राज्य कृषि समाचार (State News)

ऑल इंडिया दाल मिल एसोसिएशन ने मुख्यमंत्री डॉ यादव से की मुलाकात

मध्यप्रदेश में  दाल के  लिए दलहन पर लगने वाले मंडी शुल्क को समाप्त करने का किया अनुरोध

08 अप्रैल 2026, इंदौर: ऑल इंडिया दाल मिल एसोसिएशन ने मुख्यमंत्री डॉ यादव से की मुलाकात – ऑल इंडिया दाल मिल एसोसिएशन के प्रतिनिधि मण्डल ने पूर्व सांसद  श्री कृष्णमुरारी मोघे  के नेतृत्व  में  मंगलवार को  म.प्र. के मुख्यमंत्री  डॉ. मोहन यादव  से वल्लभ भवन, भोपाल  में  मुलाकात की और उनसे अनुरोध किया कि सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम (MSME) में पंजीकृत दाल उद्योगों को मध्यप्रदेश के बाहर से दाल बनाने के लिए (प्रसंस्करण हेतु) मंगाये जाने वाले दलहन –
मसूर, उड़द, मूंग पर मण्डी शुल्क समाप्त करें ।

यह जानकारी देते हुए ऑल इंडिया दाल मिल एसोसिएशन के अध्यक्ष सुरेश अग्रवाल ने अपनी प्रेस विज्ञप्ति में बताया कि   मुख्यमंत्री डॉ यादव   को अवगत कराया गया कि मध्यप्रदेश के बाहर से दाल बनाने के लिए मंगाए जाने वाले दलहन पर मंडी शुल्क लगने के कारण मध्यप्रदेश में दिन-प्रतिदिन दाल उद्योग कम होते जा रहे है, प्रदेश में दाल उद्योगों को सुचारू रूप से चलाने और जीवित रखने के लिए मंडी शुल्क समाप्त करने की अत्यंत आवश्यकता है | मुख्यमंत्री  का ध्यान विभिन्न बिन्दुओं पर आकर्षित  कराया गया  – जैसे कि  भारत सरकार ने दालों पर 05% जीएसटी लगा रखा है, जबकि जीएसटी के पूर्व दालों पर किसी भी प्रकार का वाणिज्यिक कर, विक्रय कर या अन्य कोई टेक्स अथवा शुल्क नहीं था | माननीय उच्च न्यायालय ने दालों को कर मुक्त कर दिया था, फिर भी भारत सरकार ने 5% जीएसटी लगा दिया है | वर्तमान में मध्यप्रदेश में बहुराष्ट्रीय कंपनियों ने अनेक जगहों पर किसानों से सौदेबाजी के अनुबंध (BARGAINING CONTRACT) किए है तथा निजी (PRIVATE) अनाज मंडियां स्थापित हो रही है और जगह-जगह सागर चौपाल खोल कर कृषि उपज संग्रह की जा रही है । ऐसे  में मध्यप्रदेश की दाल इंडस्ट्रीज़ को देश के अन्य राज्यों – महाराष्ट्र, गुजरात, कर्नाटक,राजस्थान, छत्तीसगढ़ सहित अन्य राज्यों से मसूर, उड़द और मूंग आदि खरीद कर दाल बनाना पड़ती है | राज्य के बाहर से आने वाले दलहनों पर मंडी शुल्क चुकाने के बाद कृषि उपज मध्यप्रदेश में आती है, यहाँ पर भी बाहर से लाए गए दलहन पर मंडी शुल्क लगने के कारण दोहरा मंडी शुल्क भुगतान करना पड़ रहा है |  मध्यप्रदेश के  पड़ोसी  राज्यों छत्तीसगढ़, गुजरात, महाराष्ट्र सहित अनेक राज्यों में राज्य के बाहर से दाल बनाने के लिए मंगाए जाने वाले दलहन पर मंडी शुल्क नहीं लगता है।

विदेशों से आयातित दलहन समुद्र के रास्ते मुंबई पोर्ट पर आता है, महाराष्ट्र के – जलगांव, अकोला व नागपुर और गुजरात के – दाहोद, आणंद (वासद) सहित अन्य जिले दाल मिलों के बड़े सेंटर बन गए हैं, जहाँ काफी दाल मिलें हैं | म.प्र. के दाल मिलों को उनसे कड़ी प्रतिस्पर्धा करना पड़ती है , म.प्र. में मुंबई पोर्ट से दलहन मंगवाने पर डीज़ल की कीमत बढ़ने से ट्रक भाड़ा भी अधिक लगता है, साथ ही गुजरात से भी डीजल की कीमत अधिक होने की वजह से मध्यप्रदेश में ट्रक भाड़ा अधिक लग रहा है |  मध्यप्रदेश में उत्पादित दलहन – उड़द, मसूर, मूंग आदि से लगभग चार माह तक ही म.प्र. की दाल मिलें चल पाती हैं, क्योंकि मसूर, उड़द एवं मूंग का उत्पादन म.प्र. में बहुत कम होता है | कारखाने चलाने के लिए दाल इंडस्ट्रीज को अन्य प्रदेशों – गुजरात, महाराष्ट्र, राजस्थान, कर्नाटक, तमिलनाडु, आंध्रप्रदेश, छत्तीसगढ़ आदि राज्यों से दलहन मंगवाकर दाल बनाना पड़ती हैं |  पूर्व में मध्यप्रदेश के बाहर से दाल बनाने हेतु मंगाए जाने वाले कच्चे माल (दलहन) पर मण्डी शुल्क से छूट के कारण ही म.प्र. की दाल इंडस्ट्रीज चल पा रही थी और गुजरात, महाराष्ट्र, छत्तीसगढ़, राजस्थान, आंध्रप्रदेश, कर्नाटक सहित देश के अन्य राज्यों के दाल उद्योगों से कड़ी प्रतिस्पर्धा करके दाल मिल कारखाने म.प्र. में चल रहे थे |  मंडी शुल्क की छूट स्थाई रूप से नहीं मिलने से दाल उद्योगों द्वारा दाल बनाने के लिए म.प्र. के बाहर से कच्चा माल (दलहन) – मसूर, उड़द एवं मूंग मंगवाने पर  पडोसी  राज्यों महाराष्ट्र व गुजरात के अनुसार ही म.प्र. में पॉलिसी बनाना चाहिए | अन्य राज्यों मे मंडी शुल्क छत्तीसगढ़ में प्रति ट्रक दस लाख की कीमत पर 0.00% 0/- गुजरात में प्रति ट्रक दस लाख की कीमत पर 0.50% – 5000/- महाराष्ट्र में प्रति ट्रक दस लाख की कीमत पर (सेस) 0.80% – 8000/-और मध्यप्रदेश में प्रति ट्रक दस लाख की कीमत पर 1.20% 12000/- है।

मध्यप्रदेश में मंडी शुल्क खरीदी पर लगता है –  मध्यप्रदेश के व्यापारी व दाल मिलर्स मध्यप्रदेश  में  मसूर, उड़द,और मूंग दलहन खरीदने पर मंडी शुल्क का नियमित भुगतान कर रहे है | परंतु देश के अन्य राज्यों से दलहन मँगवाने पर भी मंडी शुल्क का भुगतान कर रहे है, एक ही कृषि उपज पर दो राज्यों में मंडी शुल्क देना पड़ रहा है।  मध्यप्रदेश औद्योगिक नीति एवं निवेश संवर्धन में मसूर, मूंग, उड़द और अन्य दलहनों पर पूर्ण रूप से मंडी शुल्क में छूट देने का अनुरोध किया गया ।  

मुख्यमंत्री डॉ यादव  ने प्रतिनिधि मण्डल के सभी प्रस्तावों एवं सुझावों को गंभीरतापूर्वक सुना एवं आश्वस्त किया है कि राज्य सरकार इस संबंध में अतिशीघ्र प्रदेश के कृषि आधारित दाल उद्योगों के हित में मध्यप्रदेश के बाहर से दाल बनाने के लिए मंगाए जाने वाले मसूर, मूंग, उड़द और अन्य दलहनों पर मंडी शुल्क से स्थाई रूप से छूट देने के लिए विचार कर उचित निर्णय लेगी।

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