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राज्य कृषि समाचार (State News)

उज्जैन: पराली प्रबंधन में मिसाल बनकर उभरे विश्वजीत

15 अप्रैल 2026, उज्जैन: उज्जैन: पराली प्रबंधन में मिसाल बनकर उभरे विश्वजीत – जिले के ग्राम रुनीजा, ब्लॉक बड़नगर के प्रगतिशील किसान श्री विश्वजीत सिंह राठौर पिता श्री दिग्विजय सिंह राठौर , पिछले 3-4 वर्षों से नरवाई (पराली) प्रबंधन के क्षेत्र में पूरे क्षेत्र के लिए एक प्रेरणादायक मिसाल बनकर उभरे हैं।जबकि अधिकांश किसान फसल कटाई के बाद खेत में बची हुई नरवाई को आग लगा देते हैं। श्री विश्वजीत सिंह राठौर ने पर्यावरण की रक्षा, मिट्टी की उर्वरता संरक्षण और सतत कृषि के प्रति अपनी प्रतिबद्धता दिखाते हुए वैज्ञानिक एवं जैविक पद्धति अपनाई है।

श्री राठौर ने सबसे पहले रोटावेटर का उपयोग कर खेत में बिछी नरवाई को छोटे-छोटे टुकड़ों में काटकर मिट्टी के साथ मिला दिया। इसके बाद उन्होंने IFFCO के बायो-डीकंपोजर का प्रभावी उपयोग किया।डीकंपोजर घोल तैयार करने की विधि:IFFCO Bio-Decomposer की 1 बोतल को 200 लीटर पानी में 2 किलो गुड़ के साथ अच्छी तरह मिलाकर 5 से 7 दिनों तक छाया में रखा गया।तैयार घोल को खेत में नरवाई पर समान रूप से स्प्रे किया गया, जिसके बाद हल्की जुताई की गई। यह संपूर्ण प्रक्रिया 26 बीघा क्षेत्र में शासन की मंशा एवं कृषि विभाग की देखरेख में सफलतापूर्वक लागू की गई। जिससे नरवाई तेजी से सड़कर मिट्टी में मिल गयी, मिट्टी में जैविक कार्बन की मात्रा में उल्लेखनीय वृद्धि हुई,मिट्टी की नमी बनाए रखने की क्षमता बढ़ी, फसल उत्पादन में सकारात्मक सुधार दर्ज किया गया‌।

लगातार 3-4 वर्षों से इस जैविक तकनीक को अपनाने के कारण श्री विश्वजीत सिंह राठौर के खेत की मिट्टी की गुणवत्ता में निरंतर सुधार हो रहा है। उनकी यह सफलता सिद्ध करती है कि आधुनिक विज्ञान और जैविक विधियों का संयोजन खेती को न सिर्फ अधिक लाभकारी बना सकता है, बल्कि पर्यावरण अनुकूल और टिकाऊ भी बना सकता है।श्री विश्वजीत सिंह राठौर का यह प्रयास अन्य किसान भाइयों के लिए एक जीवंत उदाहरण है। उन्होंने साबित कर दिया है कि यदि किसान परंपरागत जलाने की बजाय वैज्ञानिक तरीके अपनाएं तो न सिर्फ पर्यावरण बचता है, बल्कि उनकी अपनी मिट्टी भी स्वस्थ और उपजाऊ बनी रहती है।

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