राज्य कृषि समाचार (State News)

केवीके सागर में वैज्ञानिक परामर्शदात्री समिति की बैठक संपन्न

27 दिसंबर 2025, सागर: केवीके सागर में वैज्ञानिक परामर्शदात्री समिति की बैठक संपन्न – कृषि विज्ञान केंद्र सागर एवं कृषि विज्ञान केंद्र बिजौरा की संयुक्त वैज्ञानिक परामर्शदात्री समिति (SAC) की बैठक ऑनलाइन माध्यम से आयोजित की गई। बैठक की अध्यक्षता प्रो. डॉ. टी.आर. शर्मा, संचालक विस्तार सेवाएं, जवाहरलाल नेहरू कृषि विश्वविद्यालय, जबलपुर द्वारा की गई। बैठक का आयोजन कृषि विज्ञान केंद्र सागर में किया गया।

इस अवसर पर डॉ. के.एस. यादव, प्रधान वैज्ञानिक एवं प्रमुख, कृषि विज्ञान केंद्र सागर द्वारा खरीफ एवं रबी 2025 की प्रगति प्रतिवेदन का प्रस्तुतीकरण किया गया। इसके पश्चात कृषि विज्ञान केंद्र बिजौरा के प्रभारी डॉ. ए.के. त्रिपाठी द्वारा भी खरीफ एवं रबी 2025 की प्रगति प्रतिवेदन प्रस्तुत की गई। अटारी जबलपुर से डॉ. रजनीश श्रीवास्तव, प्रधान वैज्ञानिक द्वारा महत्वपूर्ण तकनीकी सुझाव दिए गए।

बैठक में डॉ. रूद्रासेन सिंह, डॉ. स्मिता पुरी (आर.ए.आर.एस. सागर) सहित विभिन्न विभागों के अधिकारी उपस्थित रहे। इनमें श्री एम.के. प्रजापति (परियोजना संचालक आत्मा), डॉ. डी.डी. चढ़ार (सहायक संचालक पशु चिकित्सालय), श्री जितेन्द्र राजपूत (सहायक संचालक कृषि), श्री सूर्यकांत कुर्मी (बीज निगम सागर), श्री प्रदीप गुप्ता (इफको), श्री वी.आर. पटेल (मत्स्य विभाग), हर्षिता व्यास (कृषि अभियांत्रिकी), ए.के. मलारया (उद्यानिकी विभाग), श्री दीपक निषाद एवं सुनील राय (ऑल इंडिया रेडियो) सहित अन्य अधिकारी एवं प्रतिनिधि उपस्थित रहे। इसके अतिरिक्त कृषि विज्ञान केंद्र से डॉ. ममता सिंह, डॉ. वैशाली शर्मा, श्री मयंक मेहरा, श्री सुखलाल बास्केल, श्री योगेन्द्र सिंह सहित लगभग 20 प्रगतिशील कृषकों की सहभागिता रही। बैठक में किसानों द्वारा प्रस्तुत सुझावों एवं कृषिगत समस्याओं का समाधान वैज्ञानिकों द्वारा किया गया।

अध्यक्षीय उद्बोधन में प्रो. डॉ. टी.आर. शर्मा ने किसानों से रासायनिक उर्वरकों का न्यूनतम उपयोग करते हुए प्राकृतिक खेती अपनाने का आग्रह किया, जिससे लागत में कमी एवं उत्पादन की गुणवत्ता में वृद्धि हो सके। उन्होंने खड़ी फसल में यूरिया के स्थान पर नैनो यूरिया के उपयोग की सलाह दी, जिससे कम लागत में अधिक लाभ प्राप्त किया जा सके। साथ ही क्षेत्र में आने वाली समस्याओं, उन्नत किस्मों एवं नवीन तकनीकों का कृषक प्रक्षेत्र पर अधिक से अधिक परीक्षण करने पर जोर दिया। डॉ. के.एस. यादव द्वारा आभार व्यक्त किया गया। श्री मयंक मेहरा द्वारा कृषि विज्ञान केंद्र की प्रदर्शन इकाइयों का भ्रमण कराया गया।

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