‘अपनी ऐसी तैसी कराओ’ तक उतरे अफसर, खाद लेने पहुंचे किसान को तहसीलदारने जड़ा थप्पड़, वीडियो वायरल
15 दिसंबर 2025, टीकमगढ़: ‘अपनी ऐसी तैसी कराओ’ तक उतरे अफसर, खाद लेने पहुंचे किसान को तहसीलदार
ने जड़ा थप्पड़, वीडियो वायरल – मध्य प्रदेश में यूरिया और खाद की किल्लत से जूझ रहे किसानों की मुश्किलें कम होने का नाम नहीं ले रही हैं। खाद पाने के लिए घंटों लाइन में लगने के बाद भी किसानों को कभी खाली हाथ लौटना पड़ रहा है तो कहीं उन्हें प्रशासनिक अफसरों की अभद्रता और मारपीट का सामना करना पड़ रहा है। टीकमगढ़ जिले के बल्देवगढ़ से ऐसा ही एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है, जहां तहसीलदार द्वारा किसान के साथ बदसलूकी और थप्पड़ मारने का वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है।
मंगल भवन में खाद वितरण के दौरान हंगामा
दरअसल, शुक्रवार को बल्देवगढ़ विकासखंड के मंगल भवन में यूरिया खाद का वितरण किया जा रहा था। किसानों की भारी भीड़ वहां पहले से मौजूद थी। इसी दौरान बल्देवगढ़ तहसीलदार डॉ. अनिल गुप्ता मौके पर पहुंचे। आरोप है कि उन्होंने किसानों से बात करने के बजाय अपनी हनक दिखाते हुए अभद्र भाषा का इस्तेमाल किया। प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक, खिड़की पर लटककर यूरिया लेने की कोशिश कर रहे एक किसान को तहसीलदार ने पीछे से थप्पड़ मार दिया। इतना ही नहीं, कुछ अन्य किसानों को पकड़कर घसीटते हुए लाइन से बाहर कर दिया गया।
‘अपनी ऐसी तैसी कराओ’ कहकर की किसान की बेइज्जती
घटना के दौरान एक किसान जब हाथ जोड़कर खाद देने की गुहार लगा रहा था, तभी तहसीलदार ने उससे कहा, ‘अपनी ऐसी तैसी कराओ’। यह पूरी घटना किसी ने मोबाइल कैमरे में रिकॉर्ड कर ली, जो अब सोशल मीडिया पर वायरल हो चुकी है। वीडियो सामने आने के बाद लोगों में नाराजगी बढ़ती जा रही है और प्रशासन के रवैये पर सवाल खड़े हो रहे हैं।
तहसीलदार ने दी सफाई
वीडियो वायरल होने के बाद तहसीलदार डॉ. अनिल गुप्ता ने सफाई देते हुए कहा कि कुछ लोग लाइन तोड़कर आगे बढ़ रहे थे, जिस पर अन्य किसानों ने आपत्ति जताई थी। इसी कारण कुछ लोगों को खींचकर पीछे किया गया। हालांकि थप्पड़ मारने और अभद्र भाषा के आरोपों पर उन्होंने कोई स्पष्ट जवाब नहीं दिया।
पहले भी जा चुकी है किसान की जान
गौरतलब है कि टीकमगढ़ मुख्यालय पर 8 दिसंबर को खाद की लाइन में लगे एक किसान की तबीयत बिगड़ने के बाद मौत हो गई थी। उस घटना के बाद भी जिला प्रशासन ने कोई ठोस व्यवस्था नहीं की, जिससे किसानों को राहत मिल सके। अब बल्देवगढ़ की यह घटना सामने आने के बाद एक बार फिर सवाल उठ रहा है कि आखिर कब तक किसान खाद के लिए अपमान और मारपीट झेलते रहेंगे।
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