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राज्य कृषि समाचार (State News)

तेलंगाना सरकार ने पैराक्वाट खरपतवारनाशक पर 60 दिन का प्रतिबंध लगाया, किसानों की सुरक्षा को बताया कारण

02 अप्रैल 2026, हैदराबाद: तेलंगाना सरकार ने पैराक्वाट खरपतवारनाशक पर 60 दिन का प्रतिबंध लगाया, किसानों की सुरक्षा को बताया कारण – किसानों और आम जन के स्वास्थ्य की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए तेलंगाना सरकार ने पैराक्वाट खरपतवारनाशक के उपयोग और बिक्री पर तत्काल प्रभाव से 60 दिनों का प्रतिबंध लगा दिया है।

यह प्रतिबंध राज्य सरकार द्वारा लागू किया जाने वाला अधिकतम समय है, जिसे कीटनाशी अधिनियम, 1968 के प्रावधानों के अंतर्गत लागू किया गया है। आवश्यकता पड़ने पर इसे आगे 30 दिनों तक बढ़ाया भी जा सकता है।

सरकारी आदेश के अनुसार, यह रोक पैराक्वाट डाइक्लोराइड तथा उसके सभी प्रकार के निर्माण, भंडारण, वितरण और बिक्री पर लागू होगी। सरकार ने स्पष्ट किया कि यह निर्णय खरपतवारनाशक के मानव और पशु स्वास्थ्य पर पड़ने वाले गंभीर दुष्प्रभावों से संबंधित रिपोर्टों और प्रतिक्रियाओं के आधार पर लिया गया है, विशेषकर उन किसानों के लिए जो इसके सीधे संपर्क में आते हैं।

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राज्य के कृषि मंत्री तुम्मला नागेश्वर राव ने इस निर्णय को आगे बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। इससे पहले 30 मार्च को तेलंगाना विधानसभा ने एक प्रस्ताव पारित कर केंद्र सरकार से इस खरपतवारनाशक पर देशभर में स्थायी प्रतिबंध लगाने की मांग की थी।

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ध्यान देने योग्य है कि किसी भी कीटनाशी या खरपतवारनाशक पर स्थायी प्रतिबंध लगाने का अधिकार केवल केंद्र सरकार के पास है। इस संदर्भ में तेलंगाना सरकार ने केंद्र से औपचारिक रूप से कार्रवाई की मांग भी की है।

सरकार ने कृषि विभाग को निर्देश दिए हैं कि प्रतिबंध का सख्ती से पालन सुनिश्चित किया जाए और उल्लंघन करने वालों के खिलाफ कठोर कार्रवाई की जाए। इसके साथ ही, पैराक्वाट की ऑनलाइन बिक्री को भी रोकने के लिए कदम उठाए जा रहे हैं, क्योंकि यह खरपतवारनाशक इंटरनेट के माध्यम से आसानी से उपलब्ध हो रहा था।

इस मुद्दे को पहले कृषि नीति से जुड़े प्रतिनिधियों द्वारा मुख्यमंत्री ए. रेवंत रेड्डी के समक्ष उठाया गया था, जिसके बाद उन्होंने इस विषय पर गंभीरता से कार्रवाई का आश्वासन दिया था।

चिकित्सा समुदाय ने किया समर्थन, देशभर में प्रतिबंध की मांग

तेलंगाना के चिकित्सा विशेषज्ञों और डॉक्टर संगठनों ने इस निर्णय का स्वागत किया है। उनका कहना है कि पैराक्वाट अत्यंत विषैला खरपतवारनाशक है, जिसके संपर्क में आने पर फेफड़ों को गंभीर और स्थायी नुकसान, अनेक अंगों का विफल होना और मृत्यु तक हो सकती है, क्योंकि इसका कोई प्रभावी प्रतिरोधक उपलब्ध नहीं है।

डॉक्टरों ने यह भी चिंता जताई है कि यह रसायन न केवल खेतों में काम करने वाले किसानों के लिए खतरनाक है, बल्कि इसका दुरुपयोग आत्महत्या के मामलों में भी हो रहा है, जहां बचाव की संभावना बहुत कम होती है।

स्वास्थ्य संगठनों ने इसे एक महत्वपूर्ण और समयोचित कदम बताते हुए केंद्र सरकार से आग्रह किया है कि देशभर में पैराक्वाट पर स्थायी प्रतिबंध लगाया जाए, जैसा कि कई देशों में पहले से किया जा चुका है।

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