डीएपी के नाम पर जैविक खाद बेची

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छिंदवाड़ा जिले में अवैध उर्वरक बेचने पर एफआईआर दर्ज़

14 मई 2022, इंदौर । डीएपी के नाम पर जैविक खाद बेची – नकली खाद ,बीज के माध्यम से धोखाधड़ी करने के मामले थम नहीं रहे हैं। ताज़ा मामला छिंदवाड़ा जिले के  अमरवाड़ा ब्लॉक के ग्राम सिगौड़ी का सामने आया है, जहाँ दो आरोपियों ने जैविक खाद को डीएपी बताकर किसानों को बेचकर उनके साथ धोखाधड़ी की। वरिष्ठ कृषि विकास अधिकारी , अमरवाड़ा की शिकायत पर आरोपियों ब्रजमोहन पिता बलवीर भदौरिया (42 ) निवासी फूफ जिला भिंड और सत्यप्रकाश पिता ब्रम्हानंद तिवारी (35 ) निवासी धनेता जिला मुरैना के खिलाफ चौकी सिंगौड़ी थाना अमरवाड़ा में एफआईआर दर्ज की गई है।

श्री जितेन्द्र सिंह , उप संचालक कृषि ,छिंदवाड़ा ने कृषक जगत को बताया कि  विभाग को सूचना मिली थी कि ग्राम सिगौड़ी में रघुनंदन जैन के मकान में अवैध रूप से उर्वरक का भंडारण कर उसे बेचा जा रहा है।  इस पर एसडीओ कृषि श्री सचिन जैन के निर्देश पर श्री मधुकर लोखंडे ,वरिष्ठ कृषि विकास अधिकारी ,अमरवाड़ा और कृषि विकास अधिकारी श्री विजय सरयाम की टीम ने औचक निरीक्षण किया तो आरोपियों ब्रजमोहन भदौरिया और सत्यप्रकाश तिवारी को  उर्वरक का भण्डारण और विक्रय करते पाया गया।  पूछताछ में आरोपियों ने खुद को चेतक बायो फर्टिलाइजर भोपाल का प्रतिनिधि  बताया लेकिन जब उनसे  उर्वरक का लायसेंस मांगा गया, तो  वह पेश नहीं कर सके। बिना लायसेंस के उर्वरक बेचना  नियमों का उल्लंघन है। आरोपियों द्वारा आसपास के गांवों में किसानों को बड़ी मात्रा में उर्वरक चेतक शक्ति ग्रो की बोरियां डीएपी बताकर 1200 रुपए /बोरी की दर से और चेतक गोल्ड प्लस के पैकेट किसानों को बेचे गए।  
                                                                   
निरीक्षण दल ने चेतक बायो फर्टिलाइजर की 69  बोरियां और चेतक गोल्ड प्लस के 47 पैकेट जब्त कर पंचनामा बनाया और उर्वरक का एक और सूक्ष्म तत्व के दो नमूने प्रयोगशाला में जाँच के लिए भेजे जाने हेतु एकत्रित किए गए। शिकायतकर्ता श्री मधुकर लोखंडे , वरिष्ठ कृषि विकास अधिकारी , विकास खंड अमरवाड़ा की शिकायत पर चौकी सिंगौड़ी थाना अमरवाड़ा में आरोपियों ब्रजमोहन पिता बलवीर भदौरिया (42 ) निवासी फूफ जिला भिंड और सत्यप्रकाश पिता ब्रम्हानंद तिवारी (35 ) निवासी धनेता जिला मुरैना के खिलाफ भा द सं 1860  की धारा  420 /34 , आवश्यक वस्तु अधिनियम 1955  की धारा 3 /7 और उर्वरक नियंत्रण आदेश 1985  की धारा 7 के तहत चौकी सिंगौड़ी थाना अमरवाड़ा में एफआईआर दर्ज कराई गई।

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