रायपुर: समेकित खेती से बदली केकराखोली की तस्वीर, 35 एकड़ में तैयार हुआ बहुफसली मॉडल
26 सितंबर 2026, रायपुर: रायपुर: समेकित खेती से बदली केकराखोली की तस्वीर, 35 एकड़ में तैयार हुआ बहुफसली मॉडल – छत्तीसगढ़ के धमतरी जिले के मगरलोड विकासखंड का ग्राम पंचायत केकराखोली ग्रामीण अर्थव्यवस्था और आधुनिक कृषि की नई मिसाल बन रहा है। यहां ‘सेवा संकल्प अभियान’ के तहत शासकीय योजनाओं के समन्वित उपयोग से खेती के तरीके में बदलाव आया है। वीबी-जी रामजी और उद्यानिकी विभाग के संयुक्त अभिसरण से संचालित समेकित फल उद्यान योजना के तहत गांव के 25 किसानों की करीब 35 एकड़ भूमि में फलोद्यान के साथ बहुफसली कृषि गतिविधियां विकसित की गई हैं। इससे किसानों को एक ही भूमि से अलग-अलग समय में आय के अवसर मिल रहे हैं।
फलदार पौधों के साथ अंतरवर्ती फसलों की खेती
केकराखोली के कृषि मॉडल की खासियत भूमि का वैज्ञानिक और रणनीतिक उपयोग है। किसानों ने पारंपरिक फसलों के साथ आम और कटहल जैसे दीर्घकालिक फलदार पौधे लगाए हैं। इनके बीच हल्दी, उड़द, करेला और बरबटी जैसी अल्पकालिक फसलों की अंतरवर्ती खेती की जा रही है। इसके अलावा सतावर और सिंदूरी जैसे औषधीय पौधों को भी खेती का हिस्सा बनाया गया है।
फलदार पौधों को उत्पादन देने में समय लगने तक किसान इन अल्पकालिक फसलों से नियमित आय प्राप्त कर रहे हैं। इससे उन्हें दैनिक और मौसमी वित्तीय जरूरतों को पूरा करने में मदद मिल रही है। इस तरह एक ही भूमि पर दीर्घकालिक फल उत्पादन के साथ कम अवधि की फसलों से आय का क्रम बनाए रखने का प्रयास किया गया है।
फेंसिंग, बोरवेल और ग्रीन शेड हाउस की सुविधा
खेती को सुरक्षित और तकनीकी रूप से सक्षम बनाने के लिए योजना के तहत आवश्यक अवसंरचना भी विकसित की गई है। खेतों को आवारा मवेशियों से सुरक्षित रखने के लिए फेंसिंग की व्यवस्था की गई है। निर्बाध सिंचाई के लिए बोरवेल और पौधों को प्रतिकूल मौसम से बचाने के लिए ग्रीन शेड हाउस की सुविधा भी उपलब्ध कराई गई है। विभागीय संसाधनों के इस समन्वित उपयोग से किसानों को संरक्षित और आधुनिक कृषि के लिए आवश्यक आधारभूत सुविधाएं उपलब्ध हुई हैं। इससे फलदार पौधों और अन्य फसलों की खेती को व्यवस्थित तरीके से आगे बढ़ाने में मदद मिल रही है।
7 आजीविका डबरियों में हो रहा मछली पालन
जल संरक्षण और अतिरिक्त आजीविका के उद्देश्य से ग्राम पंचायत में 7 आजीविका डबरियों का निर्माण भी किया गया है। ये डबरियां खेतों की सिंचाई और भू-जल स्तर बनाए रखने में मदद कर रही हैं। इसके साथ ही स्थानीय परिस्थितियों के अनुरूप इनमें मछली पालन भी किया जा रहा है। मछली पालन से किसानों को पारंपरिक खेती के साथ जल आधारित आय का अतिरिक्त विकल्प मिला है। इस तरह कृषि गतिविधियों के साथ मत्स्य पालन को जोड़कर किसानों की कुल आय बढ़ाने की दिशा में भी काम किया जा रहा है।
एक ही मॉडल में कई आय के विकल्प
केकराखोली का यह एकीकृत कृषि मॉडल अल्पकालिक फसलों से नियमित आय, दीर्घकालिक फलदार उत्पादन और मछली पालन जैसी अतिरिक्त आजीविका को एक साथ जोड़ता है। 25 किसानों के सामूहिक प्रयास और शासकीय योजनाओं के अभिसरण से विकसित करीब 35 एकड़ का यह क्षेत्र बहुफसली खेती और विविध आय के मॉडल के रूप में विकसित हुआ है।
यह पहल बताती है कि उपलब्ध भूमि और संसाधनों का योजनाबद्ध उपयोग कर किसान पारंपरिक खेती के साथ फलोद्यान, अंतरवर्ती फसल, औषधीय पौधों और मत्स्य पालन जैसी गतिविधियों को जोड़ सकते हैं। इससे ग्रामीण क्षेत्र में आय के अलग-अलग स्रोत विकसित करने और कृषि आधारित आजीविका को अधिक टिकाऊ बनाने की संभावनाएं बढ़ती हैं।
आपने उपरोक्त समाचार कृषक जगत वेबसाइट पर पढ़ा: हमसे जुड़ें
> नवीनतम कृषि समाचार और अपडेट के लिए आप अपने मनपसंद प्लेटफॉर्म पे कृषक जगत से जुड़े – गूगल न्यूज़, व्हाट्सएप्प
> कृषक जगत अखबार की सदस्यता लेने के लिए यहां क्लिक करें – घर बैठे विस्तृत कृषि पद्धतियों और नई तकनीक के बारे में पढ़ें
> कृषक जगत ई-पेपर पढ़ने के लिए नीचे दिए गए लिंक पर क्लिक करें: E-Paper
> कृषक जगत की अंग्रेजी वेबसाइट पर जाने के लिए नीचे दिए गए लिंक पर क्लिक करें: Global Agriculture


