स्वच्छ दुग्ध उत्पादन तकनीक पर ग्रामीण पशुपालकों का प्रशिक्षण

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29 जनवरी 2022, पोकरन ।  स्वच्छ दुग्ध उत्पादन तकनीक पर  ग्रामीण पशुपालकों का प्रशिक्षण – डेयरी फार्मिंग में जितना महत्वपूर्ण दूध का उत्पादन होता है, उससे कहीं अधिक महत्वपूर्ण स्वच्छ दूध का उत्पादन होना होता है। इस दिशा में कृषि विज्ञान केंद्र पोकरण पर चल रहे स्वच्छ दुग्ध उत्पादन एवं मूल्य संवर्धन तकनीक विषयक तीन दिवसीय प्रशिक्षण आज सम्पन्न हुआ। इस प्रशिक्षण कार्यक्रम में केंद्र पर पंजीकृत 40 प्रशिक्षणार्थियों ने भाग लिया । प्रशिक्षण समापन अवसर पर केंद्र के प्रभारी डॉ बलवीर सिंह ने बताया कि दूध मानव जीवन के लिये सर्वोत्तम पेय पदार्थ है तथा दूध प्रोटीन और कैल्शियम का अच्छा स्रोत है वहीं अस्वच्छ दूध कई किस्म की बीमारियों का वाहक भी हो सकता है। उन्होने अस्वच्छ दूध शीघ्रता से खराब होता है तथा बाजार में इसका उचित मूल्य भी नहीं मिलने की बात कही। पशुपालन वैज्ञानिक एवं सत्र प्रभारी डॉ रामनिवास ने बताया कि स्वच्छ दुग्ध उत्पादन के लिए आवश्यक है कि दुधारू पशु निरोग तथा स्वस्थ हो। उन्होंने पशुओं के कई रोग जैसे क्षय रोग, आन्तरिक ज्वर, ब्रूसेलोसिस इत्यादि ऐसे रोग हैं जो दूध के माध्यम से पशुओं से मनुष्य में फैलते है, अतः केवल निरोग गाय को ही दुग्ध उत्पादन हेतु उपयोग करना चाहिए। उन्होंने रोगी पशु के दूध को अलग रखने की तथा इसे जीवाणु रहित बनाने के बाद ही उपयोग करने को कहा। मूल्य संवर्धन तकनीको मे दुग्ध संचयन, पैकेजिंग,प्रशीतन, परिवहन, और विभिन्न उत्पादों के तौर पर प्रसंस्करण की सभी क्रियाओं पर प्रकाश डाला। प्रशिक्षण कार्यक्रम में पशु का स्वास्थ्य एवं सफाई, दूध दुहने वाले मनुष्य का स्वास्थ्य एवं सफाई, पशुशाला की सफाई एवं बनावट, दूध दुहने वाले बर्तन की बनावट तथा उसकी सफाई, पशुशाला से दूध हटाने का समय इत्यादि पर विस्तार पूर्वक जानकारी दी।

शाखा प्रबंधक यूनियन बैंक ऑफ इंडिया के जसवंत मातवा ने पशुपालकों को किसान क्रेडिट कार्ड, प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना, पशु किसान क्रेडिट कार्ड, पशुपालन व बकरी पालन, दुग्ध प्रसंस्करण इकाई इत्यादि पर ऋण, अनुदान एवं आवेदन प्रक्रिया के बारे में प्रकाश डाला। सस्य वैज्ञानिक डॉ के जी व्यास ने बताया कि पशुओं की कम दुग्ध उत्पादकता तथा प्रति फार्म पशुओं की कम संख्या के कारण दूध दुहने में मशीनों का प्रयोग प्रचलित नहीं हुआ है। प्रसार वैज्ञानिक सुनील शर्मा ने मूल्य सवर्धन एवं दुग्ध मार्केटिंग पर चर्चा करते हुये बताया कि दूध दूहने का कार्य ग्वालों द्वारा कराया जाता है तथा ग्वालों की सफाई तथा उनकी आदतों का दूध की स्वच्छता पर बहुत अधिक प्रभाव पड़ता है। उन्होंने दूध दूहने में स्वस्थ एवं अच्छी आदतों के ग्वालों को ही लगाने तथा उनके कपड़े साफ, नाखून कटे हुए, सिर टोपी से ढका हुआ हो तथा कार्य प्रारम्भ करने से पूर्व हाथ रोगाणुनाशक घोल से धोये जाने की बात कही।

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