राज्य कृषि समाचार (State News)

पन्ना में वैज्ञानिक परामर्शदात्री समिति की बैठक संपन्न

13 जून 2026, पन्नापन्ना में वैज्ञानिक परामर्शदात्री समिति की बैठक संपन्न – कृषि विज्ञान केन्द्र पन्ना की वैज्ञानिक परामर्शदात्री समिति (प्री-खरीफ) की बैठक गत बुधवार को जवाहरलाल नेहरू कृषि विश्वविद्यालय जबलपुर के कुलगुरू प्रो. प्रमोद कुमार मिश्रा की अध्यक्षता में संपन्न हुई।

केन्द्र के वरिष्ठ वैज्ञानिक एवं प्रमुख डॉ. पी.एन. त्रिपाठी ने केन्द्र की रबी 2025-26 की प्रगति प्रतिवेदन एवं खरीफ 2026 की प्रस्तावित कार्य योजना का प्रस्तुतीकरण पावर प्वाइंट प्रेजेंटेशन के माध्यम से दिया। कुलगुरू ने कृषकों को खेती में जोखिम कम करने के लिए समन्वित खेती प्रणाली अपनाने पर विशेष सलाह दी। उन्होंने बताया कि पशुपालन के माध्यम से दुग्ध उत्पादन में वृद्धि हेतु अच्छे नस्ल के पशुओं के साथ संतुलित आहार के लिए हरा चारा की खेती को बढ़ावा देने की विशेष आवश्यकता है। साथ ही खरीफ मौसम में फसलों का बेहतर उत्पादन प्राप्त करने के लिए खरपतवार नियंत्रण के विभिन्न आयाम को अपनाने तथा धान की सीधी बुवाई करने की सलाह भी दी।

कार्यक्रम के मुख्य अतिथि एवं विवि के प्रमण्डल सदस्य संजीव कुमार खरे ने खरीफ मौसम में मक्का की खेती एवं जैव उर्वरकों का कृषकों के द्वारा उपयोग को प्रोत्साहित करने की सलाह दी। अधिष्ठाता कृषि संकाय डॉ. धीरेन्द्र खरे ने उड़द फसल की खेती में पीला मोजेक रोग प्रतिरोधी प्रजाति का चयन करने एवं कृषकों को बीज उपलब्धता कराने की सलाह दी। इस क्रम में संचालक विस्तार  सेवाएं  डॉ. टी.आर. शर्मा ने जिले में कृषकों द्वारा खेती किए जा रहे परम्परागत बीजों के संरक्षण पर विशेष जोर दिया। साथ ही मृदा स्वास्थ्य में सुधार हेतु जैव उर्वरकों का इस्तेमाल तथा प्राकृतिक खेती अपनाने की सलाह दी। संचालक प्रक्षेत्र ने उर्वरक एवं जल मांग की कम आवश्यकता को देखते हुए मोटे अनाज की खेती को बढ़ावा देने की सलाह दी।

बैठक में उप संचालक कृषि श्री ओमप्रकाश तिवारी ने कृषकों को ई-टोकन के माध्यम से उर्वरकों के क्रय हेतु कृषक पहचान पत्र बनवाने एवं राष्ट्रीय दलहन एवं तिलहन मिशन अंतर्गत दलहनी एवं तिलहनी फसलों की खेती बढ़ाने की सलाह दी। परियोजना संचालक (आत्मा) ने कृषकों को मिट्टी परीक्षण उपरांत उर्वरकों की मात्रा फसलों में देने की उपयोगिता पर प्रकाश डाला। उपसंचालक पशु चिकित्सा ने विभाग की शासकीय योजनाओं के बारे में कृषकों को अवगत कराया तथा कृषकों को पशुपालन एवं बकरीपालन करने की सलाह दी।

सहायक संचालक उद्यानिकी ने जिले में ड्रैगन फ्रूट, परवल तथा गेंदे की खेती के माध्यम से कृषकों की आमदनी बढ़ाने की बात कही। ज्ञानेन्द्र तिवारी ने जिले में हाईब्रिड नेपियर (हरा चारा हेतु) की खेती को बढ़ावा देने की बात कही। विनोद निरंजन ने कृषकों के प्रक्षेत्र पर प्राकृतिक खेती मॉडल विकसित करने की आवश्यकता बताई, जबकि कृषि अभियांत्रिकी से श्री नवीन ने कृषकों को जिले में स्थापित 80 कस्टम हायरिंग केन्द्र का लाभ लेकर खेती में मशीनीकरण अपनाने की सलाह दी।

कार्यक्रम में उपस्थित प्रगतिशील कृषक शिव सिंह एवं महिला कृषक कविता सिंह ने परम्परागत बीजों के संरक्षण एवं प्राकृतिक खेती से संबंधित अपने अनुभव साझा किये। सुब्रतो मलिक द्वारा परवल की खेती एवं ओमप्रकाश मौर्या ने चना फसल में रोग प्रबंधन के अपने अनुभव साझा किए गए। कार्यक्रम में अधिष्ठाता कृषि महाविद्यालय पन्ना से डॉ. पी.के. त्यागी, केन्द्र के वैज्ञानिक डॉ. आर.के. जायसवाल, डॉ. रणविजय प्रताप सिंह, रितेश बागोरा एवं कर्मचारीगण देशराज प्रजापति, जया कोरी, संदीप त्रिपाठी, प्राकृतिक खेती कृषक मास्टर ट्रेनर किशोर सिंह, कृषक अशोक सिंह सहित इफको संस्था से सुशील कुमार शुक्ला एवं प्रदीप तिवारी, नरेन्द्र शर्मा, उमाकांत त्रिपाठी, आशीष वर्मा, कुन्दन कुमार, कैलाश साहू भी उपस्थित रहे।

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