राज्य कृषि समाचार (State News)

बर्ड फ्लू का ख़तरा अब पालतू पशुओं में भी: डॉ. मित्रा

अतुल सक्सेना

09 जुलाई 2024, भोपाल: बर्ड फ्लू का ख़तरा अब पालतू पशुओं में भी: डॉ. मित्रा – बर्ड फ्लू यानि एवियन इन्फ्लुएंजा का खतरा अब पालतू जानवरों में भी बढऩे लगा है। इसे नजरअंदाज करना इंसानों के लिए जोखिम कारक साबित हो सकता है। अब तक इसका प्रभाव पक्षियों की आबादी पर दिख रहा था, मगर हाल ही में आई रिसर्च के अनुसार पालतू पशु भी इसकी चपेट में आ सकते हैं। वे पालतू पशु जो दिन भर किसी न किसी प्रकार से इंसानों के संपर्क में रहते हैं और उनके घर पर रहते हैं। इससे घर में संक्रमण के फैलने की संभावना बढ़ रही है। पशु पक्षियों का स्वास्थ्य बिगडऩे पर इसका प्रतिकूल प्रभाव मानव पर भी पड़ता है। मानव स्वास्थ्य के क्षेत्र में तो हर रोग के लिए विशेषज्ञ है, परंतु पशु स्वास्थ्य का दायरा सीमित है। जितना ध्यान मानव स्वास्थ्य पर दिया जा रहा है उतना ही पशु स्वास्थ्य एवं पर्यावरण स्वास्थ्य के प्रति भी सजगता होनी चाहिए, तभी हम समग्र स्वास्थ्य की बात कर सकते हैं। वाइल्डलाइफ हेल्थ पर भी पूरा ध्यान दिए जाने की आवश्यकता है। यह जानकारी भारत सरकार के पशुपालन एवं डेयरी आयुक्त डॉ. अभिजीत मित्रा ने कृषक जगत को एक विशेष मुलाकात में दी। डॉ. मित्रा गत दिनों बर्ड-फ्लू पर आयोजित कार्यशाला में भाग लेने भोपाल आए थे।

डॉ. अभिजीत मित्रा
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बर्ड बर्ड-फ्लू केरल में– डॉ. मित्रा ने बताया कि बर्ड-फ्लू मुर्गियों में होने वाली घातक बीमारी है, जो संक्रमण के द्वारा फैलती है। वर्तमान में केरल के तीन जिले अलप्पुझा, कोट्टायम एवं पथानामथिट्टा इसकी चपेट में है। उन्होंने बताया कि लगभग 23 से 75 केस बतखों के फार्म पर पाए गए हैं। इससे बचाव के उपाय किए जा रहे हैं।

बन रहा है एक्शन प्लान– आयुक्त ने बताया कि वर्ष 2005 में संभावना के आधार पर बर्ड-फ्लू के नियंत्रण एवं निगरानी के लिए पहला एक्शन प्लान तैयार किया गया था, जबकि देश में वर्ष 2006 में बर्ड-फ्लू का पहला केस आया था। उन्होंने बताया कि अब तक नेशनल एक्शन प्लान 2021 के तहत देश भर में कार्यवाही की जा रही थी, इसमें सेम्पलिंग करने का तरीका एवं रोगों की रोकथाम पर जोर था, लेकिन अब इस कार्यशाला में आए सुझावों एवं विचारों के पश्चात वर्ष 2024 का एक्शन प्लान तैयार किया जाएगा। जिसमें पशु-पक्षी मानव स्वास्थ्य एवं प्रयोगशालाओं को पूरी तरह सक्षम बनाया जाएगा।

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6 प्रयोगशालाएं– उन्होंने बताया कि वर्तमान में एवियन एन्फ्लूंएजा वायरस के नमूनों की टेस्टिंग के लिए देश में 6 क्षेत्रीय प्रयोगशालाएं कार्य कर रही है जो बैंगलुरू, पुणे, कोलकाता, गुवाहाटी, इज्जतनगर एवं जालंधर में है। यहां 70 फीसदी नमूने टेस्ट किए जाते हैं जबकि 30 फीसदी नमूने की जांच उच्च सुरक्षा पशु रोग प्रयोगशाला भोपाल में होती है। नमूनों की जांच वर्ष भर होती रहती है। इन्फ्लूएंजा वायरस की रोकथाम के संबंध में डॉ. मित्रा ने बताया कि पूरे विश्व में इस वायरस का टीका एवं वैक्सीन नहीं है। एतिहात के तौर पर फार्म के आसपास के क्षेत्र को सील कर क्वारेंटाइन कर, संक्रमित पक्षियों को नष्ट कर पोल्ट्री फार्म को रोगमुक्त रखने का प्रयास किया जाता है। उन्होंने बताया कि देश में 32 डिजीज फ्री कम्पार्टमेंट बनाए गए हैं जिसका उपयोग बचाव में किया जाता है तथा हर वर्ष इन कंपार्टमेंट का नवीनीकरण किया जाता है।
आयुक्त ने बताया कि पशुओं से इंसानों में आने वाले खतरे को भांपकर, मौसम के समान ही बीमारियों की अग्रिम चेतावनियां जारी करने का विभाग प्रयास कर रहा है। फील्ड से जानकारी से सटीकता का अभाव है, परन्तु कुछ हद तक पूर्वानुमान लगाया जा सकता है।

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लम्पी कंट्रोल में- कुछ समय पूर्व पशुओं में फैली लम्पी बीमारी के संबंध में पशुपालन आयुक्त ने बताया कि अब यह पूरी तरह कंट्रोल में है। इस पर लगातार निगरानी रखी जा रही है।
पशुधन से संबंधित नई योजनाओं के संबंध में डॉ. मित्रा ने बताया कि शीघ्र ही नई पशुधन योजनाएं आएंगी। वर्तमान में देश, दुग्ध उत्पादन में प्रथम, अंडे में दूसरा एवं मीट उत्पादन में 8वां स्थान रखता है।

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