हिमाचल के मंडी में प्राकृतिक खेती से सुनील कुमार की सालाना डेढ़ से दो लाख की कमाई
30 अक्टूबर 2026, मंडी (हिमाचल प्रदेश): हिमाचल के मंडी में प्राकृतिक खेती से सुनील कुमार की सालाना डेढ़ से दो लाख की कमाई – गोपालपुर विकास खंड के खनोट गांव में रहने वाले किसान सुनील कुमार पिछले कई वर्षों से रासायनिक खाद और कीटनाशकों को पूरी तरह छोड़कर प्राकृतिक खेती कर रहे हैं। महज दो बीघा जमीन से वे अब सालाना डेढ़ से दो लाख रुपये तक की आय कमा रहे हैं।
सुनील कुमार अपने खेत में कद्दू, खीरा, लौकी, करेला, भिंडी, टमाटर, शिमला मिर्च, अदरक, अरबी, जिमीकंद के साथ मक्का और गेहूं भी उगाते हैं। उनका कहना है कि रासायनिक खाद-कीटनाशक बंद करने के बाद खेती की लागत घटी है और मिट्टी की उर्वरता में भी सुधार आया है।
स्ट्रॉबेरी ने दिया नया मुनाफा
बीते साल सुनील कुमार ने पहली बार स्ट्रॉबेरी की खेती शुरू की। उन्होंने पौधों पर लगभग 10 से 15 हजार रुपये का निवेश किया, जिससे पहले ही सीजन में 60 से 70 हजार रुपये की आमदनी हुई। इस तरह उन्हें करीब 50 हजार रुपये का शुद्ध मुनाफा मिला।
स्ट्रॉबेरी की सफलता के बाद अब वे इसका दायरा आगे बढ़ाने की योजना बना रहे हैं। प्राकृतिक खेती के तरीकों की वजह से फल का स्वाद और गुणवत्ता दोनों बेहतर मिल रहे हैं, जिससे स्थानीय बाजार में भी मांग बढ़ी है।
सरकारी योजना और एमएसपी का मिला सहारा
सुनील कुमार को राज्य सरकार की प्राकृतिक खेती खुशहाल किसान योजना के तहत कृषि विभाग और आत्मा परियोजना से भी मदद मिली है। इसमें देसी गाय के लिए अधिकतम 25 हजार रुपये, उसके परिवहन के लिए 5 हजार रुपये, गौशाला का पक्का फर्श बनाने के लिए 8 हजार रुपये और 200 लीटर के प्लास्टिक ड्रम पर 750 रुपये तक की सब्सिडी शामिल है।
उनके मुताबिक प्राकृतिक तरीके से उगाए गए गेहूं, मक्का और कच्ची हल्दी के लिए न्यूनतम समर्थन मूल्य तय होने से भी किसानों को बड़ा आर्थिक सहारा मिला है। उन्होंने इसके लिए राज्य सरकार का आभार जताया और कहा कि अगर ज्यादा किसान प्राकृतिक खेती अपनाएं तो गांव की अर्थव्यवस्था और मजबूत होगी।
आपने उपरोक्त समाचार कृषक जगत वेबसाइट पर पढ़ा: हमसे जुड़ें
> नवीनतम कृषि समाचार और अपडेट के लिए आप अपने मनपसंद प्लेटफॉर्म पे कृषक जगत से जुड़े – गूगल न्यूज़, व्हाट्सएप्प
> कृषक जगत अखबार की सदस्यता लेने के लिए यहां क्लिक करें – घर बैठे विस्तृत कृषि पद्धतियों और नई तकनीक के बारे में पढ़ें
> कृषक जगत ई-पेपर पढ़ने के लिए नीचे दिए गए लिंक पर क्लिक करें: E-Paper
> कृषक जगत की अंग्रेजी वेबसाइट पर जाने के लिए नीचे दिए गए लिंक पर क्लिक करें: Global Agriculture


