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राज्य कृषि समाचार (State News)

मक्का की पारंपरिक खेती छोड़ भिंडी उगाई, सिर्फ 0.50 हेक्टेयर में कमाए 55 हजार रुपए; जानिए कैसे बदली खेती  

22 सितंबर 2026, भोपाल: मक्का की पारंपरिक खेती छोड़ भिंडी उगाई, सिर्फ 0.50 हेक्टेयर में कमाए 55 हजार रुपए; जानिए कैसे बदली खेती – मध्यप्रदेश के झाबुआ जिले के विकासखंड राणापुर के ग्राम डाबतलाई निवासी किसान प्रेम चेना सिंगाड़ ने पारंपरिक मक्का की खेती से हटकर भिंडी की खेती अपनाई। उद्यानिकी विभाग की MIDH (पार्ट-2 जायाद) योजना के तहत सब्जी क्षेत्र विस्तार घटक का लाभ लेकर उन्होंने 0.50 हेक्टेयर में भिंडी की फसल लगाई। इससे उनकी शुद्ध आय बढ़कर करीब 55 हजार रुपए हो गई, जबकि पहले इसी क्षेत्र में मक्का की खेती से उन्हें लगभग 27 हजार रुपए की शुद्ध आय होती थी।

मक्का की खेती से होती थी 27 हजार की शुद्ध आय

योजना का लाभ लेने से पहले प्रेम सिंगाड़ अपने 0.50 हेक्टेयर कृषि क्षेत्र में मुख्य रूप से मक्का की खेती करते थे। इससे उन्हें करीब 15 क्विंटल उत्पादन मिलता था। मक्का की फसल तैयार करने और उत्पादन में लगभग 9 हजार रुपए की लागत आती थी, जबकि कुल आय करीब 36 हजार रुपए होती थी। लागत निकालने के बाद उनकी शुद्ध आय लगभग 27 हजार रुपए रहती थी। परिवार की आजीविका को बेहतर बनाने के लिए वे अधिक आय देने वाली फसल अपनाना चाहते थे। इसी दौरान उन्हें उद्यानिकी विभाग की MIDH योजना के तहत सब्जी क्षेत्र विस्तार की जानकारी मिली। विभाग के मार्गदर्शन में उन्होंने मक्का के स्थान पर भिंडी की खेती करने का निर्णय लिया।

योजना से मिली 10 हजार रुपए की अनुदान सहायता

MIDH (पार्ट-2 जायाद) योजना के सब्जी क्षेत्र विस्तार घटक के तहत प्रेम सिंगाड़ को 0.50 हेक्टेयर में भिंडी उत्पादन के लिए 10 हजार रुपए की अनुदान सहायता दी गई। योजना से मिले सहयोग से उन्हें सब्जी उत्पादन की दिशा में आगे बढ़ने में मदद मिली। उन्होंने 0.50 हेक्टेयर में भिंडी की फसल लगाई। इसमें उनकी कुल लागत करीब 25 हजार रुपए रही। बेहतर उत्पादन से उन्हें लगभग 20 क्विंटल भिंडी प्राप्त हुई, जिससे करीब 80 हजार रुपए की कुल आय हुई। उत्पादन लागत निकालने के बाद उन्हें करीब 55 हजार रुपए की शुद्ध आय मिली।

शुद्ध आय में 28 हजार रुपए की बढ़ोतरी

मक्का की खेती से प्रेम सिंगाड़ को करीब 27 हजार रुपए की शुद्ध आय होती थी, जबकि भिंडी की खेती से यह बढ़कर लगभग 55 हजार रुपए हो गई। इस तरह फसल में बदलाव और उद्यानिकी योजना का लाभ लेने से उनकी शुद्ध आय में करीब 28 हजार रुपए की वृद्धि हुई। प्रेम सिंगाड़ की यह सफलता बताती है कि फसल विविधीकरण और उद्यानिकी फसलों को अपनाकर किसान अपनी खेती को अधिक लाभकारी बना सकते हैं। योजना से मिली आर्थिक सहायता और विभागीय मार्गदर्शन ने उन्हें पारंपरिक फसल से हटकर सब्जी उत्पादन की ओर बढ़ने में मदद की। 

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