केवीके बड़गांव में रबी वैज्ञानिक सलाहकार समिति की बैठक सम्पन्न, कृषि यंत्रीकरण पर दिया गया जोर
17 जनवरी 2026, भोपाल: केवीके बड़गांव में रबी वैज्ञानिक सलाहकार समिति की बैठक सम्पन्न, कृषि यंत्रीकरण पर दिया गया जोर – कृषि विज्ञान केन्द्र, बड़गांव में 15 जनवरी को रबी वैज्ञानिक सलाहकार समिति की बैठक सम्पन्न हुई। बैठक की अध्यक्षता डॉ. टी.आर. शर्मा, संचालक विस्तार सेवाएं, जवाहरलाल नेहरू कृषि विश्वविद्यालय, जबलपुर ने की। वे गूगल मीट के माध्यम से बैठक में शामिल हुए। विशिष्ट अतिथि के रूप में डॉ. रजनीष श्रीवास्तव, वरिष्ठ वैज्ञानिक, अटारी जोन-9 जबलपुर तथा डॉ. प्रमोद गुप्ता, वैज्ञानिक, ज.ने.कृ.वि.वि., जबलपुर भी ऑनलाइन माध्यम से बैठक से जुड़े।
कार्यक्रम की शुरुआत में कृषि विज्ञान केन्द्र के वरिष्ठ वैज्ञानिक एवं प्रमुख डॉ. एस.आर. धुवारे ने खरीफ 2025 के दौरान केन्द्र द्वारा संपादित कार्यों की समीक्षा प्रस्तुत की तथा रबी 2025-26 में प्रस्तावित गतिविधियों की जानकारी दी। अपने अध्यक्षीय उद्बोधन में डॉ. टी.आर. शर्मा ने कहा कि कृषि क्षेत्र में श्रमिकों की कमी को देखते हुए किसानों को कृषि यंत्रीकरण को अपनाना चाहिए। सुपर सीडर, हैप्पी सीडर जैसे आधुनिक कृषि यंत्रों से समय पर बुवाई संभव है, जिससे कीट एवं रोगों में कमी आती है और उत्पादन में वृद्धि होती है। उन्होंने जिले में सोयाबीन एवं रामतिल पर प्रक्षेत्रीय परीक्षण, प्राकृतिक खेती, फसल अवशेष प्रबंधन तथा मृदा स्वास्थ्य संरक्षण पर विशेष ध्यान देने की आवश्यकता बताई।
वरिष्ठ वैज्ञानिक अटारी जोन-9 जबलपुर डॉ. रजनीष श्रीवास्तव ने ड्रैगन फ्रूट एवं सिंघाड़ा जैसी लाभकारी फसलों का क्षेत्रफल बढ़ाने, कद्दूवर्गीय सब्जियों की पौध तैयार कर किसानों को वितरित करने तथा पारंपरिक किस्मों के संरक्षण हेतु प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित करने का सुझाव दिया। कृषि महाविद्यालय बालाघाट के अधिष्ठाता डॉ. घनश्याम देशमुख ने खरीफ में अपलैण्ड भूमि पर उठी हुई क्यारियों में अरहर उत्पादन तथा राइस ट्रांसप्लांटर, सुपर सीडर एवं लेजर लेवलर जैसे कृषि यंत्रों के उपयोग पर जोर दिया। उन्होंने बताया कि इन यंत्रों के संचालन हेतु प्रशिक्षित वाहन चालकों की आवश्यकता होती है, जिसके लिए ज.ने.कृ.वि.वि., जबलपुर द्वारा ग्रामीण युवकों को प्रशिक्षण दिया जा रहा है।
उपसंचालक कृषि बालाघाट फूलसिंह मालवीय ने किसानों को सलाह दी कि नया बीज खरीदने के बाद उसका उपयोग कम से कम तीन वर्षों तक किया जाए। साथ ही अपलैण्ड भूमि पर सोयाबीन एवं रामतिल जैसी फसलों को अपनाने पर बल दिया। बैठक के पश्चात सलाहकार समिति के सदस्यों द्वारा केन्द्र में संचालित विभिन्न प्रदर्शन इकाइयों जैसे प्राकृतिक खेती, पौध उत्पादन, सब्जी उत्पादन, मशरूम, मुर्गी पालन, नाडेप, वर्मीकम्पोस्ट, नेट हाउस, कृषि यंत्र, अजोला, क्रॉप कैफेटेरिया आदि इकाइयों का भ्रमण किया गया।
कार्यक्रम का संचालन एवं आभार प्रदर्शन केन्द्र के मौसम वैज्ञानिक धर्मेन्द्र आगाशे ने किया। कार्यक्रम के सफल आयोजन में कृषि विज्ञान केन्द्र की श्रीमती अन्नपूर्णा शर्मा एवं श्री दिलीप कुमार शिव का सराहनीय योगदान रहा। बैठक में विभिन्न विभागों के अधिकारी, वैज्ञानिक, प्रगतिशील कृषक एवं महिला कृषक बड़ी संख्या में उपस्थित रहे।
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