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फसल की खेती (Crop Cultivation)राज्य कृषि समाचार (State News)

अरहर की ये पांच उन्नत किस्म, किसानों को बना सकती है धनवान !

24 जुलाई 2025, भोपाल: अरहर की ये पांच उन्नत किस्म, किसानों को बना सकती है धनवान ! – जी हां ! यदि किसान अरहर की पांच उन्नत किस्मों की खेती करें तो निश्चित ही ऐसे किसानों को अच्छा मुनाफा हो सकता है. कृषि वैज्ञानिकों का यह कहना है कि मौजूदा समय बारिश का है और इस दौरान दलहनी फसलों का उत्पादन कर मोटा मुनाफा कमाया जा सकता है लेकिन पांच उन्नत किस्मों को आजमाने की भी सलाह दी गई है.

1.पूसा अरहर-16
यह अरहर की अगेती किस्म यानी जल्दी पकने वाली है. इस किस्म की बुवाई जुलाई में करनी चाहिए. यह 120 दिन में पककर तैयार हो जाती है. पौधे की लंबाई छोटी और दाने मोटे होती है. औसत उत्पादन 1 टन प्रति हेक्टेयर तक होता है. इसे भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान (IARI) ने विकसित किया है.

2. टीएस-3आर
यह एक पछेती किस्म यानी थोड़ी देर से पकने वाली है. इस किस्म की बुवाई मॉनसून आने के बाद की जाती है. पकने में 150 से 170 दिन का समय लगता है. यह किस्म विल्ट और मोज़ेक वायरस जैसी बीमारियों के प्रति प्रतिरोधी है. औसत उपज भी लगभग 1 टन प्रति हेक्टेयर है. इसे भी IARI द्वारा विकसित किया गया है.

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3. पूसा 992
अरहर की यह जल्दी तैयार होने वाली किस्म है. दाना भूरे रंग का, मोटा और चमकदार होता है. 120 से 140 दिन में फसल तैयार हो जाती है. प्रति एकड़ 6 क्विंटल तक उपज देती है. विशेष रूप से पंजाब, हरियाणा, पश्चिमी यूपी और राजस्थान में लोकप्रिय है.

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4. आईपीए 203
यह किस्म रोगों के प्रति प्रतिरोधी होती है. फसल को कई बीमारियों से बचाने में सक्षम है. इस किस्म से औसत उपज 18-20 क्विंटल प्रति हेक्टेयर प्राप्त किया जा सकता है. बुवाई जून महीने में कर देनी चाहिए.

5. आईसीपीएल 87
अरहर की इस किस्म के पौधों की लंबाई कम होती है, जो 130 से 150 दिन में फसल तैयार हो जाती है. फलियां मोटी, लंबी और गुच्छों में आती हैं. औसत उपज 15-20 क्विंटल प्रति हेक्टेयर तक है.

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