आलू; सोलेनम ट्यूबरो समद्ध एक लोकप्रिय सब्जी
लेखक: डॉ अदिति गुप्ता एविषय वस्तु विशेषज्ञ ; खाध्य एवं पोषणद्ध, कृषि विज्ञान केंद्र, चाँदगोठी चुरू
29 नवंबर 2025, भोपाल: आलू; सोलेनम ट्यूबरो समद्ध एक लोकप्रिय सब्जी – मनुष्य द्वारा प्रयोग की जाने वाली विभिन्न प्रकार की सब्जियों में आलू का प्रमुख स्थान है तथा आलू भारतीय भोजन में सबसे लोकप्रिय खाद्य प्रदार्थ है। इसमें काबोहाइड्रेट की भरपूर मात्रा के साथ-साथ खनिज लवण, विटामिन तथा अमिनो अम्ल की मात्रा पायी जाती है जो कि शारिरीक वृद्धि व स्वास्थ्य के अनुक्षरण के जिए आवष्यक है आलू में प्रोटिप कैलोरी का उच्च अनुपात पाया जाता हैं व मुख्यतः सटार्च के साथ फास्फोरस, केल्षियम, लोहा व मिटामिन सी व ए भी पाये जाते हैं। आलू में प्रोटिन के साथ कैल्ष्यिम अनुपात ज्यादा होता है।
दैनिक खाद्य पदार्थ के रूप में में आलू की सब्जी की वेहद खपत होती है इसके अलावा इसका उपयोग स्टार्च, आय, अल्कोहल, डेप्टनिन और पशुधन आदि रूपों में किया जाता है। अंतराष्ट्रीय स्तर पर ’स्नैकिंग’ (छोटा नाष्ता) के चलन में आने आलू के चिप्स और वैफर्स काफी लोकप्रिय हो रहे हैं। इस प्रष्ठभूमि के साथ आलू वैफर्स और चिप्स की बाजार में अच्छी विकास संभावनाऐ हैै व ग्लोबल स्नैक मार्केट के अनुसार कुल मसालेदार स्नैक बाजार के औसत में 35 प्र.श. आलू के व्यजनों का सेवन किया जाता है। आलू एक उच्च पोषण आहार है। आलू की फसल प्रमुख खाद्यान के मुकाबले कम समय में ही अधिक खाद्य प्रति इकाई में पैदा की जा सकती है। 90 से 100 दिनों में फसल का उत्पादन किया जा सकता है। इसकी व्यापक अनुकुल क्षमता रोपण व कटाई में दो फसलों के बीच बढ़ने के लिए आदर्ष फसल बनाती है। 1950 दषक के बाद मुख्य रूप से प्रंसस्करण उद्योग से मजबूत मांग व रिटर्न के कारण आलू फसल में अभूतपुर्व वृद्धि देखी गयी हैं। दुनियां के कुल उत्पादन में भारत का योगदान 7-5 प्र.श. आसपास है।
आलू में बनने वाले मुख्य व्यंजनों में चिप्स काफी लोकप्रिय है। चिप्स को उपयोग स्नैक्स के तौर पर व उपवास के समय किया जा सकता है। बाजार में उपलब्ध चिप्स में अनिमियत परिरक्षकों का प्रयोग किया जा सकता है घर पर बनाये गये चिप्स तैयार कर इन्हें वर्षभर के लिए संरक्षित किया जा सकता है। तथ गृहणियों द्वारा उद्यमिता विका के लिए भी प्रयुक्त किया जा सकता है।
जलवायु व भुमि
आलू के लिए शीतोष्ण जलवायु तथा कन्द बनाने के समय उपयुक्त तापक्रम 18 से 20 डिग्री सेन्टीग्रेड होना चाहिए। यह फसल पाले प्रभावित होती है।
आलू की फसल सामान्य तौर पर सभी प्रकार की भूमि पर उगाई जा सकती है परन्तु हल्दी बुवाई बलुई दोमट मिटृी वाला उपजाऊ खेत जहां जल निकास की सुविधा हो इसके लिए विषेष उपयुक्त रहता है। खेत का समतल होना भी आलू की फसल के लिए आवष्यक है। आलू को 6 से 8 पी.एच. वाली भूमि में भी सफलतापूर्वक उगाया जा सकता है परन्तु लवणीय व क्षारीय भूमि इस फसल के लिए पूर्वतया अनुउपयुक्त रहती है।
उन्नत किस्में
निम्न किस्में आलू की उपयुक्त किस्में हैं
क. सफेद त्वचा वाली
अ. 75-90 दिन में पकने वाली
कुफरी चंद्रमुखी, कुफरी अषोका (पी.जे 376), कुफरी (जे.एच.222)
ब. 90 सें 105-110 दिन में पकने वाली
कुफरी ज्योति, कुफरी बहार (ई-3797), पुफटी पुखराज (जे.ई.एक्स/सी 166), कुफरी
बादषाह (जे.एफ.4810), कुफरी सतलत (जे.आई.5857),
स. लाल त्वचा वाली
अ. 90 से 105-110 कुफरी सिंदुरी, कुफरी लालिया
द. प्रसंस्करण हेतु उपयुक्त किस्में
अ दृ 90 से 105-110 कुफरी चिप्सोना 1, कुफरी चिप्सोना 2. अन्य बहतरील किस्मेंः- कुफरी अलंकार, कुफरी आनंद, कुफरी अरूण, कुफरी चमत्कार, कुफरी देवा।
खाद एवं उर्वरक
फसल की बुवाई से एक माह पूर्व 200-250 क्विटल प्रति हैक्टेयर गोबर की खाद देवें। उर्वरकों में 120-150 कि.ग्रा. नत्रजन, 80-100 कि.ग्रा. पोटाष प्रति हैक्टेयर के हिसाब से देना चाहिए। विभागीय सिफारिषों के अनुसार उर्वरकों के प्रयोग के अतिरिक्त यदि आलू कंद बीज को 1 प्र.ष. यूरिया एवं 1 प्र.ष. सोडियम बाई कोवोंनेट के घोल में 5 मिनट डुबोने के बाद पी एस बी कल्चर एवं एजोबेक्टर कल्चर से उपचातिर करके बुवाई करने से उपज में वृद्धि होती है।
आलू की बुवाई
आलू की मुख्य फसल को सितम्बर के अंतिम सप्ताह से अक्टुबर के अंत तक बो देना चाहिए। बीज की मात्रा व बुवाई की दूरी सामान्यतः बीज की मात्रा व बुवाई की दूरी सामान्यतः बीज की किस्म, आकार व भूमि की उर्वरकता पर निर्भर करती है बीज कम से कम 2.5 से.मी. व्यास के आकार का या 25 से 30 ग्राम वजन के साबुत कंद होने चाहिए। विभिन्न परिस्थितियों में एक हैक्टेयर भूमि में बुवाई के लिये 25 से 30 क्विंटल आलू के कंदो की आवष्यकता होती है। बुवाई में पूर्व कंदों को 2 ग्राम थाइरम $ 1 ग्राम बावस्टिन प्रति लीटर पानी के घोल में 20 से 30 मिनट तक भिगोयें तथा छाया में सुखाकर बुवाई करें। कतार की दुरी 60 से.मी. व कंद से कंद की दुरी 20 से.मी. रखें।
सिंचाई
आमतौर पर आलू की फसल के लिए 10-15 सिंचाईयों की आवष्यकता होती है। फसल पकने से 15 दिन पूर्व सिंचाई बंद कर देवें।
निराई-गुड़ाई
कंद की बुवाई के 30 से 35 दिन बाद जब पौधे 8 से 10 से.मी. के हो जावें तो खरपतवार निकाल कर मिटृी दोबारा चढ़ावें।
प्रमुख कीट व व्याधियां
अ. मोयला व हरा तेला: नियंत्रण हेतु 30 ई.सी. या मिथाईल डिमेटोन 25 ई.सी. 1 मि.ली. प्रति
लीटर पानी की दर से छिड़के।
ब. कमवर्म व सफेद लट नियंत्रण हेतु: क्लोरोपायरीफाॅस 20 ई.सी. चार लीटर प्रति हैक्टेयर व
कोर्बाफयूरान 3 जी 25 किलो प्रति हैक्टेयर की दर से सिंचाई करें।
स. कालोकसी: नियंत्रण हेतु कंदों को 3 प्रतिषत बोरिक एसिड के घोल में 30 मिनट डुबायें।
द. मृदु गलन: नियंत्रण हेतु बुवाई पूर्व आलू को 1 ग्राम बाविस्टीन प्रति लीटर पानी के घोल
से उपचारित करें।
झुलसा रोगः
नियंत्रण हेतु कवक नाषी दवायें जैसे डाइफोल्टान या मैन्कोजेब 2 ग्राम प्रति लीटर पानी के घोल का छिड़काव करें। यह छिड़काव 10 से 12 दिन बाद दोहरावें। छिड़काव नीचे की पत्तियों पर विषेष करें।
पाले से सुरक्षा
आलू की कमल में पाले से काफी नुकसान होता है। सर्दियों में जिस दिन शाम के समय आसमान साफ हो धीमी धीमी ठण्डी हवा चल रही हो व तापक्रम कम हो पाला पड़ने की संभावाना हा जाती है इससे बचने के लिए फसल की सिंचाई करें व खेत के मेड़ के उतर पष्चिम दिषा की तरफ घास फूस जलाकर (गंधक अम्ल) धुआं करे।
आलू की खुदाई: सामान्यतौर पर जब पौधे पीले होकर सूखने लगते हैं उस समय पौये के तने को पत्तियों सहित काट लेते है तथा 10-15 दिन बाद खुदाई करते हैं इससे कंदों में मजबूती आ जाती है व अधिक समय तक रखे जा सकते हैं।
आलू को वर्षभर तक उपयोग करने के लिए स्वादिष्ट व्यंजन के रूप में चिप्स तैयार किये जा सकते हैं तथा इस प्रकार सुखाये गये चिप्स आवष्यकतानुसार तलकर उपयोग में लाये जा सकते हैं।
आलू के चिप्स बनाने की विधि
- आवष्यक सामग्री
- आलू
- फिटकरी
आलू के चिप्स कई प्रकार से बनाये जा सकते हैं जिसमें कच्चे आलू के एकदम पतले चिप्स आल क्रिप्स, आलू के चिप्स काटकर उबालकर सुजाये हुए आलू के चिप्स शामिल है आलू के सुखाकर चिप्स बनाने के लिए बड़े आकार के चिकनी परत वाला आलू अच्छा रहता है।
विधि
आलू की छंटाई: सर्वप्रथम बड़े आकार के अंडाकार आकार के आलू को छांट लेना चाहिए ताकि चिप्स बड़े आकार के अच्छे बनें इसके पश्चात आलू को धोकर, छिलकर चिप्स कटर से चिप्स तैयार कर लें। किसी बर्तन में इतना पानी लीजिए कि चिप्स उसमें अच्छी तरह डूब जाये तथा फिटकरी को पानी में घोल लें, कटे हुए चिप्स को तीन बार पानी बदलकर डुबाकर रखें। अब ये चिप्स फिटकरी के पानी से निकाल कर साफ पानी से धो लें।
चिप्स को उबालना
अब भगोने में इतना पानी लेना है कि चिप्स पूरी तरह डूब जाये व पानी को गरम करने गैस पर रख देते हैं 6-8 मिनट तक चिप्स को उबाल आने पर मीडीयम आग पर पकाते हैं चिप्स के हल्के मुलायम होने के पश्चात् गैस बंद कर देते हैं इसके बाद चिप्स को छलनी में डालकर अतिरिक्त पानी हटा दिया जाता है तथा चिप्स सुखाये जाने के लिए तैयार हो जाते है।
चिप्स सुखानाः चिप्स सुखाने के लिए पुरानी चादर इस्तेमाल कर सकते हैं या बड़ा पोलिथिन भी ले सकते हैं। सारे चिप्स चादर पर लगाकर धुप में सुख लिये जाते हैं। एक दिन की धूप में चिप्स काफी सुख जाते हैं फिर भी चिप्स को दो दिन तक धूप में सुखाया जाता है इसके बाद इन्हें बंद कन्टेनर में रखा जाता है।
सावधानियां
- आलू के चिप्स उबालते समय ध्यान रखें कि वे ज्यादा न उबल जाये वरना सारे चिप्स टूट जायेगें।
- आलू के चिप्स कच्चे नहीं रह जाये नहीं सूखाने पर काले हो जाते हैं।
- आलू के चिप्स को अच्छी तरह सुखाकर ही रखाना चाहिए वरना फंगस लगकर खराब हो जाते हैं व बारिष के मौसम के जाने के बाद चिप्स को एक बार धूप में रख दे ंतो इनकी सेल्फ लाईफ और भी बढ़ जाती है।
आपने उपरोक्त समाचार कृषक जगत वेबसाइट पर पढ़ा: हमसे जुड़ें
> नवीनतम कृषि समाचार और अपडेट के लिए आप अपने मनपसंद प्लेटफॉर्म पे कृषक जगत से जुड़े – गूगल न्यूज़, व्हाट्सएप्प
> कृषक जगत अखबार की सदस्यता लेने के लिए यहां क्लिक करें – घर बैठे विस्तृत कृषि पद्धतियों और नई तकनीक के बारे में पढ़ें
> कृषक जगत ई-पेपर पढ़ने के लिए नीचे दिए गए लिंक पर क्लिक करें: E-Paper
> कृषक जगत की अंग्रेजी वेबसाइट पर जाने के लिए नीचे दिए गए लिंक पर क्लिक करें: Global Agriculture


