन्न भाग से रस चूसते है। यह प्राय: दिसंबर के अंत से लेकर फरवरी के अंत तक
बीज उत्पादक कम्पनियों की संकर एवं उन्नत किस्में कंपनी किस्में सरसों महिको महिको बोल्ड, श्रद्धा आर्या संपदा, विशाखा नाथ बायोजीन नाथ सोना-212, सुपर सोना नुजीवीडू सीड्स एनएसएमएसएच 135, 4, आरएच 30, टी9, जम्बो 1, 2,
ओरोबैंकी:- ओरोबैंकी या आग्या या बादा या हड्डा (बु्रमरेप) की जातियां पूर्ण रूप से मूल परजीवी होती हैंं। यह विभिन्न फसलों पर आक्रमण करती हैं जिसमें सरसों, बैंगन, टमाटर, तम्बाकू, फूलगोभी, पत्तागोभी, शलजम और कई सोलोनेसी तथा क्रुसीफेरी कुल के
प्रमुख नाशीजीव ( प्रमुख कीट एवं रोग) चेपा/माहू – यह कीट छोटा, कोमल, सफेद-हरे रंग का होता है। इस कीट के शिशु एवं प्रौढ़ दोनों पौधों के विभिन्न भागों से रस चूसते हैं। यह प्राय: दिसम्बर के अन्त से लेकर