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राज्य कृषि समाचार (State News)

बिहार के नालंदा में युवा किसान ने रंग-बिरंगी सब्जियों से बदली किस्मत, सालाना मुनाफा 15 लाख रुपये

01 अक्टूबर2026, नालंदा: बिहार के नालंदा में युवा किसान ने रंग-बिरंगी सब्जियों से बदली किस्मत, सालाना मुनाफा 15 लाख रुपये – बिहार के नालंदा जिले के नूरसराय प्रखंड स्थित मनारा गांव के युवा किसान गौरव रंजन ने परंपरागत खेती छोड़कर रंग-बिरंगी सब्जियां और स्ट्रॉबेरी उगाना शुरू किया और आज वे सालाना करीब 15 लाख रुपये का मुनाफा कमा रहे हैं। इसके साथ ही उन्होंने गांव के करीब 20 लोगों को भी रोजगार दिया है।

गौरव रंजन ने साल 2023 में सिर्फ चार कट्ठे जमीन से खेती की शुरुआत की थी। आज वे करीब आठ एकड़ में हरी, लाल और पीली शिमला मिर्च, बीज रहित खीरा और रंगीन फूलगोभी जैसी सब्जियां उगा रहे हैं।

परंपरागत खेती से हटकर नकदी फसलों की ओर

गौरव बताते हैं कि जिले में ज्यादातर किसान धान और गेहूं जैसी परंपरागत फसलों पर ही निर्भर रहते हैं, जिनमें मुनाफा सीमित रहता है। उन्होंने बाजार में मांग को देखते हुए रंग-बिरंगी शिमला मिर्च और स्ट्रॉबेरी जैसी नकदी फसलों पर दांव लगाने का फैसला किया।

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उनकी खेती से अकेले शिमला मिर्च से सालाना 6 से 7 लाख रुपये, स्ट्रॉबेरी से करीब 2 लाख रुपये और खीरे से 1 लाख रुपये से ज्यादा की आमदनी होती है। बाकी आय अन्य सब्जियों और फूलगोभी से आती है।

गौरव कहते हैं, “कृषि क्षेत्र में काफी संभावनाएं हैं। किसानों को पारंपरिक खेती के साथ नकदी फसलों पर भी प्रयोग करना चाहिए।”

गांव के 20 लोगों को मिला रोजगार

खेती के विस्तार के साथ गौरव ने गांव के करीब 20 लोगों को भी काम पर रखा है, जिन्हें हर महीने 8 से 10 हजार रुपये तक मजदूरी मिलती है। इससे गांव के युवाओं को खेती के मौसम में पलायन किए बिना ही स्थानीय स्तर पर रोजगार मिल रहा है।

उनकी उपज स्थानीय मंडियों के अलावा शहर के बड़े बाजारों में भी बिकती है, जहां रंग-बिरंगी सब्जियों की अच्छी कीमत मिलती है। गौरव अब पॉलीहाउस और ड्रिप सिंचाई जैसी आधुनिक तकनीकों में और निवेश करने की योजना बना रहे हैं ताकि पैदावार और बढ़ाई जा सके।

गौरव की खेती की खास बात यह है कि उन्होंने रंग-बिरंगी सब्जियों के लिए बाजार पहले खोजा, उसके बाद ही खेती का रकबा बढ़ाया। शुरुआत में सिर्फ चार कट्ठे में शिमला मिर्च की एक-दो किस्में लगाई गई थीं, ताकि बाजार की प्रतिक्रिया समझी जा सके। मांग बढ़ने के बाद उन्होंने धीरे-धीरे रकबा आठ एकड़ तक बढ़ाया।

पीली, लाल और हरी शिमला मिर्च, बीज रहित खीरा और रंगीन फूलगोभी जैसी किस्में आमतौर पर सामान्य सब्जियों के मुकाबले बाजार में बेहतर दाम दिलाती हैं, क्योंकि इनकी मांग बड़े शहरों में तेजी से बढ़ रही है। यही वजह है कि गौरव ने परंपरागत धान-गेहूं की जगह इन नकदी फसलों को चुना।

गौरव रंजन की कहानी बताती है कि कम जमीन से भी सही फसल चुनकर और बाजार की मांग को समझकर बड़ी कमाई की जा सकती है। खासकर बिहार जैसे राज्य में, जहां जोत का आकार छोटा है, ऐसे मॉडल छोटे किसानों के लिए प्रेरणा बन सकते हैं और स्थानीय स्तर पर रोजगार भी पैदा कर सकते हैं।

शहरों में बढ़ती आमदनी के साथ रंग-बिरंगी और विदेशी दिखने वाली सब्जियों की मांग भी लगातार बढ़ रही है, जिसका सीधा फायदा गौरव जैसे किसानों को मिल रहा है। बीज, पॉलीहाउस और ड्रिप सिंचाई उपकरण बनाने वाली कंपनियों के लिए भी बिहार जैसे राज्यों में ऐसी सफल कहानियां नए बाजार खोलने का काम करती हैं, क्योंकि इन्हें देखकर आसपास के किसान भी नकदी फसलों की तरफ रुख कर सकते हैं।

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