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‘वृंदावन ग्राम योजना’ से छिंदवाड़ा में गौ-पालन और डेयरी विकास को मिली नई गति

12 मार्च 2026, छिंदवाड़ा‘वृंदावन ग्राम योजना’ से छिंदवाड़ा में गौ-पालन और डेयरी विकास को मिली नई गति – छिंदवाड़ा जिले में कृषक कल्याण वर्ष 2026 के अवसर पर ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत बनाने और गौ-पालन एवं डेयरी विकास को बढ़ावा देने के लिए ‘वृंदावन ग्राम योजना’ एक महत्वपूर्ण पहल बनकर उभर रही है। शासन के पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग के निर्देशानुसार जिले की प्रत्येक विधानसभा से एक-एक ग्राम का चयन किया गया है, जहां समग्र ग्रामीण विकास के साथ पशुपालन गतिविधियों को विशेष रूप से प्रोत्साहित किया जा रहा है।

मुख्य कार्यपालन अधिकारी जिला पंचायत छिंदवाड़ा श्री अग्रिम कुमार के मार्गदर्शन में पशुपालन एवं डेयरी विभाग, किसान कल्याण तथा कृषि विकास विभाग, वन विभाग, ऊर्जा विभाग, कुटीर एवं ग्रामोद्योग विभाग और पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग के अधिकारियों ने प्रत्येक विधानसभा से तीन-तीन ग्रामों का चयन किया। इसके बाद कलेक्टर श्री हरेंद्र नारायन की अध्यक्षता में समीक्षा कर प्रत्येक विधानसभा से एक ग्राम को अंतिम रूप दिया गया, जिसे जिले के प्रभारी मंत्री श्री राकेश सिंह द्वारा अनुमोदन प्रदान किया गया।

उपसंचालक पशुपालन विभाग डॉ.एच.जी.एस.पक्षवार के अनुसार जिले में विधानसभा क्षेत्रवार पाँच ग्रामों को वृंदावन ग्राम के रूप में चयनित किया गया है,  चौरई विधानसभा से समसवाड़ा, अमरवाड़ा से सालीवाड़ा शारदा, छिंदवाड़ा से भैंसादंड, जुन्नारदेव से लहगडुआ तथा परासिया से बीजकवाड़ा। इन ग्रामों को डेयरी गतिविधियों के केंद्र के रूप में विकसित करने की दिशा में तेजी से कार्य प्रारंभ हो चुका है। वृंदावन ग्राम योजना का मुख्य उद्देश्य ग्रामों को दुग्ध उत्पादन में आत्मनिर्भर बनाना तथा सहकारिता के माध्यम से दुग्ध व्यवसाय का विस्तार करना है। इसके साथ-साथ पर्यावरण संरक्षण, जैविक कृषि, जल संरक्षण और सौर ऊर्जा जैसी गतिविधियों को भी जनभागीदारी के साथ लागू किया जा रहा है। चारागाह विकास, आधारभूत संरचना निर्माण तथा ग्रामीण परिवारों को रोजगार एवं स्वरोजगार के अवसर उपलब्ध कराकर गांवों की आर्थिक स्थिति को मजबूत बनाने पर भी विशेष ध्यान दिया जा रहा है।

चयनित वृंदावन ग्रामों में पशुपालन विभाग द्वारा कई महत्वपूर्ण उपलब्धियां हासिल की गई हैं। यहां प्रतिदिन लगभग 2338 लीटर दूध का संग्रहण हो रहा है। नस्ल सुधार कार्यक्रम के तहत 336 कृत्रिम गर्भाधान और 131 बधियाकरण किए गए हैं। पशुओं के स्वास्थ्य संरक्षण के लिए 12 पशु चिकित्सा शिविर आयोजित किए गए तथा 5489 पशुओं का टीकाकरण किया गया। पशुपालकों को प्रोत्साहित करने के लिए 170 चरी-चारा किट वितरित की गईं और 25 पशुओं का बीमा भी कराया गया।   इसके अलावा 292 पशुपालकों के पशुपालन किसान क्रेडिट कार्ड (केसीसी) फार्म भरे गए हैं। आचार्य विद्यासागर गौ-संवर्धन योजना के अंतर्गत 2 आवेदन प्राप्त हुए, जिनमें से एक स्वीकृत हो चुका है। बकरीपालन योजना के तहत 2 इकाइयों को स्वीकृति मिली है, वहीं स्टेट बैकयार्ड पोल्ट्री योजना के अंतर्गत 5 लाभार्थियों को लाभान्वित किया जा चुका है। मुख्यमंत्री दुधारू पशु प्रदाय योजना के तहत भारिया जनजाति के हितग्राही को प्रथम चरण में एक भैंस भी प्रदान की गई है।

वृंदावन ग्राम योजना के माध्यम से पशुपालन को आधुनिक और लाभकारी व्यवसाय के रूप में विकसित करने की दिशा में ठोस कदम उठाए जा रहे हैं। इससे न केवल दुग्ध उत्पादन में वृद्धि हो रही है, बल्कि ग्रामीणों की आय में भी बढ़ोत्तरी के नए रास्ते खुल रहे हैं। यह पहल कृषक कल्याण वर्ष 2026 के उद्देश्य – ‘किसानों और ग्रामीण परिवारों को आर्थिक रूप से सशक्त बनाने ‘की दिशा में एक सकारात्मक और प्रेरणादायक उदाहरण बन रही है।

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