Success Story: प्राकृतिक खेती ने बदली झाबुआ के किसान की जिंदगी, 50 हजार से 1.5 लाख रुपये सालाना पहुंची कमाई
01 अगस्त 2026, भोपाल: Success Story: प्राकृतिक खेती ने बदली झाबुआ के किसान की जिंदगी, 50 हजार से 1.5 लाख रुपये सालाना पहुंची कमाई – प्राकृतिक खेती किसानों के लिए कम लागत में अधिक मुनाफे का माध्यम बनती जा रही है। मध्यप्रदेश के झाबुआ जिले के ग्राम खेड़ी निवासी प्रगतिशील किसान विमल भाबोर इसकी एक मिसाल हैं। खेती की पारंपरिक पद्धति से जहां उन्हें सालाना करीब 50 हजार रुपये का लाभ मिलता था, वहीं प्राकृतिक खेती अपनाने के बाद उनकी वार्षिक आय बढ़कर करीब 1 लाख से 1.50 लाख रुपये हो गई है। इतना ही नहीं, जैव संसाधन केंद्र, नर्सरी, प्राकृतिक फल-सब्जियों और वर्मी कम्पोस्ट जैसे अतिरिक्त स्रोतों से भी उन्हें अच्छी आय होने लगी है।
प्रशिक्षण से मिली नई दिशा
विमल भाबोर के पास 25 बीघा कृषि भूमि है और वे खेती के साथ पशुपालन भी करते हैं। उन्होंने बताया कि कृषि विभाग के मार्गदर्शन, प्रशिक्षण, भ्रमण और कृषक संगोष्ठियों से उन्हें नई कृषि तकनीकों को सीखने का अवसर मिला। वे पिछले पांच वर्षों से जैविक खेती और दो वर्षों से प्राकृतिक खेती कर रहे हैं।
खेत पर बनाया जैव संसाधन केंद्र
राष्ट्रीय प्राकृतिक खेती मिशन के तहत विमल भाबोर ने अपने खेत पर जैव संसाधन केंद्र (बीआरसी) स्थापित किया है। यहां वे जीवामृत, बीजामृत और अन्य प्राकृतिक आदान तैयार करते हैं। इनका उपयोग अपने खेत में करने के साथ-साथ आसपास के किसानों को भी उपलब्ध कराते हैं। वर्तमान में वे प्राकृतिक तरीके से सब्जियों, फलों और अन्य फसलों की खेती कर रहे हैं।
कई स्रोतों से बढ़ी आमदनी
विमल भाबोर ने बताया कि प्राकृतिक खेती अपनाने के बाद उनकी आय में लगातार बढ़ोतरी हुई है। पहले जहां खेती से उन्हें प्रतिवर्ष लगभग 50 हजार रुपये का लाभ मिलता था, वहीं अब यह बढ़कर करीब 1 लाख से 1.50 लाख रुपये हो गया है।
इसके अलावा मार्च से जून 2026 के दौरान उन्हें विभिन्न गतिविधियों से अतिरिक्त आय भी हुई। जैव संसाधन केंद्र से 5,500 रुपये, नर्सरी से लगभग 1.50 लाख रुपये, प्राकृतिक सब्जियों एवं फलों की बिक्री से लगभग 1.60 लाख रुपये तथा वर्मी कम्पोस्ट खाद से करीब 6 हजार रुपये की आमदनी हुई।
अन्य किसानों को भी कर रहे प्रेरित
विमल भाबोर केवल अपने खेत तक सीमित नहीं हैं, बल्कि प्राकृतिक खेती के अनुभव अन्य किसानों के साथ भी साझा कर रहे हैं। उनके खेत पर तैयार होने वाले प्राकृतिक कृषि आदानों का उपयोग आसपास के किसान भी कर रहे हैं, जिससे क्षेत्र में प्राकृतिक खेती को बढ़ावा मिल रहा है।
मुख्यमंत्री ने की सराहना
झाबुआ जिले के थांदला में आयोजित प्रदेश स्तरीय स्व-सहायता समूहों के क्षमतावर्धन एवं ऋण वितरण कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने विमल भाबोर से संवाद किया और उनके प्रयासों की सराहना की। मुख्यमंत्री ने कहा कि प्राकृतिक खेती किसानों की आय बढ़ाने, उत्पादन लागत कम करने, मिट्टी की उर्वरता बनाए रखने और टिकाऊ कृषि व्यवस्था विकसित करने का प्रभावी माध्यम है। उन्होंने अन्य किसानों से भी प्राकृतिक खेती अपनाने और इससे जुड़ने का आह्वान किया।
विमल भाबोर ने प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी और मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि सरकार की योजनाओं और मार्गदर्शन से उन्हें प्राकृतिक खेती अपनाने तथा आत्मनिर्भर बनने की नई दिशा मिली है।
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