मोहगांव जलाशय प्रभावितों को जबलपुर उच्च न्यायालय से मिला इंसाफ
प्रभावितों को पुनर्वास एवं पुनर्स्थापन नीति 2013 का लाभ देने का आदेश
14 अगस्त 2026, (उमेश खोड़े, कृषक जगत, पांढुर्ना): मोहगांव जलाशय प्रभावितों को जबलपुर उच्च न्यायालय से मिला इंसाफ – पांढुर्ना जिले के मोहगांव जलाशय से प्रभावित किसानों को 12 साल के बाद अंततः इंसाफ मिल ही गया। लम्बे अर्से से संघर्षरत किसानों के पक्ष में जबलपुर उच्च न्यायालय ने गत दिनों अहम फैसला सुनाते हुए प्रभावित परिवारों को पुनर्वास एवं पुनर्स्थापन नीति 2013 के तहत लाभ देने का आदेश दिया है। अदालत के इस फैसले से जलाशय प्रभावित करीब 500 परिवारों को राहत मिलेगी। इस फैसले से किसानों में खुशी की लहर है। किसानों द्वारा जबलपुर उच्च न्यायालय के आदेश की प्रमाणित प्रति गत दिनों एसडीएम कार्यालय सौंसर और कलेक्टर कार्यालय पांढुर्ना में प्रस्तुत की गई।

उल्लेखनीय है कि मोहगांव जलाशय पीड़ित किसान विगत 12 वर्षों से संघर्ष कर शासन – प्रशासन के समक्ष पुनर्वास एवं उचित पुनर्स्थापन की मांगों को लेकर आंदोलन कर रहे थे , लेकिन किसानों की मांग पर किसी प्रकार का संज्ञान नहीं लिया जा रहा था। आखिर में यह मामला अदालत में गया और इसका प्रतिफल जबलपुर उच्च न्यायालय द्वारा किसानों के पक्ष में दिए गए निर्णय के रूप में मिला। 13 जुलाई 2026 को पारित आदेश के अनुसार किसानों को पुनर्वास एवं पुनर्स्थापन नीति 2013 का लाभ मिलेगा, जिससे लगभग 500 परिवार लाभान्वित होंगे। प्रत्येक परिवार को लगभग 7 लाख 35 हज़ार की राशि मिलेगी। साथ ही जिन किसानों की परिसंपत्ति को छोड़ा गया था, उनकी भी एडीजी कोर्ट में सुनवाई होगी। जहां किसानों को शत प्रतिशत जीत की उम्मीद है , क्योंकि किसानों के पास संबंधित परिसंपत्तियों के दस्तावेज सबूत के रूप में मौजूद है।
इस संबंध में राष्ट्रीय किसान मजदूर महासंघ ,पांढुर्ना / छिंदवाड़ा के जिलाध्यक्ष श्री सुदामा मानमोड़े ने कृषक जगत को बताया कि जबलपुर उच्च न्यायालय के आदेश की प्रमाणित प्रति गत दिनों किसानों द्वारा एसडीएम कार्यालय सौंसर और कलेक्टर कार्यालय पांढुर्ना में प्रस्तुत कर दी गई है। आदेश के परिपालन के संदर्भ में प्रशासन को एक माह में लिखित जानकारी प्रस्तुत करनी होगी। श्री मानमोड़े ने कहा कि जबलपुर उच्च न्यायालय के इस फैसले के दूरगामी परिणाम मिलेंगे , क्योंकि 2014 के बाद मप्र में करीब 200 जलाशय बने हैं ,लेकिन उनमें 2013 की पुनर्वास एवं पुनर्विस्थापन नीति 2013 को लागू नहीं किया गया है। चूंकि अदालत ने इस मामले में किसानों को पुनर्वास एवं पुनर्स्थापन नीति 2013 के तहत लाभ देने का आदेश दिया है , ऐसे में अन्य जलाशयों से प्रभावित लेकिन वंचित किसानों के सामने भी उम्मीद की किरण जगी है। इससे राज्य के लाखों किसान लाभान्वित हो सकते हैं।
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