राज्य कृषि समाचार (State News)

पंजाब में फसल विविधीकरण की कोशिशों को झटका, 92 फीसदी से ज्यादा खरीफ क्षेत्र में धान

31 अगस्त 2026, चंडीगढ़: पंजाब में फसल विविधीकरण की कोशिशों को झटका, 92 फीसदी से ज्यादा खरीफ क्षेत्र में धान – पंजाब में खेती को धान के चक्र से बाहर निकालकर दूसरी फसलों की ओर ले जाने की वर्षों से कोशिश की जा रही है, लेकिन 2026 के खरीफ सीजन के आंकड़े इन प्रयासों की चुनौती को सामने रखते हैं। इस साल राज्य में धान और बासमती समेत चावल की खेती का रकबा रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गया है। कुल खरीफ कृषि क्षेत्र का 92 फीसदी से अधिक हिस्सा चावल की खेती के अंतर्गत आ गया है।

इस वर्ष पंजाब में करीब 35.55 लाख हेक्टेयर कृषि क्षेत्र में खरीफ फसलों की बुवाई हुई। इनमें चावल का रकबा बढ़कर लगभग 32.86 लाख हेक्टेयर हो गया है। इसमें सामान्य धान यानी परमल अथवा गैर-बासमती धान के साथ बासमती का क्षेत्र भी शामिल है।

दस साल पहले की स्थिति से तुलना करें तो धान पर पंजाब की बढ़ती निर्भरता और स्पष्ट हो जाती है। वर्ष 2016-17 में करीब 28.98 लाख हेक्टेयर में धान की खेती हुई थी। उस समय यह लगभग 36 लाख हेक्टेयर कृषि क्षेत्र का करीब 80.5 प्रतिशत था। यानी एक दशक में धान का रकबा करीब 3.88 लाख हेक्टेयर बढ़ा और कृषि क्षेत्र में इसकी हिस्सेदारी 80 प्रतिशत से बढ़कर 92 प्रतिशत से अधिक हो गई।

इसके विपरीत धान के अलावा अन्य खरीफ फसलों का क्षेत्र तेजी से घटा है। 2016-17 में ऐसी फसलों के लिए करीब 7.02 लाख हेक्टेयर भूमि थी, जो अब घटकर केवल 2.69 लाख हेक्टेयर रह गई है। यानी करीब 4.33 लाख हेक्टेयर या 62 प्रतिशत की कमी आई है।

पंजाब में खरीफ के दौरान लगभग 41 लाख हेक्टेयर शुद्ध बोया क्षेत्र है। इसमें करीब 36 लाख हेक्टेयर में कृषि फसलें और शेष क्षेत्र में बागवानी फसलें होती हैं। धान के बढ़ते रकबे ने राज्य की भूजल स्थिति, खेती की लागत और टिकाऊ कृषि व्यवस्था को लेकर चिंता बढ़ा दी है। विशेषज्ञों के सामने अब चुनौती यह है कि किसानों को ऐसी वैकल्पिक फसलों की ओर कैसे आकर्षित किया जाए, जो आर्थिक रूप से लाभकारी होने के साथ-साथ पानी की कम खपत वाली भी हों।

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