कृषक की परिभाषा में संशोधन केन्द्र सरकार की गाइडलाइन के आधार पर किया

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संशोधन के बाद भी कोई परिवार कैपिटल सब्सिडी से वंचित नहीं हुआ – संसदीय कार्य मंत्री

20 सितम्बर 2021, जयपुर । कृषक की परिभाषा में संशोधन केन्द्र सरकार की गाइडलाइन के आधार पर किया – संसदीय कार्यमंत्री श्री शांति कुमार धारीवाल ने शनिवार को विधानसभा में स्पष्ट किया कि भारत सरकार द्वारा जारी की गई किसान सम्मान योजना की गाइड लाइन के अनुसार कृषक की परिभाषा में संशोधन किया गया है। उन्होंने बताया कि संशोधन से कोई भी परिवार कैपिटल सब्सिडी से वंचित नहीं हुआ है। श्री धारीवाल ने कहा कि संशोधन से केवल कृषक की परिभाषा को स्पष्ट किया गया है। संशोधित परिभाषा में कृषक की श्रेणी में वही व्यक्ति व परिवार आयेंगे जो अपनी आजीविका के लिए पूरी तरह से कृषि पर निर्भर हैं।

उन्होंने सदन में बताया कि नए प्रावधान में कृषक की परिभाषा में स्पष्टता लाना सुनिश्चित किया जाएगा, ताकि जो परिवार पूरी तरह कृषि आय पर निर्भर हैं, उन्हेें योजना का उच्चतम लाभ प्राप्त करने का अधिकार मिले। उन्होंने कहा कि यही इस संशोधन का उद्देश्य भी है। उन्होंने बताया कि एग्रो प्रोसेसिंग, एग्रो बिजनेस, एग्रो एक्सपोर्ट प्रमोशन पॉलिसी-2019 के तहत राज्य सरकार द्वारा कृषक को 50 प्रतिशत सब्सिडी दी जाती है। उन्होंने बताया कि कृषक की परिभाषा में नहीं आने पर भी राज्य सरकार द्वारा 25 प्रतिशत सब्सीडी दी जा रही है।

श्री धारीवाल विधायक श्री बलवान पूनिया द्वारा पूर्व व वर्तमान मंत्री/राज्यमंत्री, पूर्व व वर्तमान लोकसभा, राज्यसभा तथा विधानसभा के सदस्य पूर्व व वर्तमान नगर निगम के मेयर एवं पूर्व व वर्तमान जिला परिषद के अध्यक्ष होने पर ‘‘कृषक परिवार‘‘ में सम्मिलित नहीं किये जाने सम्बन्धी संशोधन के सम्बन्ध में रखे गये ध्यानाकर्षण पर अपना जवाब दे रहे थे।

इस दौरान विधानसभा अध्यक्ष डॉ. सी.पी.जोशी ने हस्तक्षेप करते हुए स्पष्ट किया कि केन्द्र सरकार द्वारा जो कृषक की परिभाषा दी गई है, वह केवल भारत सरकार की किसान सम्मान निधि योजना पर लागू होती है। उन्होंने कहा कि यह कृषक के लिए सामान्य परिभाषा नहीं है, इसलिए जनप्रतिनिधियों को कृषक नहीं मानने के सम्बन्ध में जारी अधिसूचना को संशोधित किया जाना चाहिये। उन्होंने निर्देश दिये कि कृषक की परिभाषा में जनप्रतिनिधियों को किसान नहीं मानने के प्रावधान को हटाकर पूर्व की तरह ही परिभाषित किया जाये ताकि किसान की ही भांति अन्य को भी योजना में 50 प्रतिशत की सब्सिडी का लाभ मिल सके।

संसदीय कार्य मंत्री ने सदन में आश्वासन दिया कि अध्यक्ष के निर्देशानुसार तथा सदन की मंशा के अनुरूप अधिनियम में पुनः संशोधन किया जाएगा।

इससे पहले श्री धारीवाल ने बताया कि 2 सितम्बर 2021 को जारी अधिसूचना के अन्तर्गत पूर्व वर्तमान मंत्री, पूर्व व वर्तमान लोकसभा, राज्यसभा एवं विधानसभा के सदस्य, पूर्व व वर्तमान नगर निगम के मेयर एवं पूर्व व वर्तमान जिला परिषद के अध्यक्ष होने पर इनको कृषक परिवार में शामिल नहीं किये जाने संबंधी अधिसूचना जारी की गई है। उन्होंने बताया कि राज पत्र में राजस्थान एग्रो प्रोसेसिंग, एग्रो बिजनेस, एग्रो एक्सपोर्ट प्रमोशन पॉलिसी में कृषक की परिभाषा में ऎसे व्यक्ति को कृषक माना गया है, जो सक्रिय रूप से फसल उगाएं तथा जिसकी आजीविका किसानी से चलती हो।

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