राज्य कृषि समाचार (State News)

रेगिस्तान में खिला समृद्धि का खजूर, प्राकृतिक खेती ने किसान की बदली तकदीर

24 जून 2026, जयपुर: रेगिस्तान में खिला समृद्धि का खजूर, प्राकृतिक खेती ने किसान की बदली तकदीर – सिंचाई तकनीक के समन्वय से खजूर की व्यावसायिक खेती में उल्लेखनीय सफलता हासिल कर नई मिसाल कायम की है।

हाल ही में राजस्थान सरकार के पशुपालन मंत्री जोराराम कुमावत ने किसान के खेत का दौरा कर विकसित खजूर के बाग का निरीक्षण किया। उन्होंने इस प्रयास की सराहना करते हुए इसे क्षेत्र के किसानों के लिए प्रेरणादायक मॉडल बताया और कहा कि जल संकट वाले क्षेत्रों में इस प्रकार की खेती किसानों की आय बढ़ाने का प्रभावी माध्यम बन सकती है।

खजूर ऐसा फल है जिसकी मांग देश और विदेश दोनों बाजारों में लगातार बढ़ रही है। इसकी खेती अपेक्षाकृत कम पानी में भी सफलतापूर्वक की जा सकती है। यदि इसके साथ ड्रिप सिंचाई, जैविक खाद और प्राकृतिक खेती के सिद्धांतों को अपनाया जाए तो उत्पादन की गुणवत्ता और लाभ दोनों में वृद्धि होती है। यही कारण है कि खैरोफड़ा गांव के इस किसान ने सीमित संसाधनों के बावजूद उत्कृष्ट परिणाम प्राप्त किए हैं।

प्राकृतिक खेती से भूमि की उर्वरता बनी रहती है, उत्पादन लागत घटती है और रासायनिक उर्वरकों पर निर्भरता कम होती है। वहीं आधुनिक सिंचाई प्रणाली पानी की प्रत्येक बूंद का प्रभावी उपयोग सुनिश्चित करती है, जो राजस्थान जैसे शुष्क प्रदेश के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है।

कृषि विशेषज्ञों का मानना है कि बदलते जलवायु परिदृश्य और घटते भूजल स्तर को देखते हुए किसानों को पारंपरिक फसलों के साथ-साथ खजूर जैसी उच्च मूल्य वाली बागवानी फसलों की ओर भी ध्यान देना चाहिए। इससे उनकी आय में स्थायी वृद्धि हो सकती है और खेती अधिक लाभकारी बन सकती है।

पाली के इस किसान की सफलता यह संदेश देती है कि यदि किसान नई तकनीक अपनाने का साहस करें और प्राकृतिक संसाधनों का वैज्ञानिक ढंग से उपयोग करें, तो कठिन भौगोलिक परिस्थितियां भी सफलता की राह में बाधा नहीं बनतीं। यह मॉडल आने वाले समय में जल संरक्षण, प्राकृतिक खेती और उच्च आय वाली कृषि का उत्कृष्ट उदाहरण बन सकता है।

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