Ad DesktopAd TabletAd Mobile
राज्य कृषि समाचार (State News)

आंध्र प्रदेश में कपास की फसल पर बॉलवर्म का खतरा, IMD की ताजा एडवाइजरी में छिड़काव की सटीक मात्रा

22 सितंबर 2026, श्रीकाकुलम: आंध्र प्रदेश में कपास की फसल पर बॉलवर्म का खतरा, IMD की ताजा एडवाइजरी में छिड़काव की सटीक मात्रा – कपास की फसल में बोल खुलने (बॉल ओपनिंग) की अवस्था के दौरान बॉलवर्म कीट का खतरा बढ़ने की आशंका को देखते हुए भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) ने आंध्र प्रदेश के किसानों के लिए ताजा एडवाइजरी जारी की है। विशाखापत्तनम स्थित राज्य कृषि-मौसम केंद्र की ओर से जारी बुलेटिन संख्या 75/2026 में श्रीकाकुलम जिले के किसानों को नियमित निगरानी और समय रहते बचाव के उपाय अपनाने की सलाह दी गई है।

यह बुलेटिन 18 सितंबर 2026 को जारी किया गया और 19 से 23 सितंबर 2026 तक की अवधि के लिए वैध है, यानी यह पूरी तरह ताजा और मौजूदा मौसम की स्थिति पर आधारित सलाह है।

कैसे करें बॉलवर्म से बचाव, कितनी दवा की मात्रा

एडवाइजरी के मुताबिक कपास के खेत में सबसे पहले कीट की मौजूदगी पर नजर रखने के लिए फेरोमोन ट्रैप लगाने चाहिए, प्रति एकड़ 4 ट्रैप की दर से। इससे किसान समय रहते पता लगा सकते हैं कि उनके खेत में कीट का प्रकोप शुरू हो रहा है या नहीं।

शुरुआती स्तर पर बचाव के लिए नीम के बीज के तेल का छिड़काव करने की सलाह दी गई है, जिसकी मात्रा 10 किलो प्रति एकड़ तय की गई है, जिसे 200 लीटर पानी में घोलकर छिड़का जाना चाहिए। अगर प्रकोप गंभीर स्तर पर पहुंच जाए, तो एडवाइजरी में क्लोरएंट्रानिलिप्रोल का 0.3 मिली प्रति लीटर पानी की मात्रा में छिड़काव करने की सलाह दी गई है।

इसी बुलेटिन में मूंगफली की पेगिंग अवस्था में टिक्का लेट लीफ स्पॉट रोग को लेकर भी सलाह दी गई है, क्योंकि मौजूदा मौसम की स्थिति इस रोग के फैलने के लिए अनुकूल बताई गई है। इसके लिए मैंकोजेब का 2.5 ग्राम प्रति लीटर पानी की मात्रा में छिड़काव करने की सलाह दी गई है।

समय पर छिड़काव क्यों है जरूरी

बोल खुलने की अवस्था कपास की उपज के लिहाज से सबसे संवेदनशील मानी जाती है, क्योंकि इसी दौरान कीट का हमला सीधे कपास की गुणवत्ता और मात्रा दोनों पर असर डालता है। फेरोमोन ट्रैप के जरिए शुरुआती चेतावनी मिलने पर किसान भारी रासायनिक छिड़काव से पहले ही हल्के जैविक उपाय अपना सकते हैं, जिससे लागत भी कम आती है और मित्र कीटों को नुकसान भी कम होता है।

कृषि विशेषज्ञों की सामान्य सलाह रहती है कि किसी भी दवा का छिड़काव करने से पहले खेत में कीट के प्रकोप की सही अवस्था जरूर जांच लें और सिफारिश की गई मात्रा से ज्यादा दवा का इस्तेमाल न करें।

आपने उपरोक्त समाचार कृषक जगत वेबसाइट पर पढ़ा: हमसे जुड़ें
> नवीनतम कृषि समाचार और अपडेट के लिए आप अपने मनपसंद प्लेटफॉर्म पे कृषक जगत से जुड़े – गूगल न्यूज़, व्हाट्सएप्प
> कृषक जगत अखबार की सदस्यता लेने के लिए यहां क्लिक करें – घर बैठे विस्तृत कृषि पद्धतियों और नई तकनीक के बारे में पढ़ें
> कृषक जगत ई-पेपर पढ़ने के लिए नीचे दिए गए लिंक पर क्लिक करें: E-Paper
> कृषक जगत की अंग्रेजी वेबसाइट पर जाने के लिए नीचे दिए गए लिंक पर क्लिक करें: Global Agriculture