राज्य कृषि समाचार (State News)

रायसेन की सरूपी बाई बनीं ‘ड्रोन दीदी’, 8–10 मिनट में करती हैं खेतों में कीटनाशक छिड़काव; सालाना कमा रही ₹1.30 लाख

31 दिसंबर 2025, रायसेन: रायसेन की सरूपी बाई बनीं ‘ड्रोन दीदी’, 8–10 मिनट में करती हैं खेतों में कीटनाशक छिड़काव; सालाना कमा रही ₹1.30 लाख – रायसेन जिले के सांची विकासखंड के ग्राम रतनपुर गिरधारी की रहने वाली श्रीमती सरूपी बाई आज ग्रामीण महिला सशक्तिकरण और आधुनिक कृषि तकनीक की मिसाल बन चुकी हैं। आजीविका मिशन के तहत स्व-सहायता समूह से जुड़कर और नमो ड्रोन योजना का लाभ लेकर सरूपी बाई न केवल आत्मनिर्भर बनी हैं, बल्कि परिवार की आर्थिक स्थिति को भी मजबूती दे रही हैं। अब वे क्षेत्र में ‘ड्रोन दीदी’ के नाम से पहचानी जाती हैं।

सरूपी बाई बताती हैं कि पहले उनका परिवार पूरी तरह पारंपरिक खेती पर निर्भर था, जिससे सीमित आमदनी होती थी। शारदा स्व-सहायता समूह से जुड़ने के बाद उन्होंने ऋण लेकर उन्नत तकनीकों को अपनाया, जिससे खेती की पैदावार बढ़ी और आय में भी सुधार हुआ। धीरे-धीरे ऋण की किश्तें समय पर जमा होने लगीं और आर्थिक स्थिति सुदृढ़ होती चली गई।

नमो ड्रोन योजना से बदली जिंदगी

सरूपी बाई का चयन नमो ड्रोन योजना के तहत होने के बाद उन्हें ग्वालियर में 15 दिन का ड्रोन संचालन प्रशिक्षण दिया गया। जनवरी 2024 में योजना के अंतर्गत उन्हें निःशुल्क ड्रोन उपलब्ध कराया गया। साथ ही कंपनी के इंजीनियरों द्वारा ड्रोन को संचालित करने, रखरखाव और सुरक्षा से जुड़ी पूरी जानकारी भी दी गई।

प्रशिक्षण के बाद सरूपी बाई ने किसानों के खेतों में ड्रोन के माध्यम से कीटनाशकों का छिड़काव शुरू किया। जहां किसान यह काम डेढ़ से दो घंटे में करते थे, वहीं ड्रोन तकनीक से सरूपी बाई केवल 8 से 10 मिनट में यह कार्य पूरा कर देती हैं। इससे किसानों का समय, मेहनत और लागत तीनों की बचत हो रही है।

Advertisement
Advertisement

सालाना ₹1 से ₹1.30 लाख तक की आमदनी

ड्रोन के माध्यम से कीटनाशक छिड़काव सेवा देकर सरूपी बाई को प्रतिवर्ष लगभग 1 लाख से 1 लाख 30 हजार रुपये की आमदनी हो रही है। किसान यदि ड्रोन से छिड़काव कराना चाहते हैं तो पहले पोर्टल पर पंजीयन कराते हैं। तय तिथि पर सरूपी बाई खेत में पहुंचकर ड्रोन से छिड़काव कर देती हैं।

Advertisement
Advertisement

समाज में बढ़ा मान-सम्मान

सरूपी बाई कहती हैं कि नमो ड्रोन योजना से जुड़ने के बाद उनके जीवन स्तर में बड़ा बदलाव आया है। आज वे आर्थिक रूप से सक्षम हैं और समाज में उनका मान-सम्मान भी बढ़ा है। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि सरकार की योजनाएं वास्तव में ग्रामीण महिलाओं को आगे बढ़ने का अवसर दे रही हैं।

सरूपी बाई की यह सफलता कहानी यह साबित करती है कि यदि सही प्रशिक्षण, तकनीक और सरकारी सहयोग मिले, तो ग्रामीण महिलाएं भी आधुनिक कृषि और उद्यमिता के क्षेत्र में नई पहचान बना सकती हैं।

Advertisements
Advertisement
Advertisement

आपने उपरोक्त समाचार कृषक जगत वेबसाइट पर पढ़ा: हमसे जुड़ें
> नवीनतम कृषि समाचार और अपडेट के लिए आप अपने मनपसंद प्लेटफॉर्म पे कृषक जगत से जुड़े – गूगल न्यूज़व्हाट्सएप्प
> कृषक जगत अखबार की सदस्यता लेने के लिए यहां क्लिक करें – घर बैठे विस्तृत कृषि पद्धतियों और नई तकनीक के बारे में पढ़ें
> कृषक जगत ई-पेपर पढ़ने के लिए नीचे दिए गए लिंक पर क्लिक करें: E-Paper
> कृषक जगत की अंग्रेजी वेबसाइट पर जाने के लिए नीचे दिए गए लिंक पर क्लिक करें: Global Agriculture

Advertisements
Advertisement
Advertisement