राज्य कृषि समाचार (State News)

रबी फसलों में कीट-व्याधि की रोकथाम समय पर करें-डॉ.बड़ोदिया

30 दिसंबर 2025, बड़वानी: रबी फसलों में कीट-व्याधि की रोकथाम समय पर करें-डॉ.बड़ोदिया – कृषि विज्ञान केन्द्र बड़वानी के प्रधान वैज्ञानिक एवं प्रमुख डॉ एस. के. बड़ोदिया द्वारा विभिन्न विकासखण्डों में चना फसल लेने वाले कृषकों के प्रक्षेत्रों का भ्रमण किया , जहाँ कहीं-कही पर चना फसल में  इल्ली  एवं उकठा रोग आदि का प्रभाव देखने को मिले । आपने  रबी फसलों में कीट-व्याधि की रोकथाम समय पर करने की सलाह दी।

डॉ बड़ोदिया ने बताया कि  उकठा रोग में पौधे के पत्ते पीले पड़कर मुरझाने लगते है, जो कि शुरूआती संकेत है । पौधों के तने में सड़न के लक्षण दिखाई देते है जिससे पौधे कमजोर होने लगता है पौधे की जड़ प्रणाली पर फंगस का हमला हो जाने से जड़ सड़ जाती है और पौधे पोषक तत्व ग्रहण नही ंकर पाता है और पौधा पूर्ण सूख जाता है। ऐसे समय सिंचाई नहीं करनी चाहिए । चने की खड़ी फसल में उखटा रोग में लक्षण दिखने पर जैविक नियंत्रण हेतु ट्राइकोडर्मा का प्रयोग करें एवं रोग ग्रस्त पौधों को उखाड़कर जला देवें या दुर कहीं ले जाकर जमीन में  गाड़  देवें । इसके अलावा कार्बेन्डाजिम 12 प्रतिशत के साथ मेन्कोजेब 63 प्रतिशत डब्ल्यूपी 500 ग्राम प्रति एकड़ 200 लीटर पानी में घोलकर जड़ो के पास स्प्रे करे या थायोफिनेट मिथाइल 70 प्रतिशत डब्ल्यूपी 300 ग्राम प्रति एकड़ की दर से रेत या मिट्टी में मिलाकर भुरकाव करें या टेबूकोनाजोल 1 एम.एल. प्रतिलीटर पानी में घोलकर पौधों की जड़ों में ड्रेचिंग करें और जरूरत पड़ने पर इसे 10-12 दिन बाद दोहराये।

चना फसल में इल्ली की रोकथाम हेतु समन्वित कीटनाषी प्रबंधन अपनायें । खेत में टी आकार की 10-15 खुटिंयॉं लगावें तथा 4-5 फेरोमेंन ट्रेप लगावें । जैविक नियंत्रण हेतु बेसिलस थुरिंजिएसिस (बीटी) का छिड़काव करें । नीम तेल या एनएसकेई (5 प्रतिशत) का भी छिड़काव कर सकते है । इल्लियों के लिए इमामेक्टिन बेंजोएट 5 प्रतिशत एसजी (80-100 ग्राम/एकड़) या प्रोफेनोफॉस 50 ईएल (400 एम.एल /एकड़) 200 ली. पानी में घोलकर स्प्रे करें । अगर इल्लीयां बड़ी और ज्यादा होतो इडोक्साकार्ब 15.8 ईसी (300-350 ग्राम/एकड़) या क्लोरएन्ट्रानिलिप्रोल 18.5 एससी (100-150 एम.एल /एकड़) 200 लीटर पानी घोलकर स्प्रे करें ।

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