शाजापुर : कृष्णमृग एवं नीलगाय सहित 171 वन्यजीवों का रेस्क्यू
30 अक्टूबर 2026, शाजापुर: शाजापुर : कृष्णमृग एवं नीलगाय सहित 171 वन्यजीवों का रेस्क्यू – मालवा अंचल के शाजापुर–शुजालपुर क्षेत्र में कृष्णमृग (ब्लैकबक) कैप्चर एवं स्थानांतरण अभियान का द्वितीय चरण जारी है।अभियान के अंतर्गत 162 कृष्णमृग एवं 9 नीलगाय सहित कुल 171 वन्यजीवों का सफलतापूर्वक रेस्क्यू किया गया। यह इस वर्ष अब तक एक ही दिन में किया गया सर्वाधिक रेस्क्यू है। यह उपलब्धि अभियान में तैनात वन अधिकारियों, पशु चिकित्सकों, प्रशिक्षित मैदानी कर्मचारियों और दक्षिण अफ्रीकी विशेषज्ञ दल के समन्वित प्रयासों को दर्शाती है।
अभियान का मुख्य उद्देश्य मानव–वन्यप्राणी द्वंद एवं फसल क्षति को कम करना, प्रभावित ग्रामीण समुदायों को राहत प्रदान करना तथा वन्यजीवों का सुरक्षित स्थानांतरण सुनिश्चित करना है। अभियान में दक्षिण अफ्रीकी विशेषज्ञ संस्था कंजर्वेशन सॉल्यूशंस का तकनीकी सहयोग प्राप्त हो रहा है। वन विभाग की टीम निर्धारित प्रक्रियाओं के अनुसार रेस्क्यू, हैण्डलिंग एवं परिवहन का कार्य कर रही है तथा वन्यजीवों की सुरक्षा एवं कल्याण को प्राथमिकता दी जा रही है। वन विभाग ने जिला प्रशासन, जनप्रतिनिधियों एवं स्थानीय ग्रामीणों के सहयोग के लिए आभार व्यक्त करते हुए आमजन से अभियान के सुचारू संचालन में निरंतर सहयोग प्रदान करने की अपील की है।
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने गत दिनों शाजापुर जिले में संचालित कृष्णमृग (ब्लैकबक) रेस्क्यू एवं स्थानांतरण अभियान के अंतर्गत बोमा स्थल का भ्रमण कर अभियान में अपनाई जा रही वैज्ञानिक पद्धति का अवलोकन किया। इस अवसर पर अभियान के नोडल अधिकारी एवं मुख्य वन संरक्षक डॉ. किरण बिसेन ने मुख्यमंत्री को बोमा तकनीक की कार्यप्रणाली, उसके वैज्ञानिक पहलुओं तथा वन्यजीवों को सुरक्षित तरीके से रेस्क्यू और स्थानांतरित करने की प्रक्रिया के संबंध में विस्तार से जानकारी दी।
मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने बोमा स्थल का निरीक्षण किया तथा हेलीकॉप्टर की सहायता से कृष्णमृगों को निर्धारित दिशा में ले जाने की प्रक्रिया को प्रत्यक्ष देखा। उन्होंने अभियान में शामिल वन विभाग के अधिकारियों, मैदानी कर्मचारियों, पशु चिकित्सकों एवं दक्षिण अफ्रीकी विशेषज्ञ संस्था कंजर्वेशन सॉल्यूशंस की टीम के सदस्यों के साथ सामूहिक छायाचित्र खिंचवाया तथा उनके कार्यों की सराहना करते हुए सभी को प्रोत्साहित किया। इसके पश्चात मुख्यमंत्री ने वन्यजीवों के परिवहन के लिए तैयार ट्रकों का निरीक्षण किया। उन्होंने ट्रकों पर चढ़कर रेस्क्यू किए गए वन्यजीवों को देखा तथा पशु चिकित्सकों से रेस्क्यू के बाद की प्रक्रिया, वन्यजीवों की देखभाल, परिवहन व्यवस्था और आगे की कार्यवाही के संबंध में जिज्ञासा पूर्वक जानकारी प्राप्त की।
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