राज्य कृषि समाचार (State News)

सोयाबीन फसल में पीला मोजेक का प्रकोप, IARI वैज्ञानिकों ने खेतों में पहुंचकर किसानों को बताए बचाव के उपाय

09 सितंबर 2026, भोपाल: सोयाबीन फसल में पीला मोजेक का प्रकोप, IARI वैज्ञानिकों ने खेतों में पहुंचकर किसानों को बताए बचाव के उपाय – कृषि रोडमैप के तहत किसानों को फसल सुरक्षा की तकनीकी जानकारी देने के लिए कृषि वैज्ञानिकों और विभागीय अमले द्वारा खेतों का निरीक्षण और प्रशिक्षण कार्यक्रम किए जा रहे हैं। इसी क्रम में IARI नई दिल्ली के कृषि वैज्ञानिकों और कृषि विभाग विदिशा की टीम ने विकासखंड विदिशा के ग्राम हसुआ में सोयाबीन और उड़द की फसल का निरीक्षण किया। इस दौरान सोयाबीन में पीला मोजेक, सोयाबीन मोजेक और पत्ती खाने वाली इल्ली समेत अन्य कीट-रोगों की स्थिति देखी गई। निरीक्षण में एसएडीओ रूपेश वाघेल, प्रभारी एसएडीओ विशाल यादव तथा IARI के कृषि वैज्ञानिक डॉ. लक्ष्मण प्रसाद, गगन कुमार महापात्रा और नफीस अहमद शामिल रहे। वैज्ञानिकों ने किसानों के साथ खेतों का भ्रमण कर फसलों की स्थिति देखी और उनकी समस्याओं पर चर्चा की।

40 किसानों को दिया तकनीकी प्रशिक्षण

खेत निरीक्षण के बाद ग्राम पंचायत हसुआ के पंचायत भवन में करीब 40 किसानों के लिए प्रशिक्षण आयोजित किया गया। वैज्ञानिकों ने पीला मोजेक, सोयाबीन मोजेक, पत्ती खाने वाली इल्ली सहित अन्य रोगों और कीटों की पहचान तथा उनके नियंत्रण के उपाय बताए। वैज्ञानिकों ने किसानों को सलाह दी कि रोग या कीट के लक्षण दिखाई देते ही कृषि विशेषज्ञों से संपर्क करें और केवल अनुशंसित मात्रा में कीटनाशक एवं फफूंदनाशक का इस्तेमाल करें।

राइजोक्टोनिया एरियल ब्लाइट से बचाव

वैज्ञानिकों ने बताया कि राइजोक्टोनिया एरियल ब्लाइट की शुरुआत पत्तियों पर पानी जैसे दाग से हो सकती है। नियंत्रण नहीं होने पर पौधे सूख सकते हैं। लक्षण दिखाई देने पर फ्लूक्सापायरोक्साड + पायराक्लोस्ट्रोबीन 300 मिलीलीटर प्रति हेक्टेयर या पायराक्लोस्ट्रोबीन + एपॉक्सीकोनाजोल 750 मिलीलीटर प्रति हेक्टेयर की अनुशंसित मात्रा में छिड़काव की सलाह दी गई।

पीला मोजेक में रोगग्रस्त पौधे निकालने की सलाह

पीला मोजेक या सोयाबीन मोजेक के लक्षण दिखाई देने पर शुरुआती अवस्था में ही रोगग्रस्त पौधों को उखाड़कर खेत से बाहर निकालने को कहा गया। वैज्ञानिकों के अनुसार सफेद मक्खी और एफिड जैसे वाहक इन रोगों के फैलाव में भूमिका निभाते हैं। इनके नियंत्रण के लिए थायोमेथोक्सम + लैम्ब्डा-साइहेलोथ्रिन 125 मिलीलीटर, बीटासाइफ्लूथ्रिन 350 मिलीलीटर या एसिटामिप्रिड 25% + बाइफेंथ्रिन 25% WG 250 ग्राम प्रति हेक्टेयर की अनुशंसित मात्रा के उपयोग की जानकारी दी गई। सफेद मक्खी की निगरानी के लिए खेत में पीले स्टिकी ट्रैप लगाने की सलाह भी दी गई।

पत्ती खाने वाली इल्ली और एंथ्रेक्नोज पर भी सलाह

पत्ती खाने वाली तंबाकू की इल्ली और अन्य पत्तीभक्षी इल्लियों के नियंत्रण के लिए क्लोरेंट्रानिलिप्रोल 18.5 एससी 150 मिलीलीटर, स्पाइनोटेरम 11.7 एससी 450 मिलीलीटर या इमामेक्टिन बेंजोएट 1.9 एसजी जैसे अनुशंसित विकल्पों की जानकारी दी गई। वहीं एंथ्रेक्नोज रोग की स्थिति में कार्बेन्डाजिम 12% + मैन्कोजेब 63% डब्ल्यूपी 1.25 किलोग्राम प्रति हेक्टेयर की अनुशंसित मात्रा के उपयोग की जानकारी दी गई।

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