राज्य कृषि समाचार (State News)

समर्थन मूल्य पर हाईटेक उपार्जन किसानों के लिए किसी युद्ध से कम नहीं

लेखक: सचिन बोंद्रिया

02 मई 2026, इंदौरसमर्थन मूल्य पर हाईटेक उपार्जन किसानों के लिए किसी युद्ध से कम नहीं – मध्यप्रदेश में गेहूं उपार्जन व्यवस्था को तकनीकी रूप से आधुनिक और पारदर्शी बनाने के उद्देश्य से ऑनलाइन पंजीयन, स्लॉट बुकिंग, ओटीपी सत्यापन और डिजिटल रिकॉर्ड जैसी व्यवस्थाएं लागू की गई हैं। उद्देश्य सराहनीय है, लेकिन जमीनी स्तर पर किसान जिन कठिनाइयों से गुजर रहे हैं, वह व्यवस्था की कमजोरियों को उजागर करती हैं। अनेक किसानों का कहना है कि समर्थन मूल्य पर फसल बेचने की प्रक्रिया अब इतनी जटिल हो गई है कि यह किसी युद्ध से कम नहीं रह गई है।

ताजा उदाहरण सतना जिले से सामने आया, जहां एक किसान की 2.25 हेक्टेयर भूमि पर गेहूं उपज मात्र 38 किलो 700 ग्राम खरीदी योग्य दर्ज कर दी गई। किसान को इस त्रुटि के सुधार के लिए कई विभागों के चक्कर लगाने पड़े। ओटीपी मिलने और स्लॉट बुकिंग के समय जब वास्तविक स्थिति सामने आई, तब किसान की परेशानी और बढ़ गई। यह घटना केवल एक किसान की नहीं, बल्कि व्यवस्था में व्याप्त तकनीकी व प्रशासनिक विसंगतियों का संकेत है।

उपार्जन प्रक्रिया में राजस्व विभाग, कृषि विभाग, मंडी बोर्ड, सहकारी समितियां, सहकारिता विभाग, खाद्य एवं आपूर्ति विभाग तथा एनआईसी सहित कई विभाग जुड़े रहते हैं। लेकिन जब किसान को समस्या आती है, तब उसे स्पष्ट मार्गदर्शन, जिम्मेदार अधिकारी और समयबद्ध समाधान नहीं मिल पाता। किसान एक दफ्तर से दूसरे दफ्तर तक भटकता रहता है।

ऐसी स्थिति में सरकार को एक एकीकृत किसान हेल्पलाइन नंबर जारी करना चाहिए, जहां उपार्जन से जुड़ी सभी शिकायतें दर्ज हों, शिकायत क्रमांक मिले, संबंधित विभाग को तुरंत भेजा जाए और निर्धारित समय-सीमा में निराकरण सुनिश्चित हो। यदि कोई अधिकारी या कर्मचारी अनावश्यक देरी या लापरवाही करता है तो उसके विरुद्ध कार्रवाई भी तय होनी चाहिए।

कई स्थानों से यह शिकायतें भी सामने आती हैं कि सर्वेयरों को पर्याप्त प्रशिक्षण नहीं है, किसानों से व्यवहार संतोषजनक नहीं रहता और प्रक्रिया को लेकर भ्रम बना रहता है। इसलिए सर्वेयरों एवं केंद्र कर्मचारियों का नियमित प्रशिक्षण आवश्यक है।

खरीदी केंद्रों पर सीसीटीवी कैमरे लगाए जाना भी समय की मांग है। मुख्यमंत्री या वरिष्ठ अधिकारी आकस्मिक निरीक्षण में हर केंद्र की वास्तविक स्थिति नहीं देख सकते, लेकिन सीसीटीवी निगरानी से तुलाई व्यवस्था, किसानों की कतार, कर्मचारियों का व्यवहार और अनियमितताओं की सही जानकारी मिल सकती है।

तकनीक तभी सफल मानी जाएगी जब वह किसान का काम आसान बनाए, न कि उसे और उलझाए। समर्थन मूल्य पर खरीदी व्यवस्था को वास्तव में किसान हितैषी बनाने के लिए तकनीक के साथ संवेदनशीलता, जवाबदेही और पारदर्शिता का समावेश आवश्यक है।

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