राज्य कृषि समाचार (State News)

कृषि महाविद्यालय खंडवा के विद्यार्थी बना रहे हैं “डिजिटल हरबेरियम”

प्रकृति से जुड़ने का सबसे आधुनिक तरीका – “डिजिटल हरबेरियम।”

लेखक – डॉ दीपक हरि रानडे, डॉ मनोज कुमार कुरील एवम डॉ स्मिता अग्रवाल, कृषि महाविद्यालय, खंडवा – 450001

09 अक्टूबर 2025, भोपाल: कृषि महाविद्यालय खंडवा के विद्यार्थी बना रहे हैं “डिजिटल हरबेरियम” –

पौधों की तस्वीरें लेकर बनाया गया बारकोड, एक स्कैन में मिलेगी वैज्ञानिक जानकारी

कृषि महाविद्यालय खंडवा के बी.एससी. एग्रीकल्चर के विद्यार्थियों ने कृषि शिक्षा को तकनीकी रूप से सशक्त बनाने की दिशा में एक अभिनव कदम उठाया है। विद्यार्थियों ने महाविद्यालय परिसर में मौजूद विभिन्न पेड़-पौधों की तस्वीरें लेकर उनका डिजिटल रिकॉर्ड तैयार किया, और प्रत्येक पौधे के लिए विशेष बारकोड (QR कोड) बनाया गया है। इस बारकोड को स्कैन करते ही उस पौधे से संबंधित पूरी जानकारी मोबाइल स्क्रीन पर दिखाई देती है।

यह  “डिजिटल हरबेरियम” के रूप में विकसित की जा रही है। इसका उद्देश्य महाविद्यालय परिसर में मौजूद वनस्पति विविधता का संरक्षण, उसका वैज्ञानिक वर्गीकरण, और विद्यार्थियों को डिजिटल तकनीक से जोड़ना है।

पौधों का दस्तावेजीकरण

कृषि महाविद्यालय खंडवा के विद्यार्थियों ने पहले कॉलेज परिसर में स्थित सभी प्रमुख पेड़-पौधों की पहचान की। इसके बाद प्रत्येक पौधे की स्पष्ट तस्वीरें खींची गईं, जिनके आधार पर उनका वैज्ञानिक नाम, स्थानीय नाम, परिवार, उपयोग, औषधीय महत्व, पारिस्थितिक भूमिका और अन्य विवरण एकत्र किए गए।

इन सभी जानकारियों को एक डिजिटल डेटाबेस में संग्रहीत कर प्रत्येक पौधे को एक अद्वितीय बारकोड प्रदान किया गया। अब कोई भी व्यक्ति जब उस बारकोड को मोबाइल से स्कैन करता है, तो उसे उस पौधे से जुड़ी पूरी जानकारी तुरंत प्राप्त हो जाती है।

 परिसर की जैव विविधता

कृषि महाविद्यालय खंडवा का परिसर हरियाली और जैव विविधता से समृद्ध है। यहां पाए जाने वाले खिरनी, चिलबिल, रतनजोत, अमलतास, नीम, करंज, गुलमोहर, कदंब, सीताफल, आम, बबूल जैसे अनेक पौधों को इसके अंतर्गत शामिल किया गया है। विद्यार्थी लगातार नए पौधों की पहचान कर उन्हें भी इस डिजिटल संग्रह में जोड़ रहे हैं।

 तकनीक और नवाचार से सीखने की नई दिशा

यह पहल पारंपरिक शिक्षा को आधुनिक रूप देती है और विद्यार्थियों को डेटा प्रबंधन, तकनीकी उपयोग, डिजिटल डॉक्यूमेंटेशन और अनुसंधान की दिशा में आगे बढ़ने के लिए प्रेरित करती है।

 शिक्षा, समाज और पर्यावरण पर प्रभाव

“डिजिटल हरबेरियम” जैसी पहलें न केवल शैक्षणिक दृष्टि से महत्वपूर्ण हैं, बल्कि समाज और पर्यावरण के लिए भी उपयोगी सिद्ध हो रही हैं।
 इससे विद्यार्थियों में पर्यावरणीय चेतना, प्रकृति के प्रति जिम्मेदारी और वैज्ञानिक दृष्टिकोण विकसित हो रहा है।
 साथ ही, स्थानीय समुदाय और आगंतुक भी इन बारकोड्स को स्कैन कर पौधों के बारे में आसानी से जान सकते हैं, जिससे लोगों में वनस्पति ज्ञान और संरक्षण की भावना को बढ़ावा मिलता है।
 यह पहल इस बात का प्रमाण है कि कृषि शिक्षा अब केवल खेतों तक सीमित नहीं रही, बल्कि तकनीक, नवाचार और पर्यावरणीय चेतना के साथ आगे बढ़ रही है।

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