सच्चे किसान हक़ीक़त से अनजान, अन्य ने संभाला मैदान

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10 दिसम्बर 2020, इंदौर। सच्चे किसान हक़ीक़त से अनजान, अन्य ने संभाला मैदानकेंद्र सरकार द्वारा बनाए गए तीन नए कृषि कानूनों को लेकर दिल्ली में किसान आंदोलनरत हैं l सरकार से पांच दौर की वार्ता के बाद भी नतीजा नहीं निकला है l आंदोलनकारी किसान तीनों बिल वापस करने की मांग पर अड़े हैं तो , दूसरी तरफ सरकार उचित सुझावों पर संशोधन करने को तैयार है l इसी रस्साकशी के बीच कृषक जगत ने म.प्र. के किसानों के विचार जानने के लिए दूरभाष पर चर्चा की तो खुलासा हुआ कि बिल की वास्तविकता से कई किसान इस बिल के नफे -नुकसान से अनजान हैं l असली किसान तो खेतों में रबी कार्यों में जुटा है , वहीं अन्य ने दिल्ली में मैदान संभाल रखा है l

अजड़ावदा जिला उज्जैन के उन्नत कृषक और किसान नेता श्री योगेंद्र कौशिक ने कृषक जगत को बताया कि अनुबंध खेती की शुरुआत तो पंजाब की तत्कालीन मुख्यमंत्री राजिंदर कौर ने की थी l पंजाब में आलू आदि फसलों की खेती अनुबंध पर की जा रही है l कृषि बिल को लेकर भ्रम फैलाया जा रहा है l इस कृषि बिल में किसान की ज़मीन का पूर्ण संरक्षण के साथ अनुबंध खेती में किसान को करार तोड़ने का भी अधिकार दिया गया है l नए कानून में एमएसपी और मंडियां बंद होने का कोई जिक्र नहीं किया गया है l कहीं एफसीओ के बिचौलियों द्वारा किसानों को भड़काया तो नहीं जा रहा है ? वहीं घाटली (इटारसी ) जिला होशंगाबाद के उन्नत किसान श्री शरद वर्मा ने कहा कि कांग्रेस का विरोध अनुचित है , क्योंकि वह खुद अपने कार्यकाल में कृषि संशोधन बिल लाई थी, लेकिन पारित नहीं करा सकी l किसानों का माल विदेश नहीं जाएगा तो पैसा कहाँ से आएगा ? किसानों को अपनी उपज की गुणवत्ता बढ़ाने पर ध्यान देना होगा l नए कानून में बिचौलिए हटेंगे तो किसानों के साथ -साथ उपभोक्ताओं का भी फायदा होगा l

भा.कि. सं. इंदौर के जिलाध्यक्ष श्री कृष्णपालसिंह राठौर ने स्पष्ट कहा कि कृषि कानूनों में सुधारों की मांग से शुरू हुए इस आंदोलन में अब तीनों कानूनों को वापस करने की मांग की जा रही है lपूरे आंदोलन का देश विरोधी ताकतों ने अपहरण कर लिया है, इसलिए अब यह किसान आंदोलन नहीं रहा l राजनीतिक पार्टियां स्वार्थ के लिए एकत्रित हुई हैं l संघ ने अध्यादेश के समय ही 4 बिंदुओं में सुधार की मांग की थी l सरकार को न्यूनतम समर्थन मूल्य पर लिखित गारंटी देना चाहिए , संघ पूरा बिल वापस नहीं चाहता l उधर, अजयगढ़ जिला पन्ना के किसान श्री रामलखन पाल ने नए कृषि कानून से अनभिज्ञता ज़ाहिर कर एक अहम बात कही कि छोटे किसान को इससे ज्यादा लाभ नहीं होगा , क्योंकि उसे अपनी 2 -4 क्विंटल उपज स्थानीय स्तर पर ही बेचनी पड़ेगी l ज़रूरत के कारण वह उसे रोक भी नहीं सकता l रतलाम जिले के पिपलोदा के किसान श्री रघुवीर सिंह पंवार और उपलाई के श्री बृजपालसिंह सोलंकी ने आंदोलन का समर्थन करते हुए कहा कि बिचौलियों के बिना मंडी नहीं चलेगी l सरकारें बदलने के साथ ही बिचौलियों के चेहरे भी बदल जाएंगे l औषधियों फसलों के उत्पादक भाटखेड़ी (नीमच ) के श्री कमलाशंकर विश्वकर्मा ने कहा कि आंदोलनकारी किसान भेड़ चाल चल रहे हैं l अधिकांश किसानों को कृषि कानूनों की जानकारी ही नहीं है l राजनीतिक दृष्टि से विरोध का माहौल बनाया जा रहा है l किसान को अपनी उपज बेचने की आज़ादी रहेगी l दाम उचित मिलेगा, तो ही बेचेगा l अनुबंध खेती भी अनुकूल लगने पर ही की जाएगी l असली किसान खेतों में काम कर रहा है ,अन्य ने मैदान संभाल लिया है l किसान हमेशा उदारवादी रहा है l वह कभी अराजक नहीं हो सकता l यह कृषि बिल किसानों के हित में है l

पालसोड़ा (मंदसौर ) के श्री विनोद कुमार व्यास को नए कृषि कानून की जानकारी नहीं है , फिर भी उन्होंने सरल शब्दों में कहा कि किसानों को उसकी उपज का दाम उचित दाम मिलना चाहिए l बिचौलिए नहीं होंगे तो प्रतिस्पर्धा बढ़ेगी , इससे किसानों को लाभ होगा , वहीं श्री महेश मदारिया कारोदा (काछीबड़ौदा ) धार ने कहा कि नए कृषि कानून पर विचार मंथन नहीं किया इसलिए इस आंदोलन का समर्थन/विरोध का निर्णय नहीं ले पा रहा हूँ l लेकिन किसान को उपज बेचने की आज़ादी और मंडी से बिचौलियों को हटाना किसानों के हित में सही कदम है l उधर, दूरस्थ झाबुआ जिले की पेटलावद तहसील के किसान श्री नन्दलाल पाटीदार ने फसलों का न्यूनतम समर्थन मूल्य बढ़ाने की मांग करते हुए कहा कि किसान अपनी उपज कहीं भी बेच सकेगा तो उसे लाभ ही होगा l वहीं खवासा (झाबुआ ) के श्री प्रवेश चौहान ने कहा कि सरकारी मंडी बंद नहीं होना चाहिए और किसानों को ट्रैक्टर आदि में डीज़ल ज्यादा लगता है अतः सरकार को रियायती दाम पर पावती पर डीज़ल देने की व्यवस्था करनी चाहिए l इस आंदोलन को गलत बताते हुए कहा कि बिचौलियों को हटाना सही है l वहीं, हाल ही में अपने पिता को खोने के बाद खेती संभालने वाले 12 वीं के छात्र पिपलोदखुर्द (रुस्तमपुर ) जिला खंडवा के श्री विवेक नरेंद्र जाधव ने आंदोलन को सही बताया और कहा कि मक्का के दाम समर्थन मूल्य से नीचे बिकने से बहुत नुकसान हो रहा है l खाद -बीज भी महंगे मिलते हैं l ऋण की ब्याज दर भी 14 % होने से कई परेशानियों का सामना करना पड़ता है l जबकि खरगोन के सेवानिवृत्त ग्रा.कृ.वि .अ. श्री विनोद चौहान ने कृषि बिल के विरोध को सही बताया और किसानों की वास्तविक समस्याओं की ओर ध्यान आकर्षित कराते हुए कहा कि कपास की चुनवाई 5 -6 बार होती है l पहली बार की चुनाई के कपास का दाम अच्छा मिलता है ,जो शनैः -शनैः कम होता जाता है l ऐसे में सवाल यह है कि क्या नए कानून में कपास की आखिरी चुनाई तक एक ही भाव मिलेगा ? यही हाल सोयाबीन का है l ऐसे में दाम को लेकर विवाद से इंकार नहीं किया जा सकता l बिचौलियों की व्यवस्था तो होनी ही चाहिए l यदि खरीदार ने खरीदी से इंकार कर दिया तो छोटे किसान कहाँ जाएंगे ?

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