गेहूं निर्यातकों को मिलेंगी सुविधायें

Share

कृषकों को होगा लाभ

Cm Chouhan

5 अप्रैल 2022, भोपाल ।  गेहूं निर्यातकों को मिलेंगी सुविधायें – रूस-यूके्रन युद्ध के चलते विश्व बाजार में भारत के गेहूं की मांग बढ़ गई है। देश में गेहूं का विपुल भंडार मौजूद है तथा इस वर्ष 2021-22 में भी देश में 111.32 मिलियन टन तथा म.प्र. में 333 लाख 96 हजार मीट्रिक टन गेहूं उत्पादन का अनुमान लगाया गया है। वहीं केन्द्र ने प्रदेश से 129 लाख मीट्रिक टन गेहूं एमएसपी पर खरीदने का लक्ष्य रखा है। इसे देखते हुए प्रदेश सरकार हरकत में आ गई है। निर्यात की संभावनाएं तलाशी जा रही हैं। देश एवं प्रदेश की मंडियों में भी किसानों को गेहूं के ऊंचे दाम मिल रहे हैं जो इस वर्ष के समर्थन मूल्य 2015 से कहीं अधिक हैं। गेहूं के बम्पर उत्पादन अनुमान के चलते प्रदेश के मुख्यमंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान निर्यातकों को कई सुविधाएं देने की घोषणा कर उनके साथ दिल्ली, भोपाल में बैठक कर चुके हैं। ऊंची कीमतों पर गेहूं निर्यात से किसानों के साथ-साथ देश-प्रदेश को भी लाभ होगा।

मुख्यमंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान ने गत सप्ताह मंत्रालय में हुई उच्च स्तरीय बैठक में कहा है कि वर्तमान में विश्व बाजार में गुणवत्ता पूर्ण गेहूं की मांग को पूरा करने के लिए राज्य सरकार निर्यातकों को सभी सुविधाएं उपलब्ध करवाएगी। मध्यप्रदेश का गेहूं एमपी व्हीट के नाम से जाना जाता है। वर्तमान में उच्च निर्यात क्षमता के देशों जैसे इजिप्ट, टर्की, अल्जीरिया, नाइजीरिया, तंजानिया आदि के बाजारों तक भारतीय एम्बेसी के सहयोग से पहुँच बनाने के प्रयास किए जा रहे हैं। विभिन्न पोर्ट ट्रस्ट गेहूं के निर्यात के लिए तात्कालिक भण्डारण के प्रबंध और गेहूं के जहाजों को प्राथमिकता के लिए सहमत है। उच्च पदस्थ सूत्रों के मुताबिक निर्यातक को निर्यात की मात्रा पर भुगतान की जाने वाली मंडी फीस की प्रतिपूर्ति मध्यप्रदेश सरकार करेगी। वर्तमान में समितियां एवं व्यापारी किसान से जो गेहूं खरीदते हंै इसके लिए उन्हें 100 रुपये की खरीदी पर 1.50 रुपये मंडी टैक्स देना पड़ता है, मतलब 1 करोड़ रुपये की उपज खरीदी पर 1.50 लाख रुपये मंडी टैक्स लगता है। यह टैक्स निर्यातक को नहीं लगेगा। भारत से गेहूं और अन्य उत्पादों का निर्यात सभी के लिए लाभदायक है। रेल मंत्रालय आवश्यक रैक उपलब्ध करवाएगा। मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री श्री मोदी भारत से 400 बिलियन डॉलर के वाणिज्यिक निर्यात के लक्ष्य को लेकर प्रयासरत हैं।

मध्यप्रदेश का गोल्डन व्हीट

मध्यप्रदेश के शरबती गेहूं और अन्य किस्मों की अलग पहचान है। इस वर्ष भी गेहूं का बम्पर स्टाक उत्पादन हो रहा है। मध्यप्रदेश गेहूं उत्पादन में देश का दूसरा सबसे बड़ा उत्पादक राज्य है। गत 6 माह में गेहूं की विशेष किस्मों लोकवन, शरबती, मालवा शक्ति, सुजाता की खरीदी किसानों से मंडियों में की गई। प्रदेश की जलवायु और यहाँ की मिट्टी के कारण इसे सोने के दानों जैसा गेहूं कहा जाता है। शरबती गेहूं एवं डयूरम (कठिया) गेहूं की काफी ज्यादा मांग है।

विश्व बाजार में भारत के गेहूं की मांग

भारत में विपणन वर्ष 2022-23 के लिए गेहूं का न्यूनतम समर्थन मूल्य 2015 रुपए प्रति क्विंटल है। लेकिन पिछले करीब एक पखवाड़े से गेहूं की कीमतें लगातार ऊपर बनी हुई हैं। अमेरिकी कृषि विभाग के आंकड़ों के मुताबिक रुस दुनिया में दूसरा सबसे बड़ा गेहूं निर्यातक है, जबकि यूक्रेन इस मामले में चौथे नंबर पर है। यूक्रेन से गेहूं खरीदने वाले देशों में पाकिस्तान और बांग्लादेश से लेकर कई खाड़ी के देश भी शामिल हैं। युद्ध के चलते इन दोनों देशों में कारोबार ठप होने से दुनियाभर के निर्यातक गेहूं की मांग को पूरा करने लिए जिन देशों में संभावनाएं तलाश रहे हैं उनमें भारत भी है। विश्व बाजार में गेहूं की मांग बढऩे से भाव भी बढ़ गए हैं। यूक्रेन संकट के पहले विश्व बाजार में भारतीय गेहूं का रेट 300-310 डॉलर प्रति टन था जो बढ़कर 360 डॉलर प्रति टन तक पहुंच गया है। संभावना है कि अगले कुछ दिनों में ये 400 डॉलर प्रति टन पहुंच जाएगा।

मंडियों में ज्यादा कीमत

प्रदेश की मंडियों गेहूं की आवक जोरों पर है। इस वर्ष के एमएसपी 2015 से 500 से 800 रुपये अधिक कीमत पर व्यापारी गेहूं खरीद रहे हैं। गत सप्ताह शरबती गेहूं प्रदेश की मंडियों में 3500 से 4000 रुपये प्रति क्विंटल तक बिका। वर्तमान में औसतन 2200 से 2800 रुपये प्रति क्विंटल भाव मिल रहा है। जैसे गुना मंडी में 2445, रतलाम में 2400, सीहोर में 2395 एवं विदिशा मंडी में 2641 रुपये प्रति क्विंटल गेहूं की खरीदी हुई है।

मध्य प्रदेश सरकार देगी सुविधाएँ

मध्यप्रदेश सरकार निर्यातकों को आवश्यक सुविधा उपलब्ध करवाएगी। राज्य सरकार की मंशा है कि मुख्य निर्यातक मध्यप्रदेश से जुड़ जाएं। भारत सरकार के सभी संबंधित मंत्रालय, रेलवे, पोर्ट ट्रस्ट, भारतीय दूतावास, गेहूं के रिकॉर्ड निर्यात के लिए प्रयासरत हैं। गेहूं निर्यात प्रोत्साहन के लिए मध्यप्रदेश के गेहूं के निर्यात पर निर्यातकों को मंडी शुल्क की वास्तविक प्रतिपूर्ति के अलावा प्रदेश में क्लीनिंग, ग्रेडिंग, सॉर्टिंग कर निर्धारित वैरायटी का गेहूं ग्रेड ‘ए’ और ‘बी’ के मानक अनुसार किसानों से खरीद कर निर्यात करने पर ग्रेडिंग और सॉर्टिंग में लगने वाले खर्च की निर्यातक को प्रतिपूर्ति, भंडारित अतिरिक्त गेहूं के स्टाक का प्राथमिकता से निर्यात, प्रदेश के शासकीय गोदामों को उपलब्ध करवाने पर बैठक में चर्चा हुई है। इसके साथ ही प्रदेश के गेहूं के निर्यात के लिए नवीन अंतर्राष्ट्रीय बाजार विकसित करने के लिए विदेश मंत्रालय,  एपीडा और मध्यप्रदेश शासन द्वारा विभिन्न देशों से समन्वय कर दीर्घकालिक व्यापार अनुबंध की कार्यवाही पर हुई चर्चा सार्थक होगी।

महत्वपूर्ण खबर: बाड़मेर पशु मेले में कृषि मंत्री द्वारा ‘मेरी पॉलिसी मेरे हाथ’ अभियान में फसल बीमा पालिसी वितरण

Share
Advertisements

Leave a Reply

Your email address will not be published.