हरियाणा में गन्ना किसानों के लिए नई तकनीक और कृषि यंत्रों पर मिलेगा अनुदान, 31 दिसंबर तक आवेदन
13 अक्टूबर 2026, चंडीगढ़: हरियाणा में गन्ना किसानों के लिए नई तकनीक और कृषि यंत्रों पर मिलेगा अनुदान, 31 दिसंबर तक आवेदन – हरियाणा के कृषि एवं किसान कल्याण विभाग ने गन्ना किसानों के लिए “गन्ना तकनीकी उद्देश्य परियोजना 2026-27” के तहत नई बिजाई तकनीक और आधुनिक कृषि यंत्र अपनाने पर अनुदान देने की घोषणा की है। शरदकालीन यानी अक्टूबर-नवंबर में बिजाई करने वाले किसान इसके लिए 1 अक्टूबर से 31 दिसंबर 2026 तक आवेदन कर सकते हैं।
वसंत और ग्रीष्मकालीन यानी अप्रैल के बाद बिजाई करने वाले किसानों के लिए आवेदन की अंतिम तारीख 30 सितंबर 2026 थी, जो बीत चुकी है। अब सिर्फ शरदकालीन बिजाई करने वाले किसान ही इस दौर में आवेदन कर सकते हैं।
किन तकनीकों और यंत्रों पर मिलेगा फायदा
योजना के तहत 4 फीट चौड़ी कतार में ट्रेंच विधि से बिजाई, सिंगल-बड और बड-चिप तकनीक, फाउंडेशन सीड नर्सरी की स्थापना, बीज उपचार और पेड़ी प्रबंधन जैसी आधुनिक तकनीकों को बढ़ावा दिया जाएगा। विभाग के मुताबिक इन तकनीकों से बीज की खपत कम होती है और जमाव बेहतर रहता है।
कृषि यंत्रों में गन्ना सेट ट्रीटमेंट डिवाइस, पावर वीडर, रटून मैनेजर, रोटावेटर, सब-सोयलर और ट्रैक्टर चालित स्प्रेयर पर अनुदान मिलेगा। इसके साथ ही गन्ना कटर, स्ट्रिपर, प्लांटर और मिनी ट्रैक्टर जैसे यंत्र भी सब्सिडी की सूची में शामिल हैं। विभाग ने अनुदान की सटीक राशि या प्रतिशत की जानकारी अलग से जारी नहीं की है, इसलिए किसानों को पोर्टल पर आवेदन के समय ही सही आंकड़ा पता चलेगा।
कैसे और कहां करें आवेदन
आवेदन आधिकारिक पोर्टल agriharyana.gov.in पर ऑनलाइन करना होगा। उप कृषि निदेशक जसविंद्र सिंह ने बताया कि इस परियोजना का मुख्य मकसद गन्ने की पैदावार बढ़ाना और साथ ही पानी व श्रम दोनों की बचत करना है। उन्होंने पात्र किसानों से तय समय सीमा के भीतर आवेदन करने की अपील की है।
गन्ना हरियाणा के कई जिलों, खासकर यमुनानगर, करनाल और कुरुक्षेत्र में एक प्रमुख नकदी फसल है। मशीनीकरण और बेहतर बिजाई तकनीक से राज्य में गन्ने की प्रति एकड़ उपज बढ़ाने की कोशिशें पिछले कुछ सालों से चल रही हैं। विभाग का कहना है कि ट्रेंच विधि और पेड़ी प्रबंधन जैसी तकनीकों को अपनाने वाले किसानों को मजदूरी की लागत में भी राहत मिलती है, क्योंकि इनमें मशीनों का इस्तेमाल बढ़ जाता है।
जिन किसानों ने शरदकालीन बिजाई की योजना बनाई है, उनके लिए विभाग ने सुझाव दिया है कि वे आवेदन से पहले अपने क्षेत्र के कृषि विकास अधिकारी से यंत्रवार अनुदान राशि की जानकारी ले लें, ताकि आवेदन प्रक्रिया में देरी न हो।
परंपरागत तरीके में किसान गन्ने के पूरे टुकड़े यानी सेट बोते हैं, जिससे बीज की खपत ज्यादा होती है। बड-चिप तकनीक में सिर्फ एक आंख (बड) वाला छोटा टुकड़ा नर्सरी में तैयार करके फिर खेत में रोपा जाता है, जिससे बीज की मात्रा काफी कम लगती है और पौधे ज्यादा एक समान निकलते हैं। ट्रेंच विधि में चौड़ी कतार में नाली बनाकर बिजाई होती है, जिससे सिंचाई का पानी बेहतर तरीके से इस्तेमाल होता है और बाद में मशीन से निराई-गुड़ाई करना भी आसान हो जाता है।
पेड़ी प्रबंधन का मतलब है कि एक बार गन्ना काटने के बाद जड़ों से निकलने वाली नई फसल की सही देखभाल करना, ताकि अगली बार बिना नई बिजाई के भी अच्छी पैदावार मिल सके। इससे किसान की लागत कम होती है, क्योंकि हर साल नए बीज पर खर्च नहीं करना पड़ता।
हरियाणा में गन्ना मुख्य रूप से यमुनानगर, करनाल, कुरुक्षेत्र, अंबाला और पानीपत जैसे जिलों में उगाया जाता है, जहां कई सहकारी और निजी चीनी मिलें इस पर निर्भर हैं। मशीनीकरण बढ़ने से जहां किसानों को मजदूरों की कमी से राहत मिलती है, वहीं पैदावार बढ़ने से मिलों को भी गन्ने की नियमित और पर्याप्त सप्लाई मिलती रहती है। कृषि विभाग का मानना है कि अगर ज्यादा किसान बड-चिप और ट्रेंच विधि की तरफ आते हैं, तो आने वाले वर्षों में राज्य की औसत गन्ना उत्पादकता में भी सुधार देखने को मिल सकता है।
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