राज्य कृषि समाचार (State News)

कीटनाशकों के उपयोग में सुरक्षा एवं सावधानियाँ

30 अप्रैल 2023, भोपाल कीटनाशकों के उपयोग में सुरक्षा एवं सावधानियाँ – फसलों में कीड़ों, रोगों एवं खरपतवार नियंत्रण के लिए जहरीले रसायनों का उपयोग किया जाता है। असावधानीवश इन रसायनों के मानव शरीर में प्रवेश करने से तात्कालिक एवं दीर्घकालिक बीमारियां हो सकती हैं। सामान्य किसान/मजदूर कीटनाशकों के दुष्प्रभाव से अनभिज्ञ हैं इसलिए वे इस कार्य को बिना किसी सुरक्षा उपाय के करते हैं।

कीटनाशक मुख्यत: त्वचा, मुंह अथवा नाक के द्वारा घोल बनाते समय, छिडक़ाव करते समय अथवा बचे हुए घोल को फेंकते समय संपर्क में आने से शरीर में पहुँच जाते हैं। कीटनाशकों के संपर्क में आने से सिरदर्द, बेहोशी, चक्कर आना जैसे तात्कालिक लक्षण प्रकट होते हैं, परन्तु बार-बार कीटनाशक के संपर्क से दीर्घकालीन बीमारियां जैसे माइग्रेन, अस्थमा, दाद-खाज, उच्च रक्तचाप इत्यादि हो सकती है। कीटनाशक की अधिक मात्रा शरीर में पहुंचने से मौत भी हो सकती है। इसलिए कीटनाशकों के छिडक़ाव के समय निम्नलिखित सुरक्षा उपाय करें जिससे इन जहरीले रसायनों का संपर्क आपकी त्वचा, मुंह अथवा श्वांस प्रणाली से न हो।

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छिडक़ाव करने से पहले
  • कीटनाशक दवाओं को सीलबंद पैकेट / बोतल में ही खरीदें। खुली दवा में मिलावट की संभावना होती है।
  • कीटनाशकों का भंडारण खाने-पीने की वस्तुओं, रसोईघर एवं बच्चों की पहुँच से दूर रखें।
  • छिडक़ाव के लिए घोल बनाते समय अत्यधिक सावधानी बरतें। कीटनाशक की सांद्रता अधिक होने के कारण इसके शरीर में प्रवेश करने की संभावना अधिक होती है।
  • कीटनाशक की बोतल पर लिखे निर्देशों को ध्यानपूर्वक पढ़ लें ।
  • घोल बनाने का स्थान रसोईघर, शयनकक्ष, बच्चों के खेलने का स्थान, जानवरों के बाड़े, पानी के भंडार इत्यादि से दूर रखें।
  • आवश्यक मात्रा में पानी संग्रहित कर लें एवं घोल बनाने हेतु घर में खाना पकाने या नहाने के बर्तनों का प्रयोग न करें।
  • छिडक़ाव करने वाले यंत्र के हिस्सों जैसे टंकी, नॉजल व पाइप का निरीक्षण करें कि इनमें रिसाव तो नहीं हो रहा। नॉजल से आवश्यक फव्वारा निकल रहा है या नहीं इसका निरीक्षण साफ पानी से करें।
  • कीटनाशक की खाली बोतलों/थैलों को नष्ट कर दें। इनका प्रयोग खाद्य पदार्थों के संग्रहण में न करें।
  • स्प्रेयर की टंकी को एक कीप की सहायता से उसकी क्षमता के 90 प्रतिशत तक ही भरें।
  • स्प्रेयर की टंकी को पीठ पर रखने से पहले उसे सूखे कपड़े से पोंछ लें।
छिडक़ाव करते समय
  • त्वचा को दुष्प्रभाव से बचाने के लिए पर्याप्त सुरक्षात्मक वस्त्र जैसे- हाथों में दस्ताने, रेस्पीरेटर मास्क, चश्में, पैरों में जूते एवं पूरे शरीर को ढंकने वाले कपड़े पहनें।
  • सुबह अथवा शाम को जब हवा की गति कम होती है तब छिडक़ाव किया जाना चाहिए।
  • छिडक़ाव के समय यदि नॉजल में कचरा आ गया हो तो उसे मुँह से फूँक मारकर साफ न करें अन्यथा दवा मुँह, नाक अथवा आँख में पड़ सकती है।
  • खाली पेट दवा का छिडक़ाव न करें। छिडक़ाव करते समय अथवा मध्यांतर में धूम्रपान या तम्बाकू का सेवन न करें।
  • छिडक़ाव करते समय फव्वारे को अपने शरीर से दूर रखें तथा हवा की दिशा के विरुद्ध चलकर छिडक़ाव न करें।
छिडक़ाव करने के पश्चात
  • छिडक़ाव करने के पश्चात बचे हुए घोल को सावधानीपूर्वक खेत के किनारे बने गड्ढे में गिराये और उसे मिट्टी से ढंक दें।
  • छिडक़ाव यंत्र को भली-भांति धोकर व बच्चों की पहुँच से दूर रखें।
  • अपने कपड़े, दस्ताने, चश्मा, जूते इत्यादि उतारकर भली-भांति धोकर सुखाए।
  • स्वयं साबुन लगाकर अच्छी तरह स्नान कर दूसरे कपड़े पहनें।
  • छिडक़ाव करते समय सिरदर्द, बेचैनी अथवा मिचली आने पर तुरंत काम बंद कर डॉक्टर से सलाह लें।

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