MP में 7 जुलाई से शुरू होगी मूंग-उड़द की खरीदी, अब तक 3 लाख से अधिक किसानों ने कराया रजिस्ट्रेशन
07 जुलाई 2025, भोपाल: MP में 7 जुलाई से शुरू होगी मूंग-उड़द की खरीदी, अब तक 3 लाख से अधिक किसानों ने कराया रजिस्ट्रेशन – मध्यप्रदेश में ग्रीष्मकालीन मूंग और उड़द की न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) पर खरीदी की प्रक्रिया 7 जुलाई 2025 से शुरू होने जा रही है। इस खरीदी के लिए रजिस्ट्रेशन की अंतिम तारीख 6 जुलाई तय की गई है। सरकार ने किसानों से समय पर रजिस्ट्रेशन कराने की अपील की है ताकि वे अपनी उपज को सही कीमत पर बेच सकें।
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने जानकारी दी कि केंद्र सरकार ने राज्य में मूंग की 3.51 लाख मीट्रिक टन और उड़द की 1.23 लाख मीट्रिक टन खरीद का लक्ष्य तय किया है। उन्होंने बताया कि अब तक 2 लाख 94 हजार किसानों ने मूंग और 11,495 किसानों ने उड़द बेचने के लिए रजिस्ट्रेशन करा लिया है।
कहां और कब होगी खरीदी?
प्रदेश सरकार ने खरीदी के लिए प्रदेश के 36 जिलों में मूंग और 13 जिलों में उड़द के खरीदी केंद्र बनाए हैं। इन केंद्रों पर 7 जुलाई से लेकर 6 अगस्त 2025 तक उपज की खरीदी की जाएगी।
रजिस्ट्रेशन के लिए जरूरी दस्तावेज
रजिस्ट्रेशन प्रक्रिया ऑनलाइन और ऑफलाइन दोनों माध्यमों से जारी है। इसके लिए किसानों को कुछ जरूरी दस्तावेज जमा कराने होंगे:
1. आधार कार्ड
2. नेशनलाइज्ड बैंक या जिला सहकारी बैंक का खाता (IFSC कोड सहित)
3. भू-अधिकार लोन बुक की स्वप्रमाणित प्रति
खरीदी में पारदर्शिता के लिए समिति
प्रदेश सरकार ने खरीदी में पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए हर खरीदी केंद्र पर “व्यवस्था उपार्जन समिति” बनाने की घोषणा की है। ये समितियां किसानों को समय पर भुगतान, सही तौल और अन्य जरूरी सहायता उपलब्ध कराएंगी ताकि किसी भी किसान को दिक्कत न हो।
कैसे बनी खरीदी की स्थिति?
13 जून को सीएम डॉ. मोहन यादव ने खरीदी का प्रस्ताव केंद्र सरकार को भेजा था, जिसे जल्द ही मंजूरी मिल गई। इससे पहले सरकार पर खरीदी में देरी और अनिश्चितता को लेकर विपक्ष और किसान संगठनों ने सवाल उठाए थे। मूंग में कीटनाशकों के उपयोग को लेकर उठे विवाद के बाद राज्य सरकार ने स्थिति स्पष्ट की और खरीदी का रास्ता साफ किया।
किसानों के लिए अंतिम मौका
सरकार ने स्पष्ट किया है कि 6 जुलाई के बाद पंजीकरण नहीं होगा, इसलिए किसान समय रहते रजिस्ट्रेशन जरूर कराएं। MSP पर खरीदी से उन्हें अपनी मेहनत का उचित मूल्य मिल सकेगा और दलहन फसलों की खेती को बढ़ावा मिलेगा।
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