राज्य कृषि समाचार (State News)

सौंसर के सचिन ने प्राकृतिक खेती और नर्सरी उद्यम से बदली  खेत और आय की तस्वीर

24 फरवरी 2026, (उमेश खोड़े, कृषक जगत, पांढुर्ना)सौंसर के सचिन ने प्राकृतिक खेती और नर्सरी उद्यम से बदली  खेत और आय की तस्वीर – ग्राम सर्रासांवरी, ग्राम पंचायत रंगारी, विकासखण्ड सौसर के कृषक श्री सचिन घोरमारे, पिता श्री मनोहर घोरमारे, एक ऐसे किसान हैं जिन्होंने पारंपरिक खेती से आगे बढ़कर प्राकृतिक खेती और नर्सरी उद्यम के माध्यम से अपनी आय और खेत—दोनों की तस्वीर बदल दी।

पूर्व की स्थिति – पूर्व में श्री सचिन घोरमारे अपने खेत में पारंपरिक खेती करते थे। वे मुख्यतः कपास एवं अरहर की खेती करते हुए दो गाय और दो बैल के सहारे अपनी जीविका चलाते थे। इस खेती से उन्हें अपेक्षित लाभ नहीं मिल पाता था, जबकि व्यय बढ़ने की चिंता बनी रहती थी। कठिन परिश्रम के बावजूद उनकी वार्षिक आय लगभग 1 से 1.20 लाख रुपये तक ही सीमित थी, जिससे परिवार का खर्च चलाना चुनौतीपूर्ण हो गया था।

नई तकनीकी नवाचार की शुरुआत – एक दिन उनका संपर्क कृषि विभाग आत्मा परियोजना के अधिकारियों से हुआ। अधिकारियों ने खेती को लाभ का धंधा बनाने के लिए लागत कम करने और प्राकृतिक खेती अपनाने की सलाह दी। इस मार्गदर्शन को अपनाकर श्री घोरमारे ने अपने एक एकड़ में प्राकृतिक खेती की शुरुआत की। आत्मा योजना अंतर्गत उन्हें सरसों प्राकृतिक खेती प्रदर्शन प्राप्त हुआ। इस दौरान उन्हें जीवामृत, बीजामृत, दषपर्णीय अर्क, घन जीवामृत, नीमास्त्र आदि तैयार करने की विधि एवं उपयोग संबंधी जानकारी दी गई। इन सभी का निर्माण उन्होंने स्वयं किया और बिना अतिरिक्त खर्च के एक एकड़ में उपयोग किया, जो सफल सिद्ध हुआ।

नर्सरी और विस्तार– सफलता से उत्साहित होकर उन्होंने अपने खेत में जीवामृत ट्यूब लगवाई और बड़ी मात्रा में जीवामृत तैयार कर पूरे खेत में उपयोग करने लगे, जिससे उन्हें और अधिक लाभ मिला। साथ ही उन्होंने नर्सरी में पौध तैयार करने का कौशल सीखा।पहले वर्ष उन्होंने एक कमरे के नेट हाउस में मिर्च और बैंगन के पौधे तैयार कर बेचे। इसके बाद दूसरे वर्ष तीन नेट हाउस में मिर्च, बैंगन के साथ गोभी और टमाटर की पौध तैयार कर बिक्री की। इस निरंतर प्रयास से उनकी आय में उल्लेखनीय वृद्धि हुई। वर्तमान में उनके पास पांच जानवर हैं।

लाभ और आय में वृद्धि– जहाँ पहले खेती से उन्हें लगभग 1 से 1.20 लाख रुपये की वार्षिक आय होती थी, वहीं प्राकृतिक खेती अपनाने और नर्सरी में पौध तैयार करने से उनकी आय में एक लाख रुपये की अतिरिक्त बढ़ोतरी हुई। अब उनकी वार्षिक शुद्ध आय लगभग 2.50 लाख रुपये है।

वर्तमान स्थिति और प्रेरणा– आज उनकी भूमि की उपजाऊ क्षमता में वृद्धि हुई है, मिट्टी के स्वास्थ्य में सुधार आया है और उन्हें अच्छा लाभ प्राप्त हो रहा है। आसपास के किसान उनसे तैयार पौधे लेने आते हैं। उनकी लहलहाती फसलें देखकर अन्य किसान भी प्राकृतिक खेती के तरीके सीखने और अपनाने के लिए प्रेरित हो रहे हैं।श्री सचिन घोरमारे की यह यात्रा दर्शाती है कि सही मार्गदर्शन, नवाचार और प्राकृतिक खेती अपनाकर खेती को सचमुच लाभ का धंधा बनाया जा सकता है।

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