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राज्य कृषि समाचार (State News)

हरियाणा में बागवानी फसलों पर प्रति एकड़ 1.40 लाख रुपये तक अनुदान

06 अक्टूबर 2026, कुरुक्षेत्र: हरियाणा में बागवानी फसलों पर प्रति एकड़ 1.40 लाख रुपये तक अनुदान – हरियाणा सरकार ने बागवानी फसलों की खेती बढ़ाने के लिए किसानों को प्रति एकड़ 8 हजार से लेकर 1 लाख 40 हजार रुपये तक की आर्थिक सहायता देने की योजना शुरू की है। कुरुक्षेत्र के उपायुक्त विश्राम कुमार मीणा ने किसानों से समय पर आवेदन करने की अपील की है।

योजना के तहत फलों के बाग लगाने पर अधिकतम 5 एकड़ तक प्रति एकड़ 24,500 से 1,40,000 रुपये तक अनुदान मिलेगा। यह राशि फल की किस्म के आधार पर अलग-अलग तय की गई है, यानी लंबी अवधि में फल देने वाले पेड़ों पर प्रति एकड़ सहायता ज्यादा रहेगी।

हरियाणा में धान-गेहूं के परंपरागत फसल चक्र से जमीन के नीचे का पानी लगातार नीचे जा रहा है, जिसकी वजह से राज्य सरकार लंबे समय से किसानों को कम पानी वाली बागवानी और नकदी फसलों की तरफ मोड़ने की कोशिश कर रही है। बागवानी विभाग का कहना है कि यह योजना उसी दिशा में एक बड़ा कदम है।

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किन फसलों पर कितनी सब्सिडी

मसालों की खेती पर प्रति एकड़ 15 हजार से 30 हजार रुपये और फूलों की खेती पर 8 हजार से 40 हजार रुपये तक की सहायता मिलेगी। सुगंधित पौधों की खेती पर अधिकतम 5 एकड़ तक प्रति एकड़ 8 हजार रुपये दिए जाएंगे।

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सामान्य वर्ग के किसानों को सब्जियों की खेती पर अधिकतम 5 एकड़ तक प्रति एकड़ 15 हजार रुपये मिलेंगे, जबकि अनुसूचित जाति के किसानों को अधिकतम 1 एकड़ तक प्रति एकड़ 25,500 रुपये की उच्च दर से सहायता दी जाएगी। यह राशि सीधे किसानों के बैंक खातों में भेजी जाएगी, जिससे बिचौलियों की भूमिका खत्म हो जाती है।

आवेदन के लिए जरूरी दस्तावेज

इस योजना का लाभ लेने के लिए किसानों को “मेरी फसल-मेरा ब्यौरा” पोर्टल और हॉर्टनेट पोर्टल पर पंजीकरण कराना अनिवार्य है। आवेदन के साथ परिवार पहचान पत्र, बैंक खाते का विवरण और जरूरत पड़ने पर जाति प्रमाण पत्र देना होगा।

सब्सिडी पाने के लिए किसानों को मल्चिंग, ड्रिप सिंचाई, लो टनल या बांस की स्टेकिंग जैसी आधुनिक तकनीकों में से कोई एक अपनाना जरूरी है। विभाग का कहना है कि यह शर्त इसलिए रखी गई है ताकि अनुदान का इस्तेमाल सिर्फ परंपरागत तरीके से नहीं, बल्कि पानी बचाने वाली आधुनिक तकनीक अपनाने में भी हो।

आवेदन के समय किसानों को पोर्टल पर अपनी जमीन का ब्यौरा और उगाई जाने वाली फसल की जानकारी दर्ज करनी होगी। अधिक जानकारी के लिए किसान टोल-फ्री नंबर 1800-180-2021 पर संपर्क कर सकते हैं या hortharyana.gov.in वेबसाइट देख सकते हैं।

बागवानी फसलों में परंपरागत धान-गेहूं की तुलना में प्रति एकड़ आय ज्यादा होती है, और पानी की खपत भी कम रहती है, इसलिए राज्य सरकार किसानों को इस ओर प्रोत्साहित कर रही है। कुरुक्षेत्र प्रशासन ने गांव स्तर पर भी किसानों को इस योजना की जानकारी देने के लिए विशेष बैठकें करने की बात कही है।

अभी तक हरियाणा में ज्यादातर छोटे किसान फल-सब्जियों की खेती को जोखिम भरा मानते रहे हैं, क्योंकि बाग या सब्जी की खेती शुरू करने में शुरुआती लागत ज्यादा आती है और फायदा दिखने में समय लगता है। इतनी बड़ी सब्सिडी मिलने से यह शुरुआती बोझ काफी हद तक कम हो जाएगा, जिससे ज्यादा किसान इस ओर आकर्षित हो सकते हैं।

फलों के बाग, सब्जी, मसाले और फूल, हर श्रेणी के लिए अलग-अलग दर तय करने के पीछे विभाग का तर्क है कि हर फसल की शुरुआती लागत और देखभाल का खर्च अलग-अलग होता है। इसी वजह से एक समान दर के बजाय फसल के हिसाब से सब्सिडी तय की गई है, ताकि किसानों को वाकई जरूरत के मुताबिक मदद मिल सके।

अनुसूचित जाति के किसानों के लिए सब्जियों पर ज्यादा सब्सिडी दर रखी गई है, भले ही उनके लिए अधिकतम एकड़ की सीमा सामान्य वर्ग से कम है। इससे छोटी जोत वाले किसानों को भी बागवानी शुरू करने का बराबर मौका मिल सकेगा।

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