बायोफोर्टीफिकेशन  विषय पर ऑनलाइन कृषक संगोष्ठी आयोजित

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28 अप्रैल 2022, इंदौर । बायोफोर्टीफिकेशन  विषय पर ऑनलाइन कृषक संगोष्ठी आयोजितभारतीय सोयाबीन अनुसन्धान संस्थान , क्षेत्रीय गेहूं अनुसन्धान केंद्र, इंदौर, आई टी सी लि  मप्र  एवं सोलिडेरीडेड, भोपाल के संयुक्त तत्वावधान में गुरुवार  को “किसान भागीदारी-प्राथमिकता हमारी” अभियान के अंतर्गत  “बायोफोर्टीफिकेशन-राष्ट्रव्यापी अभियान विषय पर ऑनलाइन संगोष्ठी आयोजित की गई, जिसमें 650 से अधिक कृषकों ने भाग लिया।

क्षेत्रीय गेहूं अनुसन्धान केंद्र इंदौर के अध्यक्ष डॉ के.सी. शर्मा ने बताया कि वर्ष 2021 के दौरान उनके केंद्र द्वारा विकसित मालवी गेहू की दो किस्में एचआई 1636 (पूसा बकुला) एवं एच. आई. 8877 (पूसा प्रभात) को  प्रधानमंत्री द्वारा राष्ट्र को समर्पित किया गया था।  उन्होंने यह भी बताया कि उनके केंद्र द्वारा विकसित एक अन्य  किस्म एचआई-8777 को बायोफोर्टीफाइड किस्म के रूप में मान्यता मिली है, जिसमें  जस्ता, लौह तत्त्व के  साथ -साथ पीले पिगमेंट की अधिकता है।  यह किस्म केवल 4 सिंचाई में ही सामान्य से अधिक उत्पादन देने में सक्षम है। वहीं   ‘सस्य विज्ञानकीय तकनीकियों से सोयाबीन में बायोफोर्टीफिकेशन ‘ विषय पर सोयाबीन अनुसन्धान संस्थान के डॉ राघवेन्द्र मदार एवं डॉ राकेश कुमार वर्मा ने सोयाबीन फसल में सूक्ष्म पोषक तत्वों की प्रचुरता को बढ़ाने के लिए जिंक एवं लौह तत्त्व का उपयोग किये जाने संबंधित  परीक्षणों के निष्कर्ष पर चर्चा कर  कहा कि सोयाबीन की बोवनी के समय 25 किग्रा जिंक सल्फेट एवं 50 किग्रा/हे. आयरन सल्फेट की पूर्ति की जानी चाहिए  या फिर फसल पर 3 बार (फूल आना  प्रारंभ होने से फलियां  बनने की अवस्था तक) 0.5% प्रतिशत जिंक सल्फेट तथा 1% आयरन सल्फेट का पर्णीय छिडकाव किया जा सकता है।

प्रधान वैज्ञानिक डॉ बी.यू. दुपारे ने सोयाबीन के पौष्टिक गुण, सोया आधारित खाद्य पदार्थ,प्रसंस्करण तकनीकी उपयुक्त बायोफोर्टीफाइड सोयाबीन किस्मों की चर्चा की और सोया प्रोटीन को एक अत्यंत किफायती स्त्रोत बताया। इंदौर संस्थान द्वारा विकसित कुनित्ज़ ट्रिप्सिन इन्हिबिटर मुक्त किस्म एन.आर. सी. 127 ,सोयाबीन की विशिष्ट गंध के कारक लायपोक्सीजिनेज-2 अम्ल से मुक्त किस्म एन.आर. सी. 142  और अधिक ओलिक अम्ल युक्त किस्म एन.आर.सी. 147 किस्म का जिक्र किया जो भविष्य में सोया तेल का अधिक दिन तक उपभोग करने में सक्षम है। आपने संस्थान में स्थापित एग्री बिजनेस इन्क्यूबेशन केंद्र  में बनाये जा रहे सोया आधारित खाद्य पदार्थो की प्रसंस्करण तकनीक  एवं उद्यमिता विकास/स्टार्ट अप कार्यक्रम की सुविधा से भी अवगत कराया।

अपने स्वागत भाषण में  डॉ बी. यू. दुपारे ने मानव शरीर के लिए आवश्यक पोषक-तत्वों वाले अनाज व खाद्यान्न की बायो-फोर्टीफाईड किस्मों से युक्त खाद्यान्न के समावेश को आवश्यक बताया। जबकि आई.टी.सी. लि ,मप्र  के श्री भुवनेश तथा सोलिडेरीडेड, भोपाल के श्री हिमांशु बैंस ने संस्थान के साथ तकनीकी  हस्तांतरण के क्षेत्र में मिलकर किये जा रहे कार्यों की जानकारी देकर कृषि तकनीकियों के प्रचार-प्रसार एवं उनके कृषकों में अंगीकरण हेतु निरंतर प्रयास करने की सहमति दर्शाई। संगोष्ठी में शामिल लोगों के  प्रश्नों एवं समस्याओं का  सार्थक चर्चा से निराकरण किया गया। अंत में श्री श्याम किशोर वर्मा ने धन्यवाद  ज्ञापित किया।

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