राज्य कृषि समाचार (State News)

मप्र शासन की सैक्स-सॉर्टेड सीमन योजना से बदली पशुपालकों की किस्मत, आय में कई गुना बढ़ोतरी

19 दिसंबर 2025, भोपाल: मप्र शासन की सैक्स-सॉर्टेड सीमन योजना से बदली पशुपालकों की किस्मत, आय में कई गुना बढ़ोतरी – कृत्रिम गर्भाधान पशुपालन में पहले से प्रचलित रहा है, लेकिन सैक्स-सॉर्टेड सीमन के माध्यम से किया जा रहा कृत्रिम गर्भाधान मध्यप्रदेश शासन का ऐसा अभिनव प्रयास साबित हुआ है, जिसने पशु नस्ल सुधार और पशुपालकों की आय को नई दिशा दी है। इस तकनीक से उच्च गुणवत्ता वाली मादा बछिया/पडिया प्राप्त होती है, जिससे पशुपालकों को दीर्घकालिक और सुनिश्चित लाभ मिल रहा है।

हर बछिया बनी सुरक्षित निवेश

सैक्स-सॉर्टेड सीमन से उत्पन्न मादा बछिया को पशुपालक अब फिक्स डिपॉजिट (एफडी) के रूप में देखने लगे हैं। लगभग तीन वर्ष में यही बछिया उत्तम नस्ल की गाय या भैंस बनकर दूध उत्पादन के माध्यम से परिवार की आय में कई गुना वृद्धि कर देती है। इससे पशुपालकों की आर्थिक सुरक्षा मजबूत हुई है और स्वरोजगार को स्थायी आधार मिला है।

हीरालाल का पुरा बना सफलता का केंद्र

भिण्ड जिले का पशु औषधालय हीरालाल का पुरा इस योजना की सफलता का प्रतीक बनकर उभरा है। संस्था प्रभारी मुकेश अहिरवार ने लगातार दो वर्षों तक ग्रामीणों को सैक्स-सॉर्टेड सीमन की उपयोगिता और लाभ समझाए। उन्होंने बताया कि इस तकनीक से केवल मादा बछिया/पडिया के जन्म की संभावना अधिक होती है। जागरूकता के बाद ग्रामीणों ने बड़े पैमाने पर अपने पशुओं में सैक्स-सॉर्टेड सीमन का उपयोग शुरू किया।

सस्ती दरों पर सुविधा, छोटे किसानों को लाभ

मध्यप्रदेश शासन की इस योजना के तहत सैक्स-सॉर्टेड सीमन की सुविधा सस्ती दरों पर उपलब्ध कराई जा रही है, जिससे छोटे और सीमांत पशुपालक भी आसानी से इससे जुड़ सके। परिणामस्वरूप पशुपालन में निवेश सुरक्षित हुआ और उत्पादन क्षमता में उल्लेखनीय सुधार देखने को मिला।

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लाभार्थियों की बदलती तस्वीर

गांव के पशुपालक संतोष सिंह भदौरिया, रामप्रकाश तोमर, शोभाराम और मंगल सिंह जैसे अनेक लाभार्थी अब केवल सैक्स-सॉर्टेड सीमन का ही उपयोग कर रहे हैं। संतोष सिंह भदौरिया ने बताया कि तीन वर्ष पूर्व उनकी गाय में सैक्स-सॉर्टेड सीमन से कृत्रिम गर्भाधान किया गया था, जिससे उत्पन्न बछिया अब पूर्ण विकसित गाय बन चुकी है। 25 अक्टूबर 2025 को उसी गाय में फिर से सैक्स-सॉर्टेड सीमन से गर्भाधान किया गया, जिससे भविष्य में उत्पादन और बढ़ने की उम्मीद है।

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ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मिला संबल

योजना से जुड़ने के बाद पशुपालकों की आय में निरंतर वृद्धि हुई है। पूरे परिवार की आर्थिक स्थिति सुदृढ़ होने से स्वरोजगार को बढ़ावा मिला है और पलायन पर भी रोक लगी है। पशुपालकों का कहना है कि सैक्स-सॉर्टेड सीमन ने न केवल पशुपालन में क्रांति लाई है, बल्कि ग्रामीण अर्थव्यवस्था को भी मजबूत किया है।

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