चने की प्रमुख बीमारियां एवं रोकथाम
बीमारियाँ :- चने की उकठा रोग :- यह एक मृदोढ़ व बीजोढ रोग है, जो कि फ्यूजेरियम आक्सीस्पोरम नामक फफूंद से होती है। संक्रमण :- रोगजनक फसल के अवशेषों व बीजों में 3-5 साल तक जीवित रहते हैं तथा बुवाई
चने की खेती से जुड़ी ताज़ा खबरें, उन्नत एवं अधिक उपज देने वाली किस्में, बुआई का समय, बीज दर, सिंचाई, उर्वरक प्रबंधन, कीट एवं रोग नियंत्रण, खरपतवार प्रबंधन, कटाई और उत्पादन बढ़ाने की आधुनिक तकनीकों की जानकारी यहां प्राप्त करें। चना उत्पादक किसानों के लिए विशेषज्ञ सलाह, बाजार रुझान और नवीनतम कृषि अपडेट भी पढ़ें।
बीमारियाँ :- चने की उकठा रोग :- यह एक मृदोढ़ व बीजोढ रोग है, जो कि फ्यूजेरियम आक्सीस्पोरम नामक फफूंद से होती है। संक्रमण :- रोगजनक फसल के अवशेषों व बीजों में 3-5 साल तक जीवित रहते हैं तथा बुवाई
23 अक्टूबर 2020, शाजापुर।चने की बुवाई रेज्ड बेड पद्धति से करें – शाजापुर कृषि विज्ञान के वैज्ञानिक डॉ एस.एस. धाकड ने बताया कि चने की बुवाई का उचित समय चल रहा है। किसान भाई बुवाई करते समय अनुषंसित प्रजातियां आर.व्ही.के.जी-101.
25 सितंबर 2020, टिकमगढ़। सीमित सिंचाई में कैसे करें चने की खेती – कृषि विज्ञान केन्द्र, टीकमगढ़ के वरिष्ठ वैज्ञानिक एवं प्रमुख डॉ. बी. एस. किरार, डॉ. आर. के. प्रजापति एवं डॉ. यू. एस. धाकड़ वैज्ञानिकों द्वारा बताया गया की
चने की नई किस्म जे.जी. 12 का बीज उपलब्ध – कृषि विज्ञान केन्द्र, टीकमगढ़ में सीड हब कार्यक्रम के अन्तर्गत चना की नई किस्म (जे.जी.-12) अधिक उत्पादन क्षमता (22-25 क्विं./हे.) एवं उकठा निरोधक किस्म है। वैज्ञानिकों ने क्षेत्र में किसानों
चने का उपार्जन 30 जून तक होगा : श्री पटेल 22 जून 2020, भोपाल। चने का उपार्जन 30 जून तक होगा : श्री पटेल – किसान कल्याण तथा कृषि विकास मंत्री श्री कमल पटेल ने निर्देशित किया है कि चने
मध्यप्रदेश में प्रति हेक्टेयर 20 क्विंटल होगा चने और सरसों का उपार्जन
राजस्थान में समर्थन मूल्य पर खरीद