राज्य कृषि समाचार (State News)

सरसों के अनुसंधान में उत्कृष्ट योगदान, इस विवि को मिला अवार्ड

28 अगस्त 2025, भोपाल: सरसों के अनुसंधान में उत्कृष्ट योगदान, इस विवि को मिला अवार्ड – चौधरी चरण सिंह हरियाणा कृषि विश्वविद्यालय को सरसों के अनुसंधान एवं विकास कार्यों में उत्कृष्ट योगदान देने के लिए सर्वश्रेष्ठ केन्द्र अवार्ड से नवाजा गया है। यह अवार्ड भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद-भारतीय सरसों अनुसंधान संस्थान ग्वालियर में आयोजित अखिल भारतीय राया एवं सरसों अनुसंधान कार्यकर्ताओं को 32वीं बैठक में भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद के सहायक महानिदेशक डॉ. संजीव कुमार गुप्ता ने प्रदान किया।

कुलपति प्रो.बी.आर. काम्बोज ने बताया कि पिछले वर्ष सिंचित क्षेत्रों के लिए आर.एच. 1975 किस्म ईजाद की गई है जो कि अधिक उत्पादन के कारण किसानों के बीच बहुत लोकप्रिय होती जा रही है। कुलपति ने बताया कि 11 से 12 क्विंटल प्रति एकड़ औसत उत्पादन तथा 14 से 15 क्विंटल प्रति एकड़ उत्पादन क्षमता रखने वाली RH 1975 किस्म में लगभग 39.5 फीसदी तेल की मात्रा है। तिलहन उत्पादन में वृद्धि के साथ किसानों की आर्थिक स्थिति को सुदृढ़ करने में विकसित किस्मों का महत्वपूर्ण योगदान रहा है।

उन्होंने बताया कि किसानों को इस किस्म का बीज आने वाले रबी की बिजाई के समय उपलब्ध करवा दिया जाएगा। कुलपति ने बताया कि इस टीम ने इसके अलावा सरसों की दो अन्य हाइब्रिड किस्में आरएएचएच 2101, आरएच 1424 और आरएच 1706 विकसित की है। यह किस्में भी सरसों की उत्पादकता बढ़ाने में मील का पत्थर साबित होंगी। उन्होंने इस उपलब्धि पर तिलहन वैज्ञानिकों की टीम को बधाई दी। अनुसंधान निदेशक डॉ.राजबीर गर्ग ने उम्मीद जताई कि सरसों की यह नई किस्में अपनी विशिष्ट विशेषताओं के कारण सरसों उत्पादक राज्यों में बहुत लोकप्रिय होंगी। डॉ.राम अवतार ने बताया कि तिलहन अनुभाग को भारतीय अनुसंधान संस्थान द्वारा चौथी बार इस पुरस्कार से नवाजा गया है जो कि विश्वविद्यालय के लिए गौरव की बात है।

Advertisements
Advertisement
Advertisement

(नवीनतम कृषि समाचार और अपडेट के लिए आप अपने मनपसंद प्लेटफॉर्म पे कृषक जगत से जुड़े – गूगल न्यूज़,  टेलीग्रामव्हाट्सएप्प)

(कृषक जगत अखबार की सदस्यता लेने के लिए यहां क्लिक करें – घर बैठे विस्तृत कृषि पद्धतियों और नई तकनीक के बारे में पढ़ें)

कृषक जगत ई-पेपर पढ़ने के लिए नीचे दिए गए लिंक पर क्लिक करें:

Advertisement
Advertisement

www.krishakjagat.org/kj_epaper/

Advertisement
Advertisement

कृषक जगत की अंग्रेजी वेबसाइट पर जाने के लिए नीचे दिए गए लिंक पर क्लिक करें:

www.global-agriculture.com

Advertisements
Advertisement
Advertisement